इस सीट पर जब भी प्रधानमंत्री ने किया प्रचार तो हार गया उनका उम्मीदवार, क्या इस बार टूटेगी परंपरा

Gujarat News in Hindi, गांधीनगर। गुजरात की जूनागढ़ लोकसभा सीट से जुड़ी खास परंपरा रही है कि जब-जब प्रधानमंत्री प्रचार के लिए यहां आए तो सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवार की चुनाव में हार हुई। इस सीट का गठन 70 के दशक में हुआ था, तब से यह क्रम चला आ रहा है। जब प्रधानमंत्री इंदिरा थीं, तो उन्होंने यहां कांग्रेस उम्मीदवार के लिए प्रचार किया था। वह हार गया। इसके बाद राजीव गांधी ने भी बतौर प्रधानमंत्री यहां रैली की तो भी कांग्रेस उम्मीदवार हार गया।

इस सीट पर प्रधानमंत्री ने किया प्रचार तो हार गए उनके उम्मीदवार

इस सीट पर प्रधानमंत्री ने किया प्रचार तो हार गए उनके उम्मीदवार

इस बार जबकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं और उन्होंने जूनागढ़ में हाल ही भाजपा प्रत्याशी के लिए जनसभा की, तो ऐसी अटकलें हैं कि जूनागढ़ के भाजपा उम्मीदवार राजेश चुडासमा चुनाव हार जाएंगे। जबकि, आमतौर पर ये माना जाता है कि जब भी प्रधानमंत्री अपने उम्मीदवार के लिए प्रचार करते आते हैं तो वो सीट उम्मीदवार को चुनाव में अच्छा परिणाम देती है। मगर, जूनागढ़ सीट पर उलटा होता रहा है।

ऐसे बन गया क्रम कि नहीं टूटा, अब मोदी की परख

ऐसे बन गया क्रम कि नहीं टूटा, अब मोदी की परख

1970 के दौर से जब इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते जूनागढ़ में प्रचार करने के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी हारे तो यह एक क्रम बन गया कि प्रधानमंत्री यहां आए तो भी प्रत्याशी की हार हो जाए। इंदिरा के बाद जब 1989 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री राजीव गांधी कांग्रेस के मोहनभाई पटेल के लिए प्रचार करने आए तो वे जनता दल के गोविंद शेखडा से हार गए। हार की इस परंपरा पर जूनागढ़ कांग्रेस के स्थानीय विधायक भीखाभाई जोशी का कहना है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार के लिये जूनागढ आए थे, तो मैंने उनके विधायक महेंद्र मशरू को हरा दिया था। जबकि, महेंद्र मशरू के बारे में यह बात रही थी कि वे कभी चुनाव नहीं हारे थे। वे छह बार जीतकर गुजरात विधानसभा में गए थे।

कांग्रेस को आशा- अब हमारा प्रत्याशी जीतेगा

कांग्रेस को आशा- अब हमारा प्रत्याशी जीतेगा

भीखाभाई जोषी कहते हैं कि इस बार 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार राजेश चुडासमा को जिताने के लिए जूनागढ़ में जनसभा की, जबकि उन्हें अंदाजा होगा कि अगर मैंने जूनागढ़ में जनसभा की तो मेरा उम्मीदवार हार जाएगा। फिर भी वे जूनागढ़ आ गए। अब परिणाम आएगा तो पता चलेगा कि जूनागढ़ की परंपरा कायम रहती है या मोदी उसे तोड़ते हैं। मैं तो मानता हूं कि हमारे उम्मीदवार पुंजा-वंश जूनागढ़ से जीत जाएंगे।''

वलसाड की भी ऐसी ही परंपरा

वलसाड की भी ऐसी ही परंपरा

गुजरात में वलसाड लोकसभा सीट ऐसी रही है कि जो उम्मीदवार चुनाव जीतता है, उसी की पार्टी की केंद्र में सरकार बनती है। ऐसी परंपरा जूनागढ़ की भी है, जब सत्तारूढ़ दल का प्रधानमंत्री अपनी पार्टी के उम्मीदवार के लिए चुनावी प्रचार के लिये आता है या जनसभा करता है तो उसका उम्मीदवार चुनाव हार जाता है।

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