यहां 7 बार जीती कांग्रेस और 5 बार भाजपा, इस बार मोदी मैजिक नहीं चला तो टूटेंगे 'फिर 26' के सपने
Ground Report amreli lok sabha seat, गांधीनगर। गुजरात में अमरेली लोकसभा सीट पर इस बार कांग्रेस-भाजपा के बीच कांटे की टक्कर है। इतिहास पर नजर डालें तो यहां 7 बार कांग्रेस और 5 बार भाजपा के प्रत्याशी जीते हैं। इसके अलावा यह सीट जनता दल के कब्जे में भी रही। 15 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को देखें तो अब यहां कांग्रेस का पलड़ा भारी है। भाजपा ने इस सीट पर अपने सांसद को दोबारा उतारा है, ऐसे में वोटरों की उनसे नाराजगी पार्टी को भारी पड़ सकती है। राजनीति के स्थानीय जानकार कहते हैं कि कांग्रेस द्वारा उतारे गए युवा प्रत्याशी लोकप्रियता में भाजपा के प्रत्याशी से आगे हैं। पाटीदारों की नाराजगी के बीच यहां मोदी ही मुद्दा हो सकते हैं, यदि इस बार मोदी मैजिक नहीं चला तो सीट कांग्रेस के खाते में चली जाएगी।

इस बार मोदी मैजिक के सहारे जीतना चाहते हैं 2 बार के सांसद नारण काछड़िया
बता दें कि, सत्ताधारी भाजपा ने अमरेली से सांसद नारण काछड़िया को ही टिकट दिया है। कांग्रेस ने विधानसभा के विपक्षी नेता और विधायक परेश धानानी को उनके सामने उतारा है। कांग्रेस-भाजपा के यहां कई बार जीतने के अलावा 1989 में पूर्व मुख्यमंत्री चीमनभाई पटेल के करीबी व जनतादल के उम्मीदवार मनुभाई कोटडिया चुनाव जीते थे। जबकि, नारण काछड़िया दो बार यहां से सांसद रह चुके हैं। तीसरी बार भी भाजपा ने उन पर दांव खेला है, जबकि उन्हें इस बार मोदी मैजिक का सहारा है।

13 लाख मतदाता, पाटीदारों (पटेल) की संख्या ज्यादा
अमरेली में 13 लाख मतदाता हैं, जिनमें पाटीदारों (पटेल) की संख्या ज्यादा है। कांग्रेस पटेलों के गुस्से को फिर भुनाना चाहती है, हालांकि जो पटेल आंदोलन का चेहरा थे, वे अब भाजपा और कांग्रेस दोनों चेहरे बन चुके हैं। आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण देकर भाजपा ने नाराज पटेलों को काफी हद तक मना लिया है। इस सीट पर उद्योग-धंधे की बात की जाए तो यहां हीरा उद्योग का नाम लिया जा सकता है। खेती यहाँ का सबसे बड़ा व्यवसाय है। खेती से जुड़ी तेल मिलों का उद्योग भी इसी क्षेत्र में है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में भाजपा को बहुत नुकसान हुआ था, जिसकी बड़ी वजह पाटीदारों का आंदोलन रहा।

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का पलड़ा भाजपा से भारी रहा
प्रदेश कांग्रेस की नब्ज टटोलने वाले कई लोग कहते हैं कि 2017 के विधानसभा चुनाव में सौराष्ट्र इलाके से कांग्रेस को सबसे अधिक सीटें जीताने में परेश धानानी का अहम योगदान रहा। इस क्षेत्र में फसल बीमा, सिंचाई जल और बिजली की समस्याएं हैं। किसान और पाटीदार समाज की नाराजगी भाजपा को भारी पड़ सकती है। भले ही भारतीय जनता पार्टी ने पिछले दो टर्म से अमरेली लोकसभा सीट जीत ली हो, लेकिन इस बार परेश धानानी भाजपा के लिए मुसीबत बन सकते हैं। गांवों में कांग्रेस मतदाताओं के बीच जाकर भाजपा के खिलाफ माहौल बना चुकी है।अगर मोदी मैजिक नहीं चलता है, तो भाजपा उम्मीदवार की जीत मुश्किल है।

मोदी-राहुल दोनों यहां प्रचार करने आ रहे हैं
अमरेली सीट पाने के लिए, भाजपा ने अपने स्टार प्रचारकों के साथ अधिक जनसभा का आयोजन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अमरेली में जनसभाओं को संबोधित करने आ रहे हैं। दोनों पार्टियों के लिए अमरेली की लोकसभा सीट एक प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गई है।












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