गोधरा कांड में मारे गए कारसेवकों के परिजनों को गुजरात सरकार देगी 5-5 लाख का मुआवजा
Gujarat News, गांधीनगर। गुजरात दंगों के समय गोधरा कांड में जलकर जिन कारसेवकों की मौत हुई, सरकार उनके परिजनों को 5-5 लाख रुपए तक का मुआवजा देगी। राज्य सरकार ने यह ऐलान दंगों के 17 साल बाद किया है। परिजनों को दी जानी वाली राशि मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रदान की जाएगी। मुआवजे के लिए कुल 200 लाख रुपए का इंतजाम होगा।
गृहमंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने बताया कि गोधरा ट्रेन स्टेशन पर कोच में आगकांड के शिकार हुए लोगों के परिजनों को सरकार ने 5 लाख रुपए का मुआवजा देने का फैसला किया है। इस आगकांड में 59 कारसेवकों की मौत हुई थी। बकौल प्रदीप सिंह, 'गुजरात उच्च न्यायालय के आपराधिक अपील सं 556/2011, दिनांक 09.09.2017 में, 27/22/2002 के गोधरा ट्रेन स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के डिब्बे को जलाने से जिनकी मृत्यु हुई और जो घायल हुए थे उनके परिवारों को मुआवजा मिलेगा।'

59 मौतों में से 52 की पहचान हुई थी
बता दें कि, गोधरा की इस दुखद घटना में कुल 59 लोगों के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें से 52 लोगों की पहचान हुई थी। जबकि, 7 अन्य मृतकों की पहचान नहीं हो पाई। ऐसे में 52 मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपए के हिसाब से 260 लाख रुपए का भुगतान किया जा सकता है। इसके लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को धन हस्तांतरित किया गया है।

कब हुए गुजरात में दंगे
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2002 में 27 फरवरी की सुबह साबरमती एक्सप्रेस में रेल के डिब्बे में जलकर मरे कारसेवकों की संख्या 59 थी। ये सभी हिंदू थे। इस घटना के बाद ही गुजरात में व्यापक स्तर पर दंगे भड़के थे।

कितने लोग मारे गए थे?
दंगों में कुल 1044 लोग मारे गए। जिनमें 790 मुसलमान और 254 हिंदू मृतक बताए गए। गोधरा कांड समेत हिंदू मृतकों की संख्या 320 थी।

450 से अधिक लोगों को दोषी ठहराया गया था
इस मामले में 450 से अधिक लोगों को अदालतों ने दंगों में दोषी ठहराया। इन लोगों में लगभग 350 हिंदू और 100 मुसलमान बताए गए। इन 100 मुसलमानों में 31 को गोधरा कांड के लिए और बाक़ियों को उसके बाद भड़के दंगों के लिए दोषी पाया गया।












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