गुजरात: सिरेमिक उद्योग भी मंदी की चपेट में, टर्नओवर में आई 12 हजार करोड़ की गिरावट
गांधीनगर। गुजरात में सिरेमिक उद्योग भी आर्थिक मंदी की वजह से चौपट होता दिख रहा है। यहां मोरबी स्थित इकाईयों के उत्पादन में भारी गिरावट आई है। रियल एस्टेट की सुस्ती बीच ब्रिकी भी 35 प्रतिशत तक घट गई है। राज्य के सिरेमिक उद्योग का टर्नओवर 12 हजार करोड़ तक गिर जाने की बात कही जा रही है। कुछ महीनों पहले मोरबी में लगभग 5,500 ट्रक लोड और अनलोड किए जाते थे। किंतु अब यह संख्या घटकर 3,500 रह गई है।

मोरबी ट्रक ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रभात डांगर का कहना है कि मोरबी में सिरेमिक टाइल्स के उत्पादन में गिरावट से चीनी मिट्टी में वाणिज्य पर निर्भर ट्रांसपोर्टर्स को मुश्किल हुई है। भारत के सिरेमिक के सबसे बड़े क्लस्टर में निर्माताओं का कहना है कि उनके पास उत्पादन में कटौती करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में सुस्त रियल एस्टेट बाजार और खराब खुदरा बिक्री के कारण, सिरेमिक टाइल्स की मांग में उन्हें 35% की गिरावट का सामना करना पड़ रहा है।

वर्ष 2019 मोरबी में टाइल निर्माताओं के लिए एक रोलरकोस्टर की सवारी रही है। इस साल की शुरुआत में, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कोयला-गैसीफायर पर चलने वाली इकाइयों को बंद करने का आदेश दिया। कई अधिकारियों का कहना है कि पिछले दिनों कोयला गैसफिलरों का इस्तेमाल करने पर 400 करोड़ रुपए का जुर्माना लगा। जिसके चलते प्राकृतिक गैस उद्योग की मांग भी कम हुई।
घरेलू मांग में गिरावट ने सिरेमिक टाइल निर्माताओं को 25-30% तक उत्पादन में कटौती करने के लिए प्रेरित किया है। मोरबी सिरेमिक्स एसोसिएशन (एमसीए) के वॉल टाइल्स डिवीजन के अध्यक्ष नीलेश जतपरिया का कहना है कि पिछले दो महीनों में मोरबी में गैस की खपत में 27% की कमी आई है। विंटेल सेरामिक्स प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष केजी कुंदरिया कहते हैं कि, 40-50 टाइल विनिर्माण इकाइयों का उत्पादन रुका हुआ है। मोरबी में लगभग 850 इकाइयाँ हैं जो दीवार, फर्श और विट्रीफाइड टाइल्स बनाती हैं। इनमें से कई प्लांट 70% प्लांट की क्षमता पर चल रहे हैं।
दूसरी ओर मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडस्ट्री का टर्नओवर 42,000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष से घटकर 30,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।












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