गुजरात में कहां है आरटीई? 15 साल का बच्चा शिक्षामंत्री से मिलने आया, जवाब सुन निराश होकर लौटा

Gujarat News in Hindi, गांधीनगर। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम देशभर में लागू होता है, लेकिन गुजरात में ऐसे मामले सामने आते हैं, जिसमें बच्चों को न्याय नहीं मिल पाता। ऐसे बच्चे जो पढ़ना चाहते हैं लेकिन उनकी अक्षमता देखते हुए स्कूल उन्हें अनुमति नहीं देते हैं, उन बच्चों को आरटीई ही एक मात्र विकल्प बचता है। यहां अहमदाबाद में जो मामला सामने आया है, उसके बारे में जानकर यह सवाल उठेगा कि क्या यहां आरटीई लागू है? दरअसल, 15 साल का एक बच्चा सचिवालय में शिक्षा मंत्री से मिलने आया था, लेकिन उसे शिक्षा मंत्री ने जो उत्तर दिया, उसे सुन वह निराश होकर वहां से लौटा।

अपने हाथ में फाइल लेकर सचिवालय पहुंचा था विवेक

अपने हाथ में फाइल लेकर सचिवालय पहुंचा था विवेक

जानकारी के अनुसार, विवेक दास नामक 15 साल का किशोर अपने हाथ में फाइल लेकर सचिवालय पहुंचा। उसने बताया कि कक्षा-10 वीं पास कर ली और आगे भी पढ़ रहा है। उसकी इच्छा है कि जैसे वह पढ़ रहा है, वैसे ही उसके छोटे भाई-बहन भी पढ़ें, लेकिन स्कूल उनको एडमिशन नहीं दे रहे हैं। जिला कलेक्टर ने पत्र लिखकर स्कूल को बोला कि इन बच्चों को प्रवेश दिया जाए, लेकिन स्कूल संचालक मानते नहीं है। ऐसे में वह अपने भाई-बहन को पढ़ाने के लिए वह सचिवालय आया।'

उसने आगे कहा, ''मैं सचिवालय में अपने भाई-बहन के लिए पढ़ाने की शिफारिश करने के लिए आया हूं। मेरी मां और पिता अनपढ़ हैं, लेकिन हमें पढ़ाई करनी है। मेरे पिता प्लंबिंग का काम करते हैं और मां गृहिणी हैं। पहले मैं शिक्षा विभाग के अधिकारी को मिला था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसलिए अब मैं शिक्षा मंत्री से मिलने आया हूं।''

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कैबिनेट बैठक के बाद मिले शिक्षा मंत्री भूपेंद्रसिंह चुडासमा

कैबिनेट बैठक के बाद मिले शिक्षा मंत्री भूपेंद्रसिंह चुडासमा

कैबिनेट बैठक के बाद राज्य के शिक्षा मंत्री भूपेंद्रसिंह चुडासमा अपने कार्यालय में आए विवेक से मिले। विवके की बात सुन उन्होंने कहा, 'जैसा कि आपने बताया कि आपके भाई-बहन को तकनीक वजह से एडमिशन नहीं मिल रहा, तो हमें कानून और नियमों के अनुसार काम करना होता है, वही करेंगे।' चुडासमा का यह जवाब सुनकर विवेक की सारी उम्मीदें टूट गईं। उसके पास अपने भाई और बहन को पढ़ाने के लिये कोई आशा नहीं बची। वह बच्चा सचिवालय से निराश होकर अपने घर लौट गया।

..और टूट गईं विवेक की उम्मीदें

..और टूट गईं विवेक की उम्मीदें

अब सवाल ये उठते हैं कि जहां केंद्र और राज्य सरकार कहती रही हैं कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए। इसके ​लिए सरकार ने 'शिक्षा का अधिकार' नाम से कानून बनाया है। मगर, गुजरात में जो इस 15 साल के बच्चे की उम्मीदें टूटी हैं, क्या वे आरटीई के तहत हल नहीं हो सकतीं? वह अपने भाई-बहन को पढ़ाने के लिए सरकारी कार्यालयों में भटकता फिर रहा है।

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