World Asteroid Day: 2016 में इस दिन को मनाने की मिली थी मंजूरी, जानिए रूस की तुंगुस्का नदी से इसका संबंध

नई दिल्ली, जून 30। दुनिया आज विश्व एस्टेरॉयड दिवस (World Asteroid Day) मना रही है। हर साल ये दिवस 30 जून को मनाया जाता है। आपको बता दें कि वर्ल्ड एस्टेरॉयड डे आमतौर पर एस्टेरॉयड के खतरनाक प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने और पृथ्वी पर मंडराने वाले खतरों के उपायों पर चर्चा करने के लिए मनाया जाता है। साथ ही इस दिन उन वैज्ञानिक रहस्यों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाते हैं।

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    World Asteriod Day

    इस दिन मनाई जाती है तुंगुस्का नदी घटना की वर्षगांठ

    संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने साल 2016 में इस दिन को रूस के साइबेरिया में तुंगुस्का नदी पर हुई एस्टेरॉयड की सबसे बड़ी घटना से जोड़कर इसे नॉमिनेट किया था। इस दिवस की सह स्थापना वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग, फिल्म निर्माता ग्रिगोरिज रिक्टर्स, बी612 फाउंडेशन के अध्यक्ष डैनिका रेमी, अपोलो 9 अंतरिक्ष यात्री रस्टी श्वीकार्ट और रॉक बैंड क्वीन के गिटारवादक और खगोल भौतिकीविद् ब्रायन मे ने की थी। तब से हर साल तुंगुस्का नदी की घटना की वर्षगांठ के रूप में इस दिन को मनाया जाता है।

    क्या थी तुंगुस्का नदी की घटना

    दरअसल, 30 जून 1908 में रूस के साइबेरिया में तुंगुस्का नदी के पास एक बहुत बड़ा विस्फोट था। नासा के मुताबिक, आधुनिक इतिहास में पृथ्वी के वायुमंडल में एक बड़े उल्कापिंड का पहला प्रवेश तुंगुस्का घटना के रूप में ही हुआ था। कहते हैं कि कई मील उपर हवा में जोरदार विस्फोट हुआ था और उस विस्फोट की ताकत इतनी थी कि 2,150 वर्ग किमी के क्षेत्र में तकरीबन 80 मिलियन पेड़ खत्म हो गए थे। नासा का कहना है कि उस दिन एक उल्कापिंड साइबेरिया के एक दूरदराज के हिस्से से टकराया था, लेकिन जमीन पर नहीं पहुंचा। बताया जाता है कि उल्का पिंड में हवा में ही विस्फोट हो गया और सैकड़ों मील चौड़े क्षेत्र में पेड़ों पर कहर बन कर टूटा। इस विस्फोट में कई जंगली जानवर भी मारे गए थे।

    क्या होता है एस्टेरॉयड?

    एस्टेरॉयड (Asteroid) एक तरह के चट्टानी अवशेष होते हैं, जो लगभग 4.6 अरब साल पहले हमारे सौर मंडल के प्रारंभिक गठन से बचे हुए बताए जाते हैं। नासा के मुताबिक, वर्तमान में 1,097,106 क्षुद्रग्रह अंतरिक्ष में मौजूद हैं, ये हमेशा सूर्य की परिक्रमा करते हैं। ये क्षुद्रग्रह मंगल और बृहस्पति ग्रह की कक्षाओं के बीच पाए जाते हैं। इनका आकार लगभग कंकड़ के आकार से लेकर लगभग 600 मील की दूरी तक होता है।

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