D2M Technology: क्या ब्रॉडकास्टर्स के लिए संजीवनी बनेगी डायरेक्ट-टू-मोबाइल टेक्नोलॉजी?
बहुत जल्द आप अपने मोबाइल फोन पर बिना किसी इंटरनेट के टीवी देख पाएंगे। दूरसंचार विभाग और केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इसकी तैयारी कर ली है। जिस तरह से आप अपने घर में सेट टॉप बॉक्स लगाकर डायरेक्ट टू होम यानी डीटीएस सर्विस के जरिए टीवी चैनल्स देख पाते हैं ठीक उसी तरह से आने वाले दिनों में आपको डायरेक्ट-टू-मोबाइल यानी डीटीएम सर्विस का लाभ मिलेगा।
दूरसंचार विभाग ने इसके लिए आईआईटी कानपुर समेत मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर्स, सैटेलाइट चैनल्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स को एक फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए कहा है। हालांकि, इसमें मोबाइल नेटवर्क प्रोवाइडर्स को यह डर है कि डीटीएम सेवा शुरू होने के बाद लोग डेटा रिचार्ज करवाना बंद कर सकते हैं, जिसकी वजह से उनको नुकसान हो सकता है।

पहले भी डीटीएम सर्विस को लेकर कवायद की जा चुकी है, लेकिन अभी तक इसे पटल पर उतारा नहीं जा सका है। सरकार और दूरसंचार विभाग सेटेलाइट चैनल्स की व्यूअरशिप में दिनों-दिन हो रही कमी को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना पर काम कर रहे हैं। मोबाइल पर बिना इंटरनेट के अगर सेटेलाइट चैनल्स देखे जाएंगे, तो दर्शकों को फ्री-टू-एयर चैनल्स देखने के लिए कुछ भी खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, अभी तक डायरेक्ट-टू-मोबाइल सर्विस और उसके प्लान्स को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। आइए, इस टेक्नोलॉजी और सर्विस के बारे में विस्तार से जानते हैं।
क्या है डीटीएम (डायरेक्ट-टू-मोबाइल)?
पिछले साल जून में आईआईटी कानपुर, प्रसार भारती और टेलीकॉम डेवलपमेंट सोसाइटी ने डायरेक्ट-टू-मोबाइल सर्विस को लेकर एक श्वेत पत्र जारी किया था। इसमें नेक्स्ट जेनरेशन ब्रॉडकास्टिंग यानी डायरेक्ट-टू-मोबाइल (डीटीएम) में मौजूदा और भविष्य की टेक्नोलॉजी को समावेश करने की बात कही गई है। इस समय भारत में 800 मिलियन यानी 80 करोड़ से ज्यादा मोबाइल यूजर्स हैं, जो इस नेक्स्ट जेनरेशन ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी के जरिए अपने पसंदीदा टीवी चैनल्स और शोज को मोबाइल पर देख सकेंगे। इसके अलावा सरकार इसका इस्तेमाल शिक्षा और इमरजेंसी अलर्ट के लिए भी कर सकेगी।
डायरेक्ट-टू-मोबाइल सर्विस को एफएम रेडियो की तरह ही यूजर्स के मोबाइल डिवाइसेज तक पहुंचाया जाएगा। इसमें लोगों का मोबाइल डिवाइस एक रिसीवर का काम करेगा, जो अलग-अलग रेडियो फ्रिक्वेंसी पर टीवी चैनल देखने की आजादी देगा। इस न्यू एज टेक्नोलॉजी में ब्रॉडबैंड और ब्रॉडकास्ट का कॉम्बिनेशन रहेगा, जो यूजर्स के मोबाइल फोन को टेरियोरियल डिजिटल सिग्नल पहुंचाएगा। डायरेक्ट-टू-मोबाइल का इस्तेमाल करके मल्टीमीडिया कॉन्टेंट्स, जिनमें लाइव मैच, धारावाहिक, समाचार आदि को फोन पर डायरेक्टली स्ट्रीम किया जा सकेगा। इसके लिए डिवाइस को इंटरनेट से कनेक्ट करने की जरूरत नहीं होगी।
इसके लिए 526 से 582 MHz (मेगाहर्ट्ज) बैंड का इस्तेमाल किया जाएगा, जो मोबाइल और ब्रॉडकास्ट दोनों सर्विस के लिए है। दूरसंचार विभाग ने इस बैंड की स्टडी करने के लिए एक समिति का गठन किया है। इस समय इस बैंड का इस्तेमाल प्रसार भारती (दूरदर्शन) अपने टेरेस्टीयर टीवी ब्रॉडकास्ट के लिए कर रही है। इस बैंड में कई डिजिटल रेडी और डिजिटल टेरेस्टियल टीवी ट्रांसमीटर ऑफरेट किए जा रहे हैं।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
इन दिनों दर्शक ज्यादा से ज्यादा वीडियो कॉन्टेंट अपने स्मार्टफोन या मोबाइल डिवाइस पर कंज्यूम कर रहे हैं। इसकी वजह से भारत में मोबाइल डेटा खपत काफी तेजी से बढ़ी है। इसलिए मोबाइल फोन पर डिजिटल ब्रॉडकॉस्टिंग को टेस्ट किया जा रहा है। आईआईटी कानपुर की स्टडी के मुताबिक, ब्रॉडकास्टिंग वाले स्मार्टफोन में मल्टीपल हाई क्वालिटी ऑडियो/वीडियो सर्विस को एक्सेस किया जा सकता है। इस डायरेक्ट-टू-मोबाइल टेक्नोलॉजी की वजह से महंगे सेल्यूलर स्पेक्ट्रम बैंड पर लोड कम हो जाएगा। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए फैलाए जाने वाले फर्जी न्यूज और दिनों-दिन पनप रहे यूट्यूब चैनल्स पर लगाम लगाई जा सकेगी।
क्या है फायदा और नुकसान?
मोबाइल पर टीवी ब्रॉडकास्ट करना एक राष्ट्रीय रुचि का विषय होगा। आईआईटी कानपुर द्वारा जारी श्वेत पत्र के मुताबिक, डीटीएम सर्विस को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सर्विस किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सूचना प्रसारित करने में सक्षम होगी। इसके लिए सेल्युलर नेटवर्क और मोबाइल ऑपरेटर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह सरकार के लिए सबसे सरल और सुगम माध्यम बन सकता है। इसके अलावा आपात स्थिति में ऑडियो-वीडियो कॉन्टेंट को लोगों तक मोबाइल पर पहुंचाया जा सकेगा।
टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को इस सर्विस से कुछ आशंकाएं हैं, क्योंकि इसकी वजह से उनके रेवेन्यू में कमी होने का डर है। टेलीकॉम कंपनियों का मानना है कि इसकी वजह से लोग अपने मोबाइल फोन पर डेटा रिचार्ज नहीं कराएंगे, जो उनके लिए घाटे का सौदा हो सकता है। इस समय देश में 5G नेटवर्क रोल आउट करने के लिए टेलीकॉम कंपनियां बड़े पैमाने पर इन्वेस्ट कर रही हैं। उनके रेवेन्यू में कमी होने का असर उनकी सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
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