पितरों के श्राप से मुक्ति मिलेगी श्राद्ध पक्ष में

महिर्ष भृगु ने अपने अतुलनीय ग्रन्थ भृगु संहिता में अनेक प्रकार के श्रापों का उल्लेख किया है। जैसे- ब्रहाण श्राप, सर्प श्राप, भार्इ श्राप, मातृ श्राप, पत्नी श्राप, मामा श्राप, पितृ श्राप अथवा पितर श्राप आदि। इन सभी श्रापों के कारण व्यकित को नाना प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जिसके फलस्वरूप प्रगति में अवरोध, कार्यो में अड़चने, आर्थिक क्षति, सन्तान सुख में कमी व शत्रु हावी होकर परेशान होते है।

जब पितरों के कर्मों का लोप होने लगता है अर्थात जातक के द्वारा पितरों के श्राद्ध आदि कर्म उचित व विधिपूर्वक नहीं किये जाते है तो पितर प्रेत योनि में चले जाते है और जातक के वंश वृद्धि, धन वृद्धि, विकास, पद, प्रतिष्ठा आदि में बाधायें आने लगती है।

Pind Daan

एक मास में दो पक्ष होते है। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष, एक पक्ष 15 दिन का होता है। आशिवन मास के कृष्ण पक्ष के पन्द्रह दिन पितृ पक्ष के नाम से प्रचलित है। इन 15 दिनों में लोग अपने पूर्वजोंपितरों को जल देंते है तथा उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करते है। पितरों का ऋण श्राद्धों के द्वारा उतारा जाता है। पितृ पक्ष श्राद्धों के लिए निशिचत पन्द्रह तिथियों का कार्यकाल है। वर्ष के किसी महीना या तिथि में स्वर्गवासी हुए पूर्वजों के लिए कृष्ण पक्ष की उसी तिथि को श्राद्ध किया जाता है। इस बार श्राद्ध पक्ष 19 सितम्बर से 04 अक्टूबर तक रहेगा।

किसी भी व्यकित को पितृ दोष के कारण बाधायें, प्रगति में गिरावट, सन्तान से कष्ट, मानसिक दशा में गिरावट, आर्थिक विपन्नता हो रही है, तो श्राद्ध पक्ष में उस जातक को पूरे विधि-विधान से पितरों का श्राद्ध करना चाहिए और तर्पण करना चाहिए। पितृ पक्ष में तर्पण करने से पितरों के श्राप से बचा जा सकता है।

तर्पण विधि- पीतल की थाली में विशुद्ध जल भरकर, उसमें थोड़े काले तिल व दूध डालकर अपने समक्ष रख लें एंव उसके आगे दूसरा खाली पात्र रख लें। तर्पण करते समय दोनों हाथ के अंगूठे और तर्जनी के मध्य कुश लेकर अंजली बना लें अर्थात दोनों हाथों को परस्पर मिलाकर उस मृत प्राणी का नाम लेकर तृप्यन्ताम कहते हुये अंजली में भरा हुये जल को दूसरे खाली पात्र में छोड़ दें। एक-2 व्यकित के लिए कम से कम तीन-तीन अंजली तर्पण करना उत्तम रहता है।

ऊत्रिपुरायै च विदमहे भैरव्यै च धीमहि, तन्नो देवी प्रचोदयात। इस मन्त्र की 2 माला जाप करने के पश्चात पूजन स्थान पर रखें हुये जल के थोड़े भाग को आखों में लगायें, थोड़ा जल घर में छिड़क दें और बचे हुये जल को पीपल के पेड़ में अर्पित कर दें। ऐसा करने से घर से नकारात्मक उर्जा निकल जायेगी और घर की लगभग हर प्रकार की समस्या से आप मुक्त हो जायेंगे।

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