Poachers in Andaman: अंडमान-निकोबार में कहां से आते हैं शिकारी, क्या कहता है कानून?

Poachers in Andaman: अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के सुदूर नारकोंडम द्वीप में बीते दिनों म्यांमार के छह संदिग्ध शिकारियों के शव मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन शिकारियों के पास मौजूद खाने-पीने का सामान खत्म हो गया था। जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई। द्वीप तक पहुंचने के लिए वे जिस छोटी नाव का उपयोग करते थे उसमें कुछ खराबी आ गई थी और वे वापस नहीं लौट सके थे।

अब सवाल ये है कि आखिर ये शिकारी अंडमान-निकोबार में आते कहां से हैं और क्यों? ऐसा क्या है अंडमान में जिसके लिए हर साल हजारों की तादाद में ये शिकारी आते हैं। सितंबर, 2023 में एक न्यूज एजेंसी को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने यह जानकारी दी थी कि एक जनवरी, 2022 से दो सितंबर, 2023 तक कम से कम 157 विदेशी शिकारियों को गिरफ्तार किया गया और उनमें से 98 अकेले पिछले नौ महीनों में पकड़े गए थे।

Poachers in Andaman

उनके पास से बड़ी संख्या में समुद्री खीरे (कुकुंबर) और टर्बो घोंघे (टर्बो स्नेल) जब्त किए गए थे। साथ ही ट्रॉशस, मोलक और सी शेल का शिकार भी बड़े पैमाने पर होता है। अंडमान-निकोबार के द्वीपों पर सबसे ज्यादा म्यांमार के शिकारी पकड़े जाते हैं। पिछले दो वर्षों में द्वीपसमूह से म्यांमार के 100 से अधिक शिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही थाईलैंड, श्रीलंका, लाओस, कंबोडिया और वियतनाम तक के शिकारी अंडमान में शिकार करने आते हैं।

आखिर क्यों आते हैं ये शिकारी?

ये विदेशी शिकारी अंडमान के द्वीपों के करीब से समुद्री जीवों को पकड़ने आते हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा अंडमान के द्वीपों के करीब पाए जाते हैं। इसमें सबसे बड़ा नाम समुद्री 'कुकुंबर' का है। जो अत्यधिक विलुप्तप्राय है। समुद्री 'कुकुंबर' समुद्र तल पर जमा होने वाले सड़ने वाले पदार्थ और भोजन को खाकर समुद्र तल को साफ रखने में मदद करते हैं। इसका नाम इसके असामान्य आयताकार आकार के आधार पर रखा गया है जो एक मोटे खीरे जैसा दिखता है।

समुद्री खीरे की लगभग 1,250 प्रजातियां पायी जाती हैं, ये सभी टैक्सोनॉमिक क्लास होलोथुरोइडिया से संबंधित हैं। इनका शिकार करना आसान होता है क्योंकि ये अत्यंत धीमी गति से चलते हैं और समुद्र तल से 30-60 फुट नीचे मिलते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनका उपयोग औषधीय प्रयोजनों के लिए किया जाता है। साथ ही इनसे कामोत्तेजना बढ़ाने वाली दवाओं, कैंसर की दवा, तेल, क्रीम, कॉस्मेटिक्स बनाने में भी इसका उपयोग किया जाता है। इसलिए चीन, ताइवान, कोरिया, सिंगापुर और जापान जैसे देशों में इस जीव की बहुत मांग है।

साथ ही 'टर्बो स्नेल' की मांग भी अंतरराष्ट्रीय और ब्लैक मार्केट में काफी ज्यादा है। इस जीव की विभिन्न प्रजातियों का उपयोग विभिन्न एशियाई देशों में विदेशी भोजन तैयार करने में किया जाता है। वहीं इनके सीप का उपयोग सजावटी चीजें और आभूषणों के निर्माण में किया जाता है। अवैध व्यापार और तस्करी के बाद इन प्रजातियों की सबसे अधिक मांग दक्षिण-पूर्व एशिया, मुख्य रूप से चीन में भोजन और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में है।

कीमती होते हैं समुद्री खीरे

एक रिपोर्ट की मानें तो समुद्री खीरे का व्यापार इस वक्त पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहा है। चीन, ताइवान, कोरिया, सिंगापुर और जापान जैसे देशों में इस जीव की बहुत मांग है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक किलो समुद्री खीरे की कीमत लगभग 2.5 लाख भारतीय रुपये तक होती है। वैसे भारत में इस जीव का शिकार करना और इसे बेचना गैर कानूनी है। इस वजह से इसकी स्मगलिंग भी खूब होती है। सितबंर, 2021 में तमिलनाडु में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने कुछ तस्करों के पास से लगभग 2000 किलो तक समुद्री खीरा पकड़ा था। जिनकी बाजार में कीमत 8 करोड़ रुपये बताई गई थी।

क्या कहता है भारत का कानून

वैसे तो भारत में इसे पकड़ना गैरकानूनी है। लेकिन, उससे भी बड़ी बात ये है कि ये शिकारी जिन द्वीपों पर जाकर इनका शिकार करते हैं। वहां भारतीय कानून के हिसाब से आम लोगों का जाना मना है। दरअसल भारत सरकार ने अंडमान-निकोबार के आदिम जनजातियों के जीवन में किसी तरह का दखल न हो। इसके लिए अंडमान के 572 द्वीपों में से केवल 12 पर्यटकों के लिए खुले हैं। बाकी द्वीपों पर जाना गैर-कानूनी माना गया है।

साल 2017 में राज्यसभा में तत्कालीन गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने एक सवाल के जवाब में जानकारी दी थी कि अंडमान-निकोबार द्वीप समूह (आदिम जनजाति संरक्षण) विनियम, 1956 के तहत इन द्वीपों पर बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई। गृह मंत्रालय ने बताया था कि सेंटीनल लोगों को अपने द्वीप पर अपने ढंग से रहने और काम करने की पूरी छूट है। इसलिए 2018 में अमेरिकी पर्यटक या मछुआरों की हत्या के लिए सेंटीनल लोगों पर भारतीय कानून के तहत कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।

क्या है अंडमान-निकोबार की भौगोलिक स्थिति

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह भारत का संघ राज्‍यक्षेत्र है। यह संघ राज्‍यक्षेत्र अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के नाम से जाना जाता है। यह हिन्‍द महासागर में बंगाल की खाड़ी के दक्षिण भाग में इंडोनेशिया और थाईलैंड के निकट बसा हुआ है। इसमें दो द्वीपसमूह शामिल है एक अंडमान द्वीपसमूह और दूसरा निकोबार द्वीपसमूह, जो अंडमान सागर को हिन्‍द महासागर से पूर्व में अलग करता है। यह दोनों द्वीपसमूह 10 डिग्री उत्‍तर समानांतर चैनल से विभाजित है। अक्षांश के उत्‍तर में अण्‍डमान द्वीपसमूह है और दक्षिण में निकोबार द्वीपसमूह है।

इस संघ राज्‍य क्षेत्र की राजधानी अंडमान शहर का पोर्ट ब्‍लेयर है। इस संघ राज्‍यक्षेत्र में 836 द्वीप/ द्वीपखण्‍ड/ चट्टानें हैं, जिनमें से केवल 38 द्वीप ही स्‍थायी रूप से बसे हुए हैं। छोटे-छोटे निकोबार द्वीपसमूह में लगभग 22 मुख्‍य द्वीप हैं। जिनमें 10 द्वीपों में लोग बसे हुए हैं। अंडमान और निकोबार लगभग 150 किलोमीटर चौड़े एक चैनल (दस डिग्री चैनल) से विभाजित हैं।

2011 की जनसंख्या के अनुसार इस संघ राज्‍यक्षेत्र की संख्या 3,79,944 है। यहां की साक्षरता 86.27% है। इस संघ राज्‍यक्षेत्र का भूमि क्षेत्र कुल मिलाकर लगभग 8,249 वर्ग किलो मीटर है। अंडमान द्वीपसमूह का कुल क्षेत्रफल लगभग 6,408 किलोमीटर है और निकोबार द्वीपसमूह का कुल क्षेत्रफल लगभग 1,841 किलो मीटर है।

इस द्वीपसमूह की राजभाषा हिन्‍दी तथा अंग्रेजी है। साथ ही प्रमुख भाषा बंगाली है। यहां 26% आबादी बांगला बोलती है। जबकि हिन्‍दी (18.23%), तमिल (17.68%), तेलुगु (12.81%), मलयालम (8.11%) तथा निकोबारी (8.05%) बोलने वाले भी हैं। अन्‍य कम बोली जानेवाली भाषा कुरूख/उरांव, मुडा और खड़िया है।

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