Geranium: बहुत गुणकारी है गरीबों का गुलाब जिरेनियम, जानें इसकी खेती से कितनी होगी कमाई

Geranium: जिरेनियम मूल रूप से अफ्रीका का पौधा है, जिसका वैज्ञानिक नाम 'पिलारगोनियम ग्रेवियोलेन्स' है। इसके फूल का तेल बहुत ही गुणकारी होता है। इसके फूलों के अलावा पत्तियों व तने से भी तेल निकाला जाता है। इसे गरीबों का गुलाब भी कहा जाता है। इसके तेल का उपयोग दुनियाभर में जैविक दवाईयों, हर्बल उत्पादों तथा एरोमा-थेरेपी में किया जाता है। इसकी दुनिया भर में अल्जीरियन, बोरबन, इजिप्सियन और सिम-पवन प्रमुख प्रजातियां हैं।

जिरेनियम के तेल में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल, एंटी एंफ्लेमेटरी व एंटी माइक्रोबियल जैसे गुण होते हैं। इन गुणों के कारण ही जिरेनियम का तेल कई मानसिक/शारीरिक बीमारियों को दूर करने में लाभकारी माना जाता है।

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जिरेनियम की खेती

जिरेनियम की खेती अधिकतर सभी जलवायु परिस्थितियों में की जा सकती है, लेकिन अच्छी उत्पादन के लिए कम नमी वाली हल्की जलवायु व जीवांशयुक्त बलुई दोमट तथा शुष्क मिट्टी उत्तम मानी जाती है। मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 7.5 होना चाहिए। इसकी खेती मुख्यतः चीन, मोरक्को, मिस्र व दक्षिण अफ्रीका में होती है। जबकि भारत में जिरेनियम की खेती उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, बिहार व उत्तर-पूर्वी राज्यों में होती है। भारत में जिरेनियम की खेती के लिए इसके बीज नहीं होते, इसकी खेती प्रायः कलम से तैयार पौधों से होती है। भारत में इसकी अनुमानित खपत लगभग 150 टन है और उत्पादन मात्र 5 टन ही होता है। शेष खपत को पूरी करने के लिए बड़ी मात्रा में जिरेनियम तेल का आयात किया जाता है।

सुगंधित इत्र व साबुन बनाने में सर्वाधिक उपयोग

जिरेनियम का तेल सुगंधित होता है, जिसके कारण इसका अधितकर उपयोग परफ्यूम बनाने में होता है। इसके अलावा सौन्दर्य क्रीम/उत्पादन व सुंगधित साबुन बनाने में किया जाता है। जिसके चलते बाजार में इसकी मांग ज्यादा है। हालांकि, ज्यादा मांग व उत्पादन कम होने के कारण इसका मूल्य अधिक है।

मानसिक बीमारियों के उपचार में लाभदायक

जिरेनियम के तेल का प्रयोग विभिन्न प्रकार की दवाईयों को बनाने और अनेक बीमारियों के उपचार में अरोमाथेरेपी (तेलों से उपचार) के रूप में इसका प्रयोग होता है। अल्जाइमर (भूलने की बीमारी), तंत्रिका विकृति और कई अन्य विकारों की समस्या को दूर करने में जिरेनियम के तेल का प्रयोग किया जाता है।

चेहरे की सुन्दरता में सहायक है जिरेनियम का तेल

जिरेनियम के तेल से बनी दवाईयों का इस्तेमाल चेहरे के कील-मुंहासों, शरीर में सूजन और एक्जिमा (त्वचा रोग) जैसी स्थिति में भी लाभकारी बताया जाता है। इसका तेल बढ़ती उम्र के प्रभाव को भी कम करता है। इसके तेल की 2-3 बूंदें फेस लोशन/मॉइस्चराइजर में मिलाकर लगाने से चेहरे की झुर्रियां कम होती हैं। इसके साथ ही मांसपेशियों और त्वचा, बाल और दांतों को होने वाले नुकसान में भी इसका प्रयोग लाभकारी माना गया है।

मधुमेह रोग में लाभदायक

जिरेनियम का तेल मधुमेह रोगियों के लिए काफी लाभदायक हो सकता है। दरअसल, इसका प्रयोग पशुओं पर किया गया, जिसके अध्ययन में पाया गया कि जिरेनियम तेल के नियमित रूप से इस्तेमाल से चूहों में ग्लूकोज का स्तर काफी कम हो गया। अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि मधुमेह (डायबिटीज) से ग्रसित रोगियों के लिए जिरेनियम का तेल फायदेमंद हो सकता है। फिलहाल इस पर आगे और अध्ययन की आवश्यकता है। गर्भवती महिला व दिल के मरीजों को इसका इस्तेमाल चिकित्सक की सलाह से ही लेना चाहिए।

जिरेनियम खेती से मालामाल होते किसान

जिरेनियम की खेती से 3-4 महीनों में कमाई शुरू हो जाती है, क्योंकि इस दौरान इसकी पत्तियों की कटाई प्रारंभ हो जाती है। एक बार फसल तैयार होने पर यह 4-5 सालों तक पैदावार देती है। जिरेनियम की खेती में प्रति एकड़ लगभग ₹80 हजार का खर्च आता है। यह खर्च खेती के प्रारंभिक समय 3-4 महीनों का है। उसके बाद खर्च कम हो जाता है और कमाई बढ़ने लगती है। प्रतिवर्ष एक एकड़ से 10-12 लीटर तेल की पैदावार हो सकती है। बाजार में इसका भाव 15 से 20 हजार रूपये प्रति लीटर है। इस प्रकार प्रति वर्ष 1.5 से 2 लाख रूपये तक की कमाई हो जाती है।

खेती से कमाई के उदाहरण

महाराष्ट्र के जालना जिले में पाचोरा गांव के किसान राजेन्द्र चोर्डिया ने 5 एकड़ में जिरेनियम की खेती की। जिसमें उनकी करीब ₹3 लाख की लागत आयी और अब उन्हें 7-10 लाख रूपये सालाना की कमाई हो रही है।

गुजरात के बनासकांठा जिले के भोयन गांव के श्रीकांतभाई पांचाल किसान भी अपने 7 बीघा (लगभग 1.5 एकड़) में जिरेनियम की खेती कर रहे है। साथ ही साथ उन्होंने जिरेनियम का तेल निकालने हेतु एक प्लांट भी लगाया है। प्रारंभ में कुछ कठिनाईयों के बाद आज श्रीकांतभाई अच्छी कमाई कर रहे है।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में जयरामनगर के किसान लोकेष पाताड़े ने करीब 2 साल तक जिरेनियम खेती का अध्ययन करने के बाद उसकी खेती कर मोटी कमाई कर रहे हैं।

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