Ayodhya Temple: राम मंदिर के उद्घाटन पर क्या कह रहा है विदेशी मीडिया?
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और 22 जनवरी को उसका उद्घाटन भारत के लिए ही नहीं पूरे विश्व के लिए एक बड़ी घटना है। दुनिया के तमाम देश इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन रहे हैं। विदेशी मीडिया भी इसका विश्लेषण अपने अपने तरीके से कर रहा है। कुछ महत्त्वपूर्ण विदेशी मीडिया माध्यमों में राम मंदिर से जुड़े समाचार और आलेख पर नजर डालते हैं।
बीबीसी की विवादास्पद टिप्पणी
बीबीसी ने अपने एक लेख में बाबरी ढांचे को गिराए जाने वाली घटना को अपने एक लेख में ज्यादा महत्व दिया है। योगिता लिमये द्वारा लिखे एक लेख में कहा गया है कि 400 साल पुरानी 'मस्जिद' को गिराए जाने के 30 से अधिक वर्षों के बाद, एक नया मंदिर बनाया गया है। इस लेख में संतोष दुबे नाम के एक कार सेवक के कुछ कथन को प्रमुखता से छापा गया है। जो यह कहते हैं कि उन्हें इस बात का कोई अफसोस नहीं है कि उन्होंने 'मस्जिद' तोड़ने में मदद की।

बीबीसी के अनुसार दुबे कहते हैं कि यह धार्मिक कार्य था और मुझे इस कार्य को पूरा करने के लिए इस धरती पर भेजा गया था। इसमें कोई अपराध या पाप नहीं है। बीबीसी के लिए योगिता ने लिखा है कि 6 दिसंबर 1992 स्वतंत्र भारत के सबसे काले दिनों में से एक था। क्योंकि इसके बाद भड़की हिंसा में हजारों लोग मारे गए थे। बीबीसी ने भगवान राम के भव्य मंदिर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने पर भी कटाक्ष किया है और इसे धर्मनिरपेक्ष संविधान वाले देश में विवादास्पद करार दिया है।
बीबीसी ने अपनी तरफ से यह टिप्पणी की है कि "मुसलमानों के लिए, जो भारत के सबसे बड़े अल्पसंख्यक हैं, यह दिन भय और दर्दनाक यादें पैदा करेगा। कुछ लोग अपने बच्चों को शहर से बाहर भेज देंगे, इस डर से कि जब सड़कें देश भर के हिंदू भक्तों से भर जाएंगी तो तनाव फैल सकता है।"
बीबीसी ने यह भी कहा है कि मस्जिद गिराए जाने के बाद पूरे भारत में हुई हिंसा में लगभग 2,000 लोग मारे गए। अकेले आर्थिक राजधानी मुंबई में 900 से अधिक लोग मारे गए, उनमें से लगभग दो-तिहाई मुसलमान थे। इस ब्रिटिश मीडिया ने किसी मोहम्मद शाहिद के हवाले से कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जगह दिए जाने के बाद हिंदुओं को मंदिर बनाने का अधिकार है। लेकिन हमने उस फैसले को खुशी से स्वीकार नहीं किया, हम क्या कर सकते हैं।
पाकिस्तानी मीडिया ने राजनीति में मजहब के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया
पाकिस्तान के प्रमुख मीडिया संस्थान डॉन ने परवेज़ हूडभोय का एक लेख 20 जनवरी को प्रकाशित किया है, जिसमें लेखक ने कहा है कि "जहां कभी पांच सदी पुरानी बाबरी मस्जिद थी, वहां अब राम मंदिर खड़ा है। इसके आसपास वेटिकन जैसा एक नया शहर बस रहा है। हालाँकि मंदिर का निर्माण पूरा होने में अभी वर्षों लगेंगे, लेकिन प्राण प्रतिष्ठा समारोह पहले ही शुरू हो गए हैं।
"आरएसएस ने 50 मिलियन भोजन के पैकेट वितरित किए हैं। मोदी सरकार 100,000 साधुओं और भक्तों के लिए ट्रेन और हेलीकॉप्टर सेवाओं की व्यवस्था कर रही है, नए पांच सितारा होटलों के लिए अनुबंध दिए गए हैं, लेकिन मुसलमानों को बस और ट्रेन से अपनी यात्रा सीमित करने की सलाह दी गई है।"
डॉन ने मोदी की अपील को भी प्रकाशित किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि "पूरी दुनिया ऐतिहासिक क्षण का इंतजार कर रही है। मैं देश के 140 करोड़ लोगों से हाथ जोड़कर निवेदन कर रहा हूं कि 22 जनवरी को जब रामलला की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा हो तो अपने घर में राम ज्योति जलाएं और दीपावली मनाएं।"
डॉन में छपे लेख के अनुसार मोदी एक बार फिर संकेत देना चाहते हैं कि उनके नेतृत्व में एक नया भारत आ गया है, जिसका 1947 में जन्मे भारत से बहुत कम या कोई समानता नहीं है। अखबार ने यह भी कहा है कि "जिस तरह पाकिस्तान अपनी हिंदू आबादी को कम अधिकारों वाले हीन नागरिकों के रूप में मानता है, उसी तरह भारत में मुसलमानों को भी यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि वे उन आक्रमणकारियों की अवांछित संतान हैं जिन्होंने एक प्राचीन भूमि और उसकी महिमा को नष्ट कर दिया। मोदी के भारत में धार्मिक साम्प्रदायिकता अब घृणित नहीं मानी जाती।"
डॉन ने राजनीति में धर्म को मिलाने के लिए पाकिस्तान को भी पूरा दोषी माना है। पत्र लिखता है उन लोगों को आश्चर्य नहीं होगा जो पाकिस्तान का इतिहास जानते हैं। 1937 के चुनावों में अखिल भारतीय मुस्लिम लीग को करारी हार मिलने के तुरंत बाद, इसके नेतृत्व ने सफलतापूर्वक धर्म को हथियार बनाया और इसे राजनीति में शामिल कर लिया। 1980 के दशक में जनरल जियाउल हक द्वारा इसे दोहरी खुराक के साथ दोबारा इंजेक्ट किया गया था। आज, प्रत्येक पाकिस्तानी राजनीतिक दल के शस्त्रागार में, विरोधियों को ध्वस्त करने के लिए धर्म पसंदीदा हथियार है।
डॉन ने यह भी लिखा है कि भारत के हिंदू राष्ट्र बनने से पाकिस्तान में एक प्रकार की आत्मसंतुष्टि पैदा होती है, जो दो-राष्ट्र सिद्धांत की पुष्टि है कि हिंदू और मुस्लिम कभी भी एक साथ नहीं रह सकते। लेकिन फिर, आने वाले समय में भारत के मुसलमानों और पाकिस्तान में बचे कुछ हिंदुओं की हालत कैसी होगी? क्या भारत कभी भी अपने पहले, अधिक उदार और धर्मनिरपेक्ष स्वरूप में वापस आ सकता है, यह एक खुला प्रश्न है।
गल्फ न्यूज ने किया मोदी का गुणगान
गल्फ न्यूज लिखता है कि मोदी का वादा किया गया राम मंदिर भारत के चुनाव से पहले हिंदुओं के बीच खुलने और गूंजने के लिए तैयार है। अपनी रिपोर्ट में गल्फ न्यूज ने लिखा है - "हजारों भक्तों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए आसपास कई विशाल तम्बू शहर बनाए जा रहे हैं। इस समारोह को देखने के लिए दर्जनों निजी जेट से शीर्ष उद्योगपति, फिल्म सितारे और मशहूर लोग अयोध्या आएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश भर में, साथ ही दुनिया भर में कुछ भारतीय दूतावासों में लाइव स्क्रीनिंग की योजना बनाई है। मोदी कई हिंदू पुजारियों के साथ उस प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होंगे, जिसमें मंदिर के आंतरिक गर्भगृह में राम की एक मूर्ति रखी जानी है।"
गल्फ न्यूज आगे लिखता है कि "दशकों पुराना विवाद 2019 में समाप्त हो गया, जब एक विवादास्पद फैसले में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हिंदुओं को जगह दे दी और मुसलमानों को मस्जिद के लिए जमीन का एक अलग भूखंड दिया। वसंत में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से पहले भारत के सबसे विवादास्पद धार्मिक स्थलों में से एक मंदिर के उद्घाटन से मोदी को बड़ी गति मिलने की उम्मीद है क्योंकि वह हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं के आधार पर अपने शासन को रिकॉर्ड लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए बढ़ाना चाहते हैं।"












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