Apple Batterygate: क्या है ‘बैटरीगेट’? आईफोन यूजर्स को एप्पल क्यों दे रहा मुआवजा?
Apple Batterygate: एप्पल दुनिया के सबसे लोकप्रिय टेक्नोलॉजी ब्रांड में से एक है। कंपनी के आईफोन पूरी दुनिया में लोगों को पसंद आते हैं, लेकिन इन यूजर्स को हमेशा फोन की बैटरी को लेकर शिकायत रहती है। दुनिया के लाखों आईफोन यूजर्स अपने फोन की बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने की वजह से परेशान रहते हैं। कंपनी कभी भी अपने आईफोन के बैटरी की कैपेसिटी को रिवील नहीं करती है। हर साल नए आईफोन सीरीज के लॉन्च पर कंपनी केवल यह बताती है कि नई सीरीज में पिछली सीरीज के मुकाबले बैटरी कैपेसिटी को इंप्रूव किया गया है। लेकिन आईफोन यूजर्स की इसी दिक्कत की वजह से कंपनी को भारी जुर्माना चुकाना पड़ रहा है।
अमेरिकी कोर्ट ने कंपनी पर पुराने आईफोन मॉडल्स की बैटरी में आई दिक्कत की वजह से 500 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया था, जिसे अब कंपनी यूजर्स को मुआवजे के तौर पर दे रही है। दुनियाभर के करीब 3 मिलियन यानी 30 लाख यूजर्स को एप्पल लगभग 65 डॉलर यानी करीब 5,000 रुपये का मुआवजा देगी। एप्पल पर यह जुर्माना 2017 में दायर किए गए एक मुकदमे की वजह से लगा था, जिसका भुगतान कंपनी अब करने जा रही है।

क्या है मामला?
साल 2017 में कुछ आईफोन यूजर्स ने उनके फोन की बैटरी कैपेसिटी कम होने और जल्दी डिस्चार्ज होने की समस्या रिपोर्ट की थी। यूजर्स हजारों रुपये खर्च करके एप्पल के इन आईफोन को खरीदते हैं। नए-नए खरीदे हुए आईफोन की बैटरी डिस्चार्ज होने की वजह से यूजर्स काफी निराश हुए थे। आईफोन के कई मॉडल्स में यह दिक्कत हुई थी। इन मॉडल्स में आईफोन 6, आईफोन 6 प्लस, आईफोन 6 एस, आईफोन 6 एस प्लस, आईफोन 7, आईफोन 7 प्लस और आईफोन एसई (पहली जेनरेशन) शामिल हैं। ये सभी आईफोन 2017 से लेकर 2020 के दौरान लॉन्च हुए थे।
एप्पल यूजर्स को बैटरी कैपेसिटी कम होने वाली दिक्कत का पता फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम आईओएस वर्जन 10 (iOS 10) के अपडेट के बाद चला था। नये ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट करने के बाद फोन की बैटरी कैपेसिटी धीरे-धीरे कम होने लगी और फोन जल्दी से डिस्चार्ज होने लगे थे, जिसके बाद यूजर्स ने एप्पल पर यह मुकदमा दायर किया था। जांच में पाया गया कि अपडेट के बाद इन डिवाइसेज की बैटरी में करेंट की सप्लाई सही से नहीं हो पा रही थी, जिसकी वजह से डिवाइसेज लगातार शटडाउन हो रहे थे। कोर्ट ने माना कि एप्पल ने इन डिवाइसेज में आई दिक्कत के बावजूद इनकी बिक्री जारी रखी थी।
500 मिलियन डॉलर का जुर्माना
कोर्ट ने एप्पल को दोषी मानते हुए उसपर 500 मिलियन डॉलर तक का जुर्माना लगाया था और जुर्माने की राशि को उन आईफोन यूजर्स को मुआवजे के तौर पर देने के लिए कहा था। एप्पल ने अपनी छवि सुधारने के लिए इन यूजर्स के लिए फ्री बैटरी रिप्लेसमेंट प्रोग्राम भी ग्लोबल स्तर पर लॉन्च किया था, जिसमें कंपनी इन फोन की बैटरी को रिप्लेस कर रही थी। कोर्ट के आदेश के बाद एप्पल ने इन आईफोन यूजर्स को अक्टूबर 2020 तक मुआवजे की रकम वापस लेने के लिए अपने आप को रजिस्टर करने के लिए कहा था। दुनियाभर के करीब 3 मिलियन यानी 30 लाख यूजर्स ने मुआवजे के लिए खुद को रजिस्टर किया था, जिन्हें यह मुआवजा दिया जाएगा। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, यह किसी कम्प्यूटर डिवाइस में आई दिक्कत की वजह से यूजर्स को दिया जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा मुआवजा है।
क्या अब भी मिलेगा मुआवजा?
नहीं, अगर आप भी इनमें से कोई भी आईफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं और आप भी यह मुआवजा चाहते हैं, तो अब आपको यह मुआवजा नहीं मिलेगा। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, यह मुआवजा केवल उन एप्पल आईफोन यूजर्स को मिलेगा, जिन्होंने 31 अक्टूबर 2020 तक इसके लिए रजिस्टर कराया था। इसके बाद कंपनी ने नया सॉफ्टवेयर अपडेट जारी करके इन डिवाइसेज की दिक्कत को ठीक कर लिया था और बैटरी रिप्लेसमेंट प्रोग्राम के तहत कई डिवाइसेज की बैटरी भी बदली थी।
आईफोन 14 सीरीज में भी दिक्कत
कई आईफोन 14 सीरीज के यूजर्स ने भी फोन की बैटरी कैपेसिटी तेजी से कम होने की शिकायत की है। एप्पल ने यह सीरीज पिछले साल सितंबर में लॉन्च की थी। एप्पल के इस सीरीज की शुरुआती कीमत 70,000 रुपये के करीब है। महज एक साल के अंदर फोन की बैटरी कैपेसिटी कम होना यूजर्स के लिए सिरदर्द बन गया है, जिसे कई यूजर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर शेयर किया है। इन यूजर्स की बैटरी कैपेसिटी एक साल के अंदर केवल 86 प्रतिशत तक रह गई है। एप्पल अपने डिवाइसेज की बैटरी कैपेसिटी स्टेटस यानी बैटरी हेल्थ चेक करने का ऑप्शन देता है।
यूजर्स अपने फोन की सेटिंग्स में जाकर डिवाइस में मौजूद बैटरी की हेल्थ का पता लगा सकते हैं। बैटरी कैपेसिटी कम होने से फोन को बार-बार चार्ज में लगाना पड़ता है और यहां तक की बैटरी को रिप्लेस करना पड़ता है। आम तौर पर किसी नए आईफोन की बैटरी को 3 साल के बाद ही रिप्लेस करने की जरूरत होती है। हालांकि, एप्पल की तरफ से नए 'बैटरीगेट' मामले को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन आईफोन 6 और आईफोन 7 सीरीज की तरह ही यूजर्स के डिवाइसेज की बैटरी कैपेसिटी तेजी से कम हो रही है।
यूजर्स इन बातों का रखें ध्यान
हालांकि, फोन की बैटरी कैपेसिटी यूजर्स के इस्तेमाल करने के तौर-तरीके पर भी निर्भर करती है। कई बार यूजर्स अपने फोन को लंबे समय तक चार्ज में लगाकर छोड़ देते हैं, जिसकी वजह से बैटरी में पावर सप्लाई का ओवरफ्लो हो जाता है, जो बैटरी की हेल्थ पर असर डालता है। इसके अलावा फोन को चार्ज में लगातर इस्तेमाल करने से भी उसकी बैटरी खराब होने का डर बना रहता है। यही नहीं, बैटरी गर्म होने लगती है और उसमें ब्लास्ट भी हो सकता है। ऐसे में यूजर्स को भी अपने फोन को इस्तेमाल करने के दौरान ये सावधानियां बरतनी होती हैं।












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