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Micronation: क्या होते हैं माइक्रोनेशन? कैलासा की तरह दुनियाभर में हैं 67 ‘स्वयंभू घोषित राष्ट्र’

कैलासा की तरह दुनिया में कई ऐसे कथित 'देश' हैं जिनकी कोई मान्यता नहीं है। इन्हें माइक्रोनेशन के नाम से संबोधित किया जाता है।

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Micronation: नित्यानंद वह शख्स है जिस पर भारत में दुष्कर्म के साथ ही कई मामले दर्ज हैं। जबकि कैलासा उसका बसाया अपना कथित 'राष्ट्र' है। दरअसल ये दोनों चर्चा में इसलिए हैं क्योंकि नित्यानंद की एक प्रतिनिधि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की बैठक में शामिल हुई थी। जिसने अपना नाम विजयप्रिया नित्यानंद बताया।

विजयप्रिया ने दावा किया कि वह 'रिपब्लिक ऑफ कैलासा' से है। हिन्दू परंपराओं को पुनर्जीवित करने के कारण भारत उनके सर्वोच्च गुरु को उत्पीड़ित कर रहा है। विजयप्रिया ने संयुक्त राष्ट्र से पूछा कि कैलासा में नित्यानंद और बीस लाख हिंदू प्रवासी आबादी के उत्पीड़न को रोकने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या उपाय अपनाए जा सकते हैं। अब सवाल ये है कि जिस देश को दुनियाभर में कोई मान्यता ही नहीं हैं, उसकी प्रतिनिधि बनकर एक महिला कैसे संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच पर पहुंच गई?

यूएन ने पूरे मसले पर दी सफाई

इस पूरे मसले पर संयुक्त राष्ट्र का जवाब भी सामने आ चुका है। संयुक्त राष्ट्र 'कैलासा' को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता है और अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने कहा कि उस महिला द्वारा ये टिप्पणियां तब की गई जब एक कमेटी की मीटिंग को आम जनता के लिए खोल दिया गया था। इंडिया टुडे को एक आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि 'कैलासा' ने एक गैर सरकारी संगठन (NGO) के रूप में चर्चाओं में भाग लिया था। जेनेवा में मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त के कार्यालय ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के उन्मूलन पर समिति (CEDAW) की रिपोर्ट में कैलासा से संबंधित टिप्पणी को प्रकाशित नहीं किया जाएगा क्योंकि यह सामान्य चर्चा के विषय के लिए अप्रासंगिक है।

क्या है कैलासा का रहस्य?

रेप, अपहरण, गैरकानूनी रूप से बच्चों को कब्जे में लेने की धाराओं के तहत कई मामलों के आरोपी नित्यानंद ने साल 2019 में भारत से भागकर दक्षिणी अमेरिका के इक्वाडोर देश के समीप किसी टापू का एक टुकड़ा खरीदा और इसे अपना देश घोषित कर दिया, जिसका नाम रखा 'कैलासा'।

कैलासा की वेबसाइट के मुताबिक नित्यानंद इसे 'हिंदू राष्ट्र' बताता है और दावा करता है कि इस देश में दुनियाभर में सताए गए हिंदुओं को सुरक्षा दी जाती है। यहां संस्कृत, तमिल और अंग्रेजी भाषाएं चलती हैं। वहीं कैलासा का रिजर्व बैंक, खुद की करेंसी और अपना अलग संविधान होने का भी दावा है। ताज्जुब की बात ये है कि नित्यानंद 150 देशों में कैलासा के दूतावास होने का दावा करता है। जबकि दुनिया के किसी देश ने अब तक इसे मान्यता ही नहीं दी है। न ही किसी देश ने कैलासा से राजनायिक संबंध स्थापित किये हैं।

दर्जनों की संख्या में हैं 'स्वयंभू घोषित देश'

कैलासा की तरह ही स्वयंभू घोषित देशों की संख्या दुनियाभर में दर्जनों में हैं। 'बिजनेस इनसाइर' की रिपोर्ट के मुताबिक स्वयंभू घोषित देशों को माइक्रोनेशन कहा जाता है। माइक्रोनेशन ऐसे क्षेत्र हैं जो खुद को दूसरे किसी मुल्क से अलग स्वतंत्र होने का दावा करते हैं लेकिन संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों सहित दुनिया की बाकी देशों की सरकारों द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं होते हैं। वहीं इन माइक्रोनेशन का दुनिया के दूसरे किसी देशों के साथ न तो कोई राजनयिक संबंध होता है और न ही उन देशों के साथ कोई कारोबार होता है।

दुनियाभर में 67 माइक्रोनेशन मौजूद

वहीं इन स्वयंभू राष्ट्रों के जो स्वयंभू शासक होते हैं उनके पास वहां कानूनों और टैक्स को निर्धारित करने, अपनी भूमि में प्रवेश करने वालों को नियंत्रित करने, दोस्तों-परिवार को प्रतिष्ठित खिताब सौंपने की शक्ति प्राप्त होती है। गूगल के माइक्रोनेशंस वर्ल्ड मैप के अनुसार वर्तमान में 67 अलग-अलग माइक्रोनेशन हैं। हालांकि, इन्हें 'माइक्रोनेशन' के रूप में परिभाषित करने के लिए कोई सटीक मानदंड नहीं है। 'बिजनेस इनसाइर' के मुताबिक दुनिया भर के ये 12 सबसे अजीब स्व-घोषित, स्वतंत्र राष्ट्र हैं।

लिबरलैंड: यह क्रोएशिया और सर्बिया के बीच डेन्यूब नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है। दो देशों की लड़ाई में एक नो मैंस लैंड को जब्त कर इसे 13 अप्रैल 2015 को स्वतंत्र देश घोषित कर दिया गया। यहां की जनसंख्या 250,000 बताई गई है।

रिपब्लिका ग्लेशियर: साल 2014 में ग्रीनपीस के कार्यकर्ताओं द्वारा एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया गया। इस राष्ट्र की जनसंख्या तकरीबन 100,000 है।

उजुपिस गणराज्य: साल 1997 में April Fools Day के मौके पर इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने इसे एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया। यह लिथुआनिया के करीब है। इनकी जनसंख्या लगभग 7,000 है।

स्टेट इंपीरियल: साल 2011 में रूसी व्यवसायी एंटोन बाकोव ने इसकी स्थापना की थी। इस देश ने 17 अलग-अलग भूमि और द्वीपों पर अपना स्वामित्व घोषित किया है। इसकी जनसंख्या तकरीबन 4,000 है।

अंपायर ऑफ अटलांटिका: इसकी स्थापना 1981 में जॉर्ज ग्रुइकशैंक ने की थी। यह ऑस्ट्रेलिया के सिडनी से 220 मील पश्चिम में स्थित टापू पर है और इसकी आबादी 3000 के करीब है।

फ्रीटाउन क्रिश्चियानिया: साल 1971 में इस राष्ट्र की स्थापना की गई। यहां रहने वाले आजाद ख्याल जिंदगी पसंद करते हैं और किसी कानून को नहीं मानते। ये डेनमार्क के करीब है और इनकी जनसंख्या 850 के करीब है।

इसी तरह वेस्टर्कटिका (2001 में स्थापना और लगभग 391 जनसंख्या), प्रिसिंपैलिटी ऑफ सेबोर्गा (1960 में स्थापना और लगभग 320 जनसंख्या), मोलोसिया गणराज्य (1977 में स्थापना और लगभग 311 जनसंख्या), सीलैंड (1966 में स्थापना और लगभग 27 जनसंख्या), पोंटिन्हा की रियासत (2007 में स्थापना और मात्र 3 लोगों की जनसंख्या), एल्गलैंड-वर्गालैंड (1992 में स्थापना और जनसंख्या अभी शून्य)।

यह भी पढ़ें: यूनाइटेड नेशंस की बैठक में शामिल हुआ नित्यानंद का 'हिन्दू देश' कैलाशा, भारत पर लगाए इल्जाम

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