Heatwave: लू अथवा हीटवेव से मरने वालों की संख्या कितनी, जानें भारत और दुनिया का हाल
Heatwave: उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में हीटवेव यानि लू का कहर जारी है। लू के कारण हीट स्ट्रोक से मरने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। खबरों के मुताबिक बीते दो-तीन दिनों में तकरीबन 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
साल 2021 में देश के मौसम वैज्ञानिकों द्वारा एक रिसर्च पेपर प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया गया कि लू के कारण 1971-2019 यानि तकरीबन 50 सालों में मौसम की अलग-अलग घटनाओं में 141,308 लोगों की जान चली गयी थी। जबकि 17,362 लोगों की मौत सिर्फ लू की वजह से हुई थी।

इस रिसर्च के अनुसार देश में 1971 से 2019 तक तीव्र लू के 706 मामलें दर्ज किये गये थे। इस शोध पत्र को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. राजीवन ने इस साल की शुरुआत में वैज्ञानिकों कमलजीत रे, एस.एस. रे, आर.के. गिरी और एपी डिमरी के साथ लिखा था।
मौत के आंकड़ों में बड़ा हेरफेर?
आईएमडी (India Meteorological Department) द्वारा जारी आंकड़ों के आधार पर Envistats 2022 के अनुसार साल 1970 के बाद से हीटवेव के कारण भारत में कुल 17,488 मौतें हुई थी। जिसमें 1970-79 में 2,488 मौतें दर्ज की गयी। यह 1980-1989 में घटकर 1,505 हो गयी और तब से मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।
साल 2010-2019 के दौरान मौतों की संख्या बढ़कर 6,496 हो गयी थी, जो 1980-89 के दौरान हुई संख्या का लगभग 4.3 गुना अधिक थी। साल 2015 की लू के कारण 2,000 के करीब मौतें दर्ज की गयी थी, जिनमें से अधिकांश लोग आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से थे।
जबकि विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार 1992 से 2020 (28 सालों में) के बीच, भारत में लू के कारण 25,692 मौतें हो चुकी हैं। जिसमें से करीब एक तिहाई मौतें सिर्फ 2011 से 2021 के बीच दर्ज की गयी थी। दूसरी तरफ राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के आंकड़ों से पता चलता है कि 1992 और 2015 के बीच, पूरे भारत में लू के कारण कुल 24,223 मौतें दर्ज की गईं हैं।
देश के इन इलाकों पर लू का ज्यादा खतरा?
भारत के मौसम विज्ञान के मुताबिक भारत में सबसे ज्यादा लू चलने वालों क्षेत्रों में पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्य शामिल हैं।
मेडिकल जगत की प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पत्रिका लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार जलवायु परिवर्तन से भारत में सालाना 740,000 लोगों पर मौत का साया मंडरा रहा है।
क्या होती है लू या हीटवेव?
हीटवेव अत्यधिक गर्म मौसम की अवधि को कहते है। जब तापमान किसी क्षेत्र के औसत उच्च तापमान से अधिक हो जाता है तो उसे हीटवेव या लू कहते है। भारत मौसम विभाग के अनुसार, जब मैदानी इलाकों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक और पहाड़ी क्षेत्रों का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो हीटवेव चलने लगती है।
यानि उस क्षेत्र का जो औसत उच्च तापमान है उससे 6.4 डिग्री बढ़ जाये और तापमान लगभग 40 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए, तो इसे एक गंभीर हीटवेव कहा जाता है। वहीं तटीय क्षेत्रों में जब औसत उच्च तापमान से 4.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाये, यानि लगभग 37 डिग्री सेल्सियस तापमान हो जाए तो उसे हीटवेव कहा जायेगा।
हीटवेव को मोटे तौर पर एक जलवायु संबंधी घटना के रूप में देखा जा सकता है। इसमें आस-पास के पर्यावरणीय कारक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दरअसल, उच्च वायुमंडलीय दबाव प्रणाली के कारण वायुमंडल के ऊपरी स्तर पर रहने वाली हवा को नीचे लाकर घुमाती है। इससे हवा में संकुचन के कारण तापमान बढ़ता है और हवा वहां से निकल नहीं पाती। इससे हीटवेव पैदा होती है।
दुनियाभर में हीटवेव से कितनी मौतें
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण लोगों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। अत्यधिक तापमान बढ़ने के कारण विश्व स्तर पर भी इसका असर हो रहा है। साल 2000 से 2016 के बीच हीटवेव के संपर्क में आने वालों की संख्या लगभग 125 मिलियन हो गई थी। अकेले 2015 में किसी अन्य साल की तुलना में 17.5 करोड़ अधिक लोग हीटवेव की चपेट में आये थे।
इस हीटवेव के कारण साल 2010 में अकेले रूस में 44 दिनों की भीषण गर्मी के दौरान 56,000 मौतें हो गयी थी। जबकि metoffice.gov.uk के मुताबिक अगस्त 2003 में यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की लहर के कारण 20,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। यही नहीं, फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में भी गर्मी के कारण पूरे पश्चिमी यूरोप में 20,000 से अधिक मौतें हुईं।












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