सबसे कठिन परीक्षाओं में एक हैं UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा, जानें इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने इस साल की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षाओं की तैयारियां शुरू कर दी है। इसके सन्दर्भ में आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर लगातार अपडेट दी जा रही है।

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UPSC Exam History: संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा भारत में सबसे प्रतिष्ठित और मुश्किल परीक्षाओं में से एक है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और कई अन्य सिविल सेवाओं में करियर बनाने की उम्मीद में लाखों उम्मीदवार सिविल सर्विसेज परीक्षा देते हैं। यह परीक्षा अपनी कठोर चयन प्रक्रिया के लिए जानी जाती है, जिसमें परीक्षण, इंटरव्यू और मूल्यांकन के कई दौर शामिल होते हैं।

सिविल सर्विसेज की परीक्षा में भारतीय इतिहास, राजनीति, भूगोल, अर्थशास्त्र और करंट अफेयर्स सहित कई विषयों को शामिल किया गया है। यूपीएससी की यह परीक्षा इतनी मुश्किल इसलिए होती है क्योंकि भारत एक बड़ा लोकतांत्रिक देश है और इसे चलाने के लिए भी ऐसे लोग चाहिए जो बहुत ही समझदार हों और कठिन-से-कठिन परिस्थिति में हार न माने। आइए जानते हैं यूपीएससी से संबंधित कुछ तथ्य।

शुरुआत कैसे हुई?

भारत में लोक सेवा आयोग (पब्लिक सर्विस कमीशन) की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। इसका गठन भारत सरकार अधिनियम, 1919 और 1924 में 'ली आयोग' द्वारा की गई सिफारिशों के तहत हुआ था। इसके बाद, लोक सेवा आयोग को भारत सरकार अधिनियम, 1935 द्वारा संघीय लोक सेवा आयोग (फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन) के रूप में पुनर्गठित किया गया था। स्वतंत्रता के बाद, इसको संघ लोक सेवा आयोग (यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन) का नाम दिया।

पहले अध्यक्ष कौन रहे?

रॉस बार्कर यूपीएससी के पहले अध्यक्ष थे। वह अक्टूबर 1926 से अगस्त 1932 तक इस पद पर रहे। आजादी के बाद एच.के. कृपलानी यूपीएससी के पहले अध्यक्ष बने। उन्होंने यूपीएससी में अपनी सेवायें एक अप्रैल 1947 से 13 जनवरी 1949 के बीच दी। यूपीएससी के अध्यक्ष और उसके सदस्य छह साल या फिर 65 वर्ष की आयु तक पहुंचने तक सेवा करते हैं। अप्रैल 2022 से डॉ. मनोज सोनी यूपीएससी के वर्तमान अध्यक्ष है। 2023 तक 33 यूपीएससी अध्यक्ष भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए गए हैं।

सफलता का प्रतिशत कितना?

यूपीएससी में सफलता की दर बहुत कम है। सिविल्स डेली के मुताबिक लगभग 0.2 प्रतिशत अभियार्थी ही सफल होते हैं। इसका मतलब है कि प्रत्येक 500 उम्मीदवारों में से केवल एक उम्मीदवार सिविल सेवा के लिए चुना जाता है। UPSC CSE (Civil Services Examination) परीक्षा को भारत में सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है, और हर साल लाखों उम्मीदवार प्रीलिम्स परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन लगभग तीन हजार परीक्षार्थी ही अंतिम चरण तक पहुंचते हैं, जो इंटरव्यू राउंड होता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, हर साल लगभग 9 से 10 लाख प्रतियोगी सीएसई के लिए आवेदन करते हैं। 2022 में 11.52 लाख उम्मीदवारों ने यूपीएससी सीएसई परीक्षा के लिए आवेदन किया था। परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले 11.52 लाख उम्मीदवारों में से केवल 13,090 ने प्रीलिम्स परीक्षा पास की। 6 दिसंबर, 2022 को जारी यूपीएससी सीएसई के परिणाम के अनुसार मेन्स परीक्षा पास करके इंटरव्यू तक पहुंचने वाले छात्रों की संख्या केवल 2,529 थी।

महिलाओं और पुरुषों में सफलता का प्रतिशत

यूपीएससी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सीएसई में आमतौर पर पुरुष उम्मीदवारों का दबदबा होता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में महिला आवेदकों की संख्या बढ़ी है। 2001 में कुल 47,392 महिला उम्मीदवारों ने सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन किया था। यह संख्या 2019 में बढ़कर 3,67,085 महिला आवेदकों तक पहुंच गई। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में महिला आवेदकों की सफलता दर घटी है। बाईजूस के मुताबिक भारत में प्रत्येक 20 पुरुष आईएएस अधिकारियों पर केवल 1 महिला आईएएस अधिकारी है।

दुनिया में रैंकिंग

यूपीएससी की सीएसई को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। एरुडेरा, ने यूपीएससी सीएसई को दुनिया की तीसरी सबसे कठिन परीक्षा बताया है। आईआईटी-जेईई परीक्षा को भारत में सबसे कठिन परीक्षा और दुनिया में दूसरी सबसे कठिन परीक्षा के रूप में स्थान दिया गया है। एरूडेरा के अनुसार, यूपीएससी सीएसई परीक्षा के लिए औसत तैयारी का समय कम-से-कम एक वर्ष है।

आयु सम्बन्धी तथ्य

यूपीएससी परीक्षा पास करने की औसत आयु 26 से 28 वर्ष के बीच है। एक अध्ययन के अनुसार, यूपीएससी द्वारा चुने गए उम्मीदवारों की औसत आयु लगभग 26.9 वर्ष होती है। कई उम्मीदवार अपने पहले प्रयास में और कम उम्र में ही परीक्षा पास कर लेते हैं। 2019 की मुख्य परीक्षा पास करने वाले ज्यादातर पुरुष उम्मीदवार 26-28 वर्ष आयु वर्ग के थे। हालांकि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सामान्य वर्ग के उम्मीदवार 32 वर्ष, ओबीसी उम्मीदवार 35 वर्ष और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार 37 वर्ष की आयु तक ही आवेदन कर सकते है।

कुल कितनी सेवायें शामिल

सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) भारत सरकार की उच्च सिविल सेवाओं में भर्ती के लिए यूपीएससी द्वारा आयोजित की जाती है। सालाना आयोजित की जाने वाली सीएसई के अंतर्गत लगभग 24 सेवाएं आती हैं। इन सेवाओं में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस), भारतीय वन सेवा (आईएफएस) और भारतीय सूचना सेवा (आईआईएस) शामिल हैं।

कोंचिंग सेंटरों की कमाई

साल 2015 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा गठित एक कमेटी ने कोचिंग उद्योग का वार्षिक कारोबार 24,000 करोड़ रुपये आंका था। यूपीएससी परीक्षाओं का कोचिंग उद्योग मुख्य रूप से दिल्ली में केंद्रित है। दिल्ली के ऐसे कई इलाके हैं जो यूपीएससी की कोचिंग के लिए बहुत लोकप्रिय है जैसे ओल्ड राजेंद्र नगर, करोल बाग और मुखर्जी नगर।

पूर्व राष्ट्रपति भी पास कर चुके हैं परीक्षा

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद भी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) की परीक्षा दे चुके है। उन्होंने तीन बार के प्रयासों के बाद इस परीक्षा को पास किया था। अपने तीसरे प्रयास में उन्हें एलायड सर्विस की नौकरी मिली जिसके चलते उन्होंने इस सेवा को ठुकरा दिया और वकालत करने लगे। बाद में वह राज्यसभा के सदस्य बने और फिर बिहार के गवर्नर के तौर पर नियुक्त हुए। इसके बाद उन्हें देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में चुना गया।

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