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दिल को छूृ लेगी ट्रेन में मिले अजनबियों की ये कहानी

सोशल मीडिया पर एक कहानी आजकल काफी वायरल हो रही है। ये कहानी कोई लव स्टोरी नहीं है लेकिन इसकी मिठास उससे भी कहीं ज्यादा है।

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर एक कहानी आजकल काफी वायरल हो रही है। ये कहानी कोई लव स्टोरी नहीं है लेकिन इसकी मिठास उससे भी कहीं ज्यादा है। ये एक ही कोच में बैठे दो अजनबियों की कहानी है। ये उस लड़के की कहानी है जिसका दिल एक अंजान लड़की के लिए धड़कने लगा। उसकी परेशानियां उसे विचलित करने लगीं। उस लड़की के माथे पर शिकन उसे बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी और फिर उसने ठान लिया कि वो अब उसकी मदद कर के रहेगा। ये कहानी आपका दिल को छू जाएगी...

Story

जब कोच में आ चढ़ी वो लड़की

जब कोच में आ चढ़ी वो लड़की

वो ट्रेन में सफर कर रहा था। दिल्ली जाना था उसे। स्लीपर के कोच में अपनी सीट पर आराम परमा रहा था कि तभी कोच में एक लड़की ने कदम रखा। सकुचाई सी वो लड़की आकर बाथरुम के पास एक सीट पर कोने में बैठ गई। वो घबराई सी लग रही थी। लड़का उसके हाव-भाव पढ़ने की कोशिश कर रहा था। लड़की की आंखों में न जाने किस बात का डर था। वो बार-बार इधर-उधर देख रही थी। किसी से बच रही थी शायद।

उसके रोने से पसीज गया लड़के का दिल

उसके रोने से पसीज गया लड़के का दिल

ट्रेन चल पड़ी लेकिन उसकी घबराहट कम न हुई। थोड़ी देर में जब टीटी आया तब तो जैसे लगा कि वो रो ही पड़ेगी। टीटी ने उससे पूछा कि वो कहां तक जाएगी और उसके पास टिकट है या नहीं। उसने कहा कि उसे दिल्ली तक जाना है लेकिन टिकट जनरल का है। कोच में किसी कारणवश चढ़ नहीं पाई तो यहां आकर बैठ गई। टीटी ने उससे पेनल्टी मांगी मगर उसके पास पैसे न थे। उसने टीटी को बोला कि उसके पास केवल 100 रुपये हैं इसलिए वो अगले स्टेशन पर ही जनरल में चढ़ जाएगी। उसने टीटी को बताया कि इमरजेंसी आने के कारण वो ऐसे ही घर से निकल आई है।

लड़की परेशान, लड़का बेचैन

लड़की परेशान, लड़का बेचैन

उसकी मासूम आंखों से आंसू बहे जा रहे थे। टीटी ने उसे 100 रुपये की पेनल्टी पर ही स्लीपर में यात्रा करने दी। लड़की ने उसका शुक्रिया अदा किया और चुपचाप अपनी सीट पर बैठ गई। उसके चेहरे पर अभी तक घबराट थी। लड़के को देखकर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था। उसने सोचा कि शायद बेचारी पर बिल्कुल भी पैसे नहीं बचे हैं। तभी लड़की ने किसी को फोन मिलाया और कहा कि दिल्ली स्टेशन पर किसी तरह पैसे भिजवा दे वरना उसे घर पहुंचने में देरी हो जाएगी।

जब चायवाले ने की यूं मदद

जब चायवाले ने की यूं मदद

लड़के के मन में उथल-पुथल हो रही थी। क्यों एक अंजान शख्स की परेशानी उसे इतना परेशान कर रही थी। उसने उससे ध्यान भटकाने की भी कोशिश की लेकिन नजरें उसके चेहरे पर आकर टिक जाती थीं। बस अब बहुत हो गया। अब लड़के ने ठान ली कि उसकी मदद कर के रहेगा। लड़के ने एक पेपर उठाया और 500 रुपयों के साथ चिट्ठी लिखी। उसने दोनों एक चायवाले तो दिया और कहा कि उस लड़की को दे आए। साथ चायवाले को हिदायत भी दी कि लड़की को ये न बताए कि नोट किसने भिजवाया है।

आखिर में कह डाली दिल की बात

आखिर में कह डाली दिल की बात

लड़की चायवाले से नोट लेती वक्त थोड़ी परेशान लग रही थी। शायद सोच रही होगी कि इतनी रात को कौन यूं परेशान कर रहा है। उसने चिट्ठी खोली जिसपर लिखा था, 'तुन्हें काफी देर से परेशान देख रहा हूं। मालूम है कि किसी लड़के का यूं रात में एक अजनबी लड़की को नोट भेजना अजब और गलत होगा, लेकिन चाहकर भी तुम्हें यूं परेशान नहीं देख पा रहा हूं। तुम्हें बात करते सुना तो पता लगा कि तुन्हारे पास घर पहुंचने के भी पैसे नहीं हैं इसलिए 500 रुपये चिट्ठी के साथ रख रहा हूं। तुम इसे एहसान के तौर पर मत देखना, ये बस इंसानियत के तौर पर मदद है। नीचे अपना पता भी लिखा है, जब लौटाना चाहो लौटा सकती हो। सच बताऊं तो नहीं चाहता कि तुम पैसे लौटाओ।'

सुबह ऐसे मिला सरप्राइज

सुबह ऐसे मिला सरप्राइज

लड़की ने फौरन इधर-उधर देखा, पर उसे कुछ समझ ही नहीं आया। लड़का भी फट से मुंह पर चादर डाल कर लेट गया। लड़की के चेहरे पर मुस्कान थी, राहत की मुस्कान। रात बीत गई। सुबह जब लड़का उठा तो उसकी नजरों ने सबसे पहले लड़की को खोजा, लेकिन वो जा चुकी थी। हां जिस सीट पर वो बैठी थी वहां एक कागज की पर्ची पड़ी थी। लड़का फौरन उठा और पर्ची को पढ़ने लगा। पर्ची में लड़की ने लिखा था, 'शुक्रिया, आपका ये अहसान जिंदगी भर नहीं भूल सकती। आज मेरी जिंदगी का सबसे दुखद दिन है। मेरी मां ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया और इसी कारण मैं जल्दबाजी में निकल आई। आपकी मदद के कारण मैं अपनी मां को देख पाउंगी। शुक्रिया। आपके पैसे जल्द ही लौटाने की कोशिश करूंगी।'

करना पड़ा लंबा इंतजार

करना पड़ा लंबा इंतजार

लड़के के चहरे पर मुस्कान आ गई। अब वो बस इसी इंतजार में दिन काटने लगा। रोजाना पोस्टमैन से पूछता कि कोई खत आया है क्या और न में जवाब सुनकर निराश भी होता। ये इंतजार लंबा ही होता जा रहा था। फिर एक दिन उसे एक खत मिला, जिसमें लिखा था, 'आपके दिए पैसे लौटाने हैं लेकिन चिट्ठी के साथ नहीं। आपसे मिलना है। मिलने का पता लिख रही हूं... तुम्हारी अजनबी हमसफर।'

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