भारत की बुलेट ट्रेन के बारे में Shocking Facts
बेंगलुरु। हाई स्पीड रेलवे सिस्टम को स्थापित करने के लिये जापान के साथ भारत सरकार ने एमओयू साइन किया है। हर भारतीय को अब उस दिन का इंतजार है जब बुलेट ट्रेन पहली बार मुंबई से अहमदाबाद के लिये रवाना होगी। वह तिथि इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में लिखी जायेगी। खैर अगर आपने अभी से उस तेज रफ्तार से चलने वाले भारत के सपने बुनने शुरू कर दिये हैं तो हम कुछ तथ्य आपको बतायेंगे जो वाकई में आपके लिये यानी चौंकाने वाले होंगे।
* बुलेट ट्रेन के लिये जापान जो पैकेज भारत को दिया है, वह 0.1 प्रतिशत की ब्याज दर से अगले 50 वर्षों के लिये दिया गया है। यानि अगले 50 साल तक भारत जापान के कर्ज तले दबा रहेगा।
पढ़ें- बुलेट ट्रेन बनाने के अलावा रेलवे में क्या करेगा जापान
* दुनिया का पहला हाई हाई स्पीड रेल सिस्टम 1964 में जापान ने बनाया। दूसरा फ्रांस ने 1981 में, इटली ने 1989 में, जर्मनी ने 1991 में, स्पेन ने 1992 में बेल्जियम ने 1997 में भारत को 68 साल लग गये सोचने में।
* 2010 में आया था प्रस्ताव- फ्रांस की SYSTRA और इंटली की ITALFERR ने पुणे-मुंबई-अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन का प्रस्ताव रखा था, लेकिन मनमोहन सरकार ने कोई रिस्पॉन्स नहीं दिया था।
* जापान जो पैसा भारत को देगा, हम उसे केवल हाईस्पीड रेल पर ही खर्च कर सकते हैं। न कि गरीबी मिटाने जैसे किसी भी अभियान पर।
और भी हैं शॉकिंग तथ्य पढ़ें स्लाइडर में-

बुलेट ट्रेन बनाम मेट्रो रेल
बुलेट ट्रेन बनाने में प्रति किलोमीटर 140 करोड़ रुपए लागत आयेगी। जबकि विजयवाड़ा में मेट्रो पर 288 करोड़, दिल्ली मेट्रो पर 175 करोड़ रुपए प्रति किलोमीटर की लागत है।

अनुमानित किराया
एक आईआईटियन मुख्यमंत्री ने अनुमान लगाया है कि बुलेट ट्रेन का किराया 75 हजार रुपए होगा।

वास्तविक किराया
जापान की रिपोर्ट के मुताबिक किराया साधारण ट्रेन के एसी-1 के किराये के लगभग बराबर होगा।

1.3 करोड़ लोग सफर करेंगे
भारत की बुलेट ट्रेन में 2023 तक सालाना 1.3 करोड़ लोग सफर कर रहे होंगे।

2053 तक बुलेट ट्रेन
2053 तक भारत की बुलेट ट्रेन में सालाना 6.8 करोड़ लोग सफर करेंगे।

4000 लोगों को विशेष ट्रेनिंग
करीब 4000 अधिकारियों को जापान की एजेंसी विशेष ट्रेनिंग देगी।

जापान बैंक पहले भी दे चुका है पैसा
1997 में दिल्ली मेट्रो के फेज़ 1 पर जितना पैसा खर्च हुआ था उसका 6 प्रतिशत जापान बैंक ने दिया।

नो केजुअल्टी टेक्नोलॉजी
जिस टेक्नोलॉजी का प्रयोग भारतीय बुलेट ट्रेन में किया जायेगा, वह दुनिया की नंबर-1 टेक्नोलॉजी है, जिसमें आज तक एक भी मौत नहीं हुई है।












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