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Ashok Singhal: जब राम मंदिर के लिए भाजपा सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठे अशोक सिंहल

Ashok Singhal: आज विश्व राम मंदिर का साक्षात स्वरूप देख रहा है और भारत के सांस्कृतिक पुरुष भगवान राम के गुणगान कर रहा है। भारतीय जनता पार्टी के सर्वोच्च नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पुनीत अवसर पर देश के सामने एक भक्त के रूप में उपस्थित हैं।

पर कभी ऐसा भी अवसर आया था जब विश्व हिंदू परिषद के संस्थापकों में सबसे प्रमुख सदस्य अशोक सिंघल अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के खिलाफ ही आमरण अनशन पर बैठ गए थे।

ram mandir When Ashok Singhal sat on fast against BJP government for Ram temple

उसी वाजपेयी ने संसद में दहाड़ते हुए कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक होगा।

मार्च 2002 में अनशन पर बैठे थे सिंघल

दरअसल अशोक सिंघल चाहते थे कि केंद्र सरकार अयोध्या में हो रहे यज्ञ की सुरक्षित पूर्णाहुति और कारसेवकों की सुरक्षा की गारंटी प्रदान करे। साथ ही उनकी सुरक्षित वापसी भी सुनिश्चित करे। इस मांग के समर्थन में सिंघल ने मार्च 2002 में अयोध्या के कारसेवकपुरम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। तब उस समय उत्तरप्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ था। अशोक सिंघल ने अनशन किया और जब उनका स्वास्थ्य खराब होने लगा तो प्रधानमंत्री वाजपेयी को उनके स्वास्थ्य की चिंता होने लगी। तब उन्होंने सदन में कहा था कि यदि आवश्यक हुआ, तो विहिप नेता के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए कदम उठाया जाएगा।

वाजपेयी ने यह भी कहा कि सिंहल जी की मांग के अनुसार अयोध्या की स्थिति सामान्य और शांतिपूर्ण हो गई है और जनजीवन पटरी पर लौट आया है और अब उसके लिए श्री सिंघल के अनशन पर जाने का कोई कारण नहीं है। यही नहीं, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के आदेश पर सिंघल की अनशन जबरन तुड़वाई गई थी। तब अटल जी ने उस समय सदन में यह कहा था कि हमें उनके स्वास्थ्य की चिंता थी। डॉक्टरों की सलाह पर हमने फोर्स फीडिंग करने का आदेश दिया।

सिंघल का प्रयास आज हुआ फलीभूत

अशोक सिंघल राम मंदिर के लिए विहिप द्वारा चलाए गए आंदोलन की धुरी थे। उनका घर राम जन्मभूमि आंदोलन का केंद्र रहा। जब उत्तरप्रदेश की पुलिस राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोगों को ढूंढ-ढूंढ कर गिरफ्तार कर रही थी, तब सिंहल हर बार चकमा देकर अयोध्या पहुँच जाते थे।

अशोक सिंघल के जोशीले भाषण और उनका राम के प्रति समर्पण जन्मभूमि आंदोलन को तेज करने के कारक बनें। साल 1989 के बाद से अपने जीवन के अंतिम क्षण तक सिंहल सिर्फ हिंदू हित और राम की ही बात रहे। उनका नारा "जो हिंदू हित की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा" ने जनता के एक बड़े वर्ग को बहुत प्रभावित किया। आज बीजेपी की सफलता कहीं न कहीं उन्हीं के नारे को चरितार्थ कर रही है।

संतों को एक मंच पर ले आए सिंघल

अशोक सिंघल ने वीएचपी के जरिए पूरे संत समाज को एकत्रित किया। उन्होने ही संतों को जाग्रत कर राजनीतिक पुरुषों को उनकी बात सुनने के लिए मजबूर किया। संतों ने जब यह आवाज उठाई कि हिंदुओं को उनके ही राम मंदिर में पूजा नहीं करने दिया जाता है। और इसके लिए हिन्दू समाज को एकजुट होकर सरकार पर दबाव डालना चाहिए, तो यह बात हिंदू जनमानस तक फैल गई और कई राज्यों में बीजेपी की सरकार भी बनी। क्योंकि भाजपा के नेता हिंदू जनता के पास वोट मांगने गए और राममंदिर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जतायी।

जन्म स्थल पर राम मंदिर से कम कुछ नहीं

केंद्र में सत्तारूढ़ कई सरकारों ने अपनी अपनी तरह से राम मंदिर का विवाद हाल करने की कोशिश की। किसी ने राम मंदिर कहीं और बना लेने का प्रस्ताव दिया तो किसी ने अगले 20 साल के लिए इस विवाद को भुला देने की सलाह दी। किसी ने राष्ट्रीय संग्रहालय बनाने का सुझाव दिया तो किसी ने मिल बैठ कर समाधान निकालने की बात की।

अशोक सिंघल ने चौथी धर्म संसद में लाखों लोगों की उपस्थिति में कहा - इस देश में जन्म स्थल पर ही राम मंदिर का निर्माण कराना उनका एकमात्र लक्ष्य है। राम जन्मभूमि पर ही राम का मंदिर बने। सिंहल ने कहा, "आप अपनी मस्जिदें बना सकते हैं, लेकिन अगर आप कहते हैं कि आप उन्हें वहां बनाना चाहते हैं जहां राम का जन्म हुआ था, जहां कृष्ण का जन्म हुआ था, जहां शंकर पैदा हुए थे, तो आपको पता होना चाहिए, इस देश में, हम वहां मस्जिद नहीं बना सकते। मंदिर ही बनेगा।" अशोक सिंहल अपने सामने तो मंदिर बनते नहीं देख पाए, लेकिन केंद्र में मोदी को प्रधानमंत्री बनते देखने के बाद उनको यह यकीन हो गया था कि मंदिर निर्माण और उद्घाटन का श्रेय उन्हें जरूर मिलेगा।

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