Raja Ravi Varma: हिंदू देवी देवताओं की तस्वीरों को लोकप्रिय किया था राजा रवि वर्मा की चित्रकारी ने
"केसर-ए-हिंद" से सम्मानित राजा रवि वर्मा एक प्रमुख भारतीय चित्रकार थे। उनका जन्म 29 अप्रैल 1848 को केरल के एक छोटे से शहर किलिमानूर में हुआ।

Raja Ravi Varma: रवि वर्मा ने पांच वर्ष की छोटी सी आयु में ही उन्होंने अपने घर की दीवारों को दैनिक जीवन की घटनाओं से चित्रित करना प्रारम्भ कर दिया था। उनके चित्रों की सबसे बड़ी विशेषता हिंदू महाकाव्यों और धर्म ग्रन्थों पर बनाए गए चित्र रहे। वडोदरा स्थित लक्ष्मी विलास महल के संग्रहालय में उनके चित्रों का बहुत बड़ा संग्रह आज भी मौजूद है।
रवि वर्मा का जन्म मातृसत्तात्मक परिवार में हुआ था। उनकी मां के परिवार ने वंश और उत्तराधिकार की मातृवंशीय व्यवस्था का पालन किया था। जब रवि वर्मा छोटे थे, तब उनके चाचा ने उनकी चित्रकारिता की अद्भुत प्रतिभा को पहचाना और उन्हें तत्कालीन शासक राजा अय्यिलम थिरुनल के पास ले गए। राजा अय्यिलम थिरुनल ने ही रवि वर्मा को चित्रकला की शिक्षा प्राप्त करने में मदद की।
न्यूड पेंटिंग बनाने पर हुआ विवाद
न्यूड पेंटिंग के बारे में बात करते ही हमें एमएफ हुसैन याद आ जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रवि वर्मा भी न्यूड पेंटिंग्स के कारण विवादों में रह चुके थे। दरअसल, उनके कलेक्शन में ऐसी पेंटिंग्स की बड़ी गिनती है जिनमें सफेद कपड़ों में भीगी हुई किसी महिला को चित्रित किया गया था। रवि वर्मा के ईस्ट और वेस्ट को मिलाने के प्रयोग की उस जमाने में कई कला समीक्षकों ने जमकर आलोचना की थी। एक बार रविंद्रनाथ टैगोर ने कहा था कि "रवि के चित्रों में महिलाओं के शरीर का अनुपात सही नहीं होता।"
रवि वर्मा ने उर्वशी और मेनका जैसी अप्सराओं से जुड़ी पौराणिक कहानियों को न्यूड पेंट किया जिसका उस जमाने में काफी विरोध हुआ। इसके अलावा रवि वर्मा के परिवार की वारिस रुक्मिनी वर्मा भी पेंटिग में सक्रिय है। सेमीन्यूड पेंटिग बनाने के कारण उनकी तस्वीरों पर भी विवाद हो चुके हैं। हालांकि, वह प्राइवेट कलेक्टर्स के लिए ही पेंटिंग बनाती है।
एक पेंटिंग बनाने के लेते थे 1800 रुपये
सन 2007 में राजा रवि वर्मा द्वारा बनाई गई एक कलाकृति $1.24 मिलियन में बिकी थी। इस पेंटिंग में त्रावणकोर के महाराजा और उनके भाई को मद्रास के गवर्नर जनरल रिचर्ड टेम्पल ग्रेनविले को स्वागत करते हुए दिखाया गया है। ग्रेनविले 1880 में आधिकारिक यात्रा पर त्रावणकोर आये थे। इसके साथ ही राजा रवि वर्मा पर फिल्में भी बन चुकी है। फिल्म रंगरसिया में अभिनेता रणदीप हुड्डा ने राजा रवि वर्मा की भूमिका निभाई थी।
साथ ही मलयालम फिल्म 'मकरामंजू' में भी राजा रवि वर्मा का जीवन दिखाया गया है। आपको बता दें कि मराठी बोर्ड की मराठी पुस्तक में एक अध्याय है 'अपूर्व भेंट' जिसमें राजा रवि वर्मा और स्वामी विवेकानंद की मुलाकात को दर्शाया गया है। कहा जाता है कि राजा रवि वर्मा उस जमाने में राजाओं की पेंटिंग बनाने के बदले 1800 रुपये की फीस लेते थे जो उस समय बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी।
हिंदू देवी- देवताओं को दिया एक रूप
राजा रवि वर्मा ऐसे पहले चित्रकार थे जिन्होंने हिंदू देवी-देवताओं को कैनवास पर उकेरा। आज हम फोटो, पोस्टर और कैलेंडर में देवी सरस्वती सहित देवी लक्ष्मी, मां दुर्गा, और भगवान कृष्ण की जो भी तस्वीरें देखते हैं वे ज्यादातर राजा रवि वर्मा की देन हैं।
ऐसा बताया जाता है कि इन देवी-देवताओं को समझने के लिए उन्होंने न सिर्फ भारत के कई प्राचीन मंदिरों की यात्रा की थी बल्कि धार्मिक साहित्य का गहन अध्ययन भी किया था। राजा रवि वर्मा ने कई पौराणिक कथाओं और उनके पात्रों के जीवन को अपने कैनवास पर उतारा था। राजा रवि वर्मा ने ऋषि विश्वकर्मा को बच्चे का तिरस्कार करते हुए भी एक पेंटिंग में दिखाया। ये पेंटिग्स बनाने की कल्पना पुराणों और महाकाव्यों में दिखाए गए चरित्रों से आई थी। राजा रवि वर्मा ने जिन भी देवी-देवताओं के पोट्रेट बनाए, वे सभी ऑयल कलर में बनाए थे।
ऐसे मिली थी राजा की उपाधि
1904 में ब्रिटिश सम्राट की ओर से वायसराय कर्जन ने रवि वर्मा को 'केसर-ए-हिंद गोल्ड मेडल' से नवाजा था। इस पुरस्कार के लिए प्रशस्ति पत्र में उनके नाम के आगे पहली बार 'राजा' की उपाधि का उल्लेख किया गया। उस समय राजा रवि वर्मा और उनके चित्रों की लोकप्रियता इतनी बढ़ चुकी थी कि उनके जन्मस्थान किलिमानूर जैसे छोटे से शहर में सरकार को एक डाकघर खोलना पड़ा था, क्योंकि देश के विभिन्न कोनों से उनके बनाए चित्रों के लिए अनुरोध पत्र आने लगे थे।
राजा रवि वर्मा के जीवन के बारे में अधिकांश जानकारी उनके भाई द्वारा लिखी गई 'द डायरी ऑफ सी. राजा वर्मा' के माध्यम से ही मिलती है। जो राजा रवि वर्मा के असिस्टेंट और बिजनेस मैनेजर भी थे। वहीं आपको बता दें कि Reclining Nair Lady उनकी सबसे प्रसिद्ध पेंटिंग्स में से एक है। इसे उन्होंने 1902 में बनाया था। इस पेंटिंग की प्रेरणा उन्हें फ्रांस के महान पेंटर एडुआर्ड मानेट की पेंटिंग 'ओलंपिया' से मिली थी। 2 अक्टूबर 1906 को इस प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार और कलाकार का निधन हो गया।
-
Gold Silver Price Crash: सोने-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट, सिल्वर 13000, गोल्ड 5500 सस्ता, अब इतनी रह गई कीमत -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच लगातार गिर रहे सोने के भाव, अब 10 ग्राम की इतनी रह गई है कीमत, नए रेट -
Aaj Ka Chandi ka Bhav: अमेरिका-ईरान जंग के बीच चांदी धड़ाम! ₹38,000 सस्ती, आपके शहर का लेटेस्ट Silver Rate -
शुरू होने से पहले ही बंद होगा IPL? कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, BCCI की उड़ गई नींद -
'वो मर्द शादीशुदा था, मैं उसके प्यार में पागल थी', फिर मिला ऐसा दर्द, 83 की उम्र में कुंवारी हैं ये एक्ट्रेस -
UGC के नए नियमों पर आज फैसले की घड़ी! केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में देगी सफाई -
PNG Connection: गैस संकट के बीच सबसे बड़ी गुड न्यूज! सिर्फ 24 घंटे में खत्म होगी किल्लत, सरकार ने उठाया ये कदम -
Kangana Ranaut: 'कंगना-चखना सब चटनी है', मंडी सांसद पर भड़के ये दिग्गज नेता, कहा-'पर्सनल कमेंट पड़ेगा भारी' -
Iran US War: 'खुद भी डूबेंगे सनम तुम्हें भी ले डूबेंगे', ट्रंप पर भड़के बक्शी, कहा- Trump ने जनता से झूठ बोला -
LPG Update: कितने दिन का बचा है गैस सिलेंडर का स्टॉक? LPG और PNG कनेक्शन पर अब आया मोदी सरकार का बड़ा बयान -
Gujarat UCC: मुस्लिम महिलाओं को हलाला से आजादी, दूसरी शादी पर 7 साल जेल! लिव-इन तक पर सख्त नियम, 5 बड़े फैसले -
Irani Nepo Kids: अमेरिका में मौज कर रहे ईरानी नेताओं-कमांडरों के बच्चे, जनता को गजब मूर्ख बनाया, देखें लिस्ट












Click it and Unblock the Notifications