राम विलास पासवान- कभी बनाया विश्व रिकॉर्ड तो कभी शून्य पर आउट

नई दिल्ली। राम विलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्त‍ि पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी है। भाजपा के साथ चुनाव लड़ने का मतलब बिहार में उन 8 सीटों पर भाजपा अपने प्रत्याशी नहीं खड़े करेगी, जहां पर लोजपा होगी। यहां पर फैसला राजनाथ सिंह का होगा और उसी पर नरेंद्र मोदी का इंडिया 272 प्लस का मिशन टिका हुआ है। खैर आखिर ऐसा क्या है पासवान में जो भाजपा उनपर मेहरबान हो गई है। आइये जानने के लिये चलते हैं पासवान के राजनीतिक सफर पर। इनके राजनीतिक सफर में एक रोचक बात यह है कि ये वो ख‍िलाड़ी हैं, जिन्होंने कभी विश्व रिकॉर्ड बनाया तो कभी शून्य पर आउट हुए।

अगर पिछले चुनाव यानी 2009 की बात करें तो कांग्रेस के साथ गठबंधन करके पासवान की पार्टी ने चुनाव लड़ा, लेकिन एक भी सीट नहीं निकाल पायी। यह कांग्रेस की रहमत ही थी कि पासवान को राज्यसभा तक पहुंचा कर सांसद बना दिया। पासवान अपने क्षेत्र में मजबूत नेताओं में गिने जाते हैं, लेकिन यह मजबूती उनकी अकेले की नहीं है। उन्हें कद्दावर नेता रामचंद्र पासवान, श्री कुमार सिंह और बॉलीवुड के फिल्म निर्माता प्रकाश झा का भी समर्थन हासिल है।

पासवान के प्रारंभ‍िक जीवन की बात करें तो छात्रजीवन के बाद वे पटना विश्वविद्यालय पहुंचे और परास्नातक तक की पढ़ाई की। पासवान शुरू से ही राज नारायण और जयप्रकाश नारायण के फॉलोवर रहे हैं। उनसे काफी कुछ सीख कर आगे बढ़े पासवान लोकदल के महासचिव नियुक्त हुए। इमरजेंसी के दौरान वे राजनारायण, करपूरी ठाकुर और सत्येंद्र नारायण सिन्हा के बेहद करीब थे। पासवान ने अपना पहला विधानसभा चुनाव 1969 में लड़ा और वो चुनाव था समयुक्ता सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर।

1975 में इमरजेंसी के दौरान वे भी जेल गये और 2 साल जेल में रहे। जेल से छूटने के बाद पासवान जनता पार्टी के सदस्य बने और संसदीय चुनाव लड़कर लोकसभा पहुंचे। उसके बाद 1980 और 1984 में वो हाजीपुर सीट से जीते। 1993 में इन्होंने दलित सेना की स्थापना की। 1989 में वीपी सिंह की सरकार के दौरान पासवान श्रम कल्याण मंत्री बने। उसके बाद उन्हें केंद्रीय रेल मंत्री बनाया गया। 1998 के बाद केंद्रीय टेलीकॉम मंत्री और फिर कोयला मंत्री रहे। वर्ष 2000 में नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड से हुए अलग हो गये और खुद की लोक जनशक्ति पार्टी स्थापित की। उन्होंने 2004 में यूपीए से जुड़ गये और आगे चलकर रसायन एवं खाद मंत्री और फिर इस्पात मंत्री बने।

स्लाइडर में कुछ रोचक बातें पासवान के बारे में-

विश्व रिकॉर्ड

विश्व रिकॉर्ड

सबसे ज्यादा अंतर से चुनाव जीतने का विश्व रिकॉर्ड सबसे पहले राम विलास पासवान ने बनाया।

पांच प्रधानमंत्र‍ियों के साथ काम कर चुके हैं पासवान

पांच प्रधानमंत्र‍ियों के साथ काम कर चुके हैं पासवान

राम विलास पासवान अपने करियर में अब तक पांच प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुके हैं।

पासवान के पांच बच्चे

पासवान के पांच बच्चे

राम विलास पासवान की पहली पत्नी का नाम राजकुमारी है, उनसे दो बेटियां हैं। जबकि दूसरी पत्नी रीना शर्मा पासवान जो पंजाबी ब्राह्मण हैं उनसे एक बेटा चिराग पासवान और एक बेटी है।

1 करोड़ की कुल संपत्त‍ि

1 करोड़ की कुल संपत्त‍ि

पासवान के पास कुल एक करोड़ रुपए की अचल संपत्त‍ि है।

दलित परिवार से हैं

दलित परिवार से हैं

राम विलास पासवान बिहार के दुसद जाति के हैं, जो दलित में आती है। यही कारण है कि उनका दलित वोटबैंक बहुत मजबूत माना जाता है।

बड़ा राजनीतिक झटका

बड़ा राजनीतिक झटका

2005 में बिहार विधानसभा चुनाव में लोजपा-कांग्रेस एक साथ लड़े। लेकिन पर्याप्त सीटें नहीं प्राप्त कर पाये। तब नीतीश कुमार ने पासवान की पार्टी के 12 विधायकों को तोड़ लिया और बिहार में सत्ता हासिल कर ली। तभी राज्यपाल बूटा सिंह ने विधानसभा भंग कर दी और चुनाव करा दिये। लेकिन उस चुनाव में लोजपा का सफाया हो गया।

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