Positive India: क्या होगा अगर आपने छोड़ी गैस सब्सिडी?

[Positive India] आज कल पीएम मोदी का एक एड टीवी पर जोर-शोर से दिखाया जा रहा है, जिसमें पीएम नरेन्द्र दामोदर दास मोदी लोगों से अपील कर रहे हैं कि अमीर लोग स्वेच्छा से रसोई गैस पर मिल रही सब्सिडी छोड़ दें, जिससे किसी की मां को चूल्हे और लकड़ियों से निजात मिल पाये।

LPG Subsidy

टीवी पर इस एड को देखकर आधे से ज्यादा लोगों के दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूमती है कि मोदी सरकार सिर्फ बातें करना और जनता से ही लेना चाहती है, आखिर जिन लोगों के पास सब्सिडी है वो भला क्यों छोड़े? लेकिन साथियों अगर जरा से अपने दिमाग पर आप जोर डालेंगे तो पायेंगे कि पीएम मोदी की यह अपील बेवजह और बेबुनियाद नहीं है और हम में से ज्यादातर लोगों के लिए यह अपने घर से कूड़ा निकालने जैसी प्रक्रिया है।

जी हां कूड़ा... जिस तरह से अतिरिक्त सामान घर के लिए कूड़ा साबित हो जाता है और उसे घर से बाहर निकाल देना ही उचित होता है ठीक उसी तरह अमीरों के लिए 'गैस सब्सिडी छोड़ो' स्कीम फायदे का सौदा है।

क्या होती है सब्सिडी?

सब्सिडी का मतलब होता है किसी आर्थिक क्षेत्र, संस्था, व्यवसाय, या व्यक्ति को वित्तीय समर्थन देना । यह आम तौर पर आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों को लाभ पहुँचाने और बढ़ावा देने के उद्देश्य से दी जाती है।

असमानता का दौर

सुदर्शन एनजीओ यूपी की सर्वे रिपोर्ट कहती है कि इस समय यूपी में असमानता का दौर चल रहा है, इस सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में कई घरों में एक ही परिवार के कई लोगों के पास तीन से चार गैस कनेक्शन हैं, जो कि उनके लिए फालतू और अतिरिक्त खर्च है जिसका फायदा भी उन्हें मिलता नहीं है। अगर वो इस अतिरिक्त खर्च को सरकार दे दें तो उनका कोई नुकसान तो नहीं होगा बल्कि किसी गरीब का भला जरूर हो जायेगा और यह हाल देश के लगभग हर राज्य का है।

2 लाख 80 हजार लोग सब्सिडी छोड़ चुके हैं

पीएमओ ऑफिस की ओर से जारी किये गये बयान में कहा गया है कि अब तक देश में करीब 2 लाख 80 हजार लोग 'गैस सब्सिडी छोड़ो' योजना के तहत अपनी सब्सिडी छोड़ चुके हैं। जिसमें भारतीय पेट्रोल, भारतीय पेट्रोल और हिंदुस्तान पैट्रोलियम के कनेक्शन शामिल है।

क्या है स्कीम?

'गैस सब्सिडी छोड़ो' योजना के जरिए केंद्र सरकार का मकसद गरीब के घर तक रसोई गैस का सिलेंडर पहुंचाना है, एक वित्त वर्ष के दौरान सब्सिडी दर पर 12 सिलेंडर मिलते हैं जिसकी दिल्ली में कीमत 417 रुपए है। बारह से अधिक सिलेंडर लेने पर उपभोक्ता को बाजार कीमत अदा करनी पड़ती है जिसका दाम करीब 610 रुपए है। इस स्कीम की शुरूआत पीएम मोदी ने 27 मार्च 2015 को नयी दिल्‍ली में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संगम में की थी।

कैसे छोड़ सकते हैं गैस सब्सिडी?

अगर आप रसोई गैस पर सब्सिडी छोड़ना चाहते हैं तो आपको 5 नंबर का फॉर्म भरना होगा, यह 5 नंबर का फॉर्म आपको गैस एजेंसी से ही मिलेगा जहां आपका गैस कनेक्शन है। इसे भरने के बाद आपको गैस एजेंसी में जमा करना होगा जिसके बाद एक हफ्ते के अंदर आपरी सब्सिडी कैसिंल हो जायेगी। वैसे आप ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं जिसके लिए आपको mylpg.in पर लाग इन करना होगा।

क्या हैं ताजा हालात

  • इस समय भारत में करीब 15.3 करोड़ एलपीजी ग्राहक हैं।
  • एक ग्राहक को साल में सब्सिडीयुक्त 12 गैस सिलेंडर (14.2 किलो वाले) मिलते हैं।
  • यदि पांच किलो का सिलेंडर है तो सब्सिडीयुक्त 34 सिलेंडर मिलते हैं।
  • अब तक सरकारी खजाने में 100 करोड़ रुपए की बचत हो चुकी है।
  • इस बचत से सरकार गरीबों को नये कनेक्शन देने में समर्थ हुई है।
  • आप सब्स‍िडी छोड़ेंगे तो गरीब के घर चूल्हे के धुएं के बजाये एलपीजी जल सकेगी।

क्या हैं चुनौतियां

यह तो ताजा तस्वीर है लेकिन भारत के राजनीति इतिहास की विडंबना यह है कि पिछले कुछ सालों से योजनाएं और अभियान तो बहुत बनते रहे हैं लेकिन उन पर सही रूप से अमल नहीं हो पाया। पीएम मोदी ने अपने शपथ ग्रहण के बाद अपने पहले भाषण में कहा था कि वो देश की सेवा करने आये हैं इसलिए ना तो वो खायेंगे और ना ही किसी को खाने देंगे। ऐसे में उनकी सरकार सही में इस योजना को असली जामा पहनाती है तो निश्चित रूप से वो दिन दूर नहीं जब भारत के हर घर मुस्कुारायेगा लेकिन शरीर में खून की तरह देश में भ्रष्टाचार घूम रहा है ऐसे में मोदी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती 'गैस सब्सिडी छोड़ो' योजना को ईमानदारी से फलीभूत करने की होगी।

पॉजिटिव इंडिया

अगर यह सरकारी योजना ईमानदारी से फलीभूत होती है तो यह एक सकारात्मक पहल है जो कि आने वाले दिनों में भारत की मजबूत और सक्षम तस्वीर को पेश करेगा। वाकई में अगर घरों में एलपीजी सिलेंडर होंगे तो किसी की मां, पत्नी, बेटी, बहन और बहू को चूल्हें पर खाना नहीं बनाना पड़ेगा जिसके चलते ना तो लकड़ियों के लिए पेड़ काटे जायेंगे और ना ही किसी भी महिला को चूल्हें में आग फूंकने के लिए अपनी छाती और आंतों पर जोर लगाना पड़ेगा जिसका धुंआ उसकी स्वास नलिकाओं को प्रभावित करेगा, हर घर में चैन की रोटी और सकून का स्वाद होगा।

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