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Pokhran: चर्चा में रहता है पोकरण, जहां होते हैं परमाणु बम परीक्षण और सैन्य अभ्यास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर के पोकरण क्षेत्र में स्थित एशिया की सबसे बड़ी फील्ड फायरिंग रेंज में भारत की तीनों सेना के युद्धाभ्यास 'भारत-शक्ति' के साक्षी बने।

इस युद्धाभ्यास में तीनों सेनाओं ने भारत में निर्मित हथियारों की ताकत का प्रदर्शन किया। देश के सबसे बड़े प्रदेश राजस्थान का सुदूर रेगिस्तानी इलाका है जैसलमेर। जहां सैकड़ो किलोमीटर दूर तक रेत के टीलों (धोरों) का क्षेत्र है।

Pokhran News

जैसलमेर शहर से 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है- पोकरण, जो पहले परमाणु बम के परीक्षण से लेकर अनेक सैन्य अभ्यासों का साक्षी रहा है। यहां न केवल पहला व दूसरा परमाणु बम का परीक्षण किया गया, बल्कि यहीं हर साल भारतीय सैनिक युद्ध अभ्यास के दौरान अपना दमखम दिखाते हैं। जानते हैं ऐसा क्या है पोकरण में जो इसे दूसरे शहरों से अलग बनाता है।

परीक्षणों और युद्धाभ्यास में सहायक है मौसम की विविधता

38,401 वर्ग किमी के साथ जैसलमेर राजस्थान का सबसे बड़ा जिला है। इस जिले को 5 तहसीलों में विभाजित किया गया है, जिसमें जैसलमेर, पोकरण, फतेहगढ़, भणियाणा और सम शामिल हैं। गोल्डन सिटी' के नाम से लोकप्रिय जैसलमेर पाकिस्तान की सीमा पर भारत के सीमा प्रहरी के रूप में खड़ा है।

इसकी सबसे बड़ी तहसील पोकरण रेगिस्तान में स्थित होने से यहाँ धूल भरी आंधियां चलती रहती हैं। आँधियां चलने से सेटेलाइट की नजरों से बचना आसान होता है। यहां पर गर्मियों में तापमान 50 डिग्री से ऊपर तक चला जाता है। जिसके चलते सेटेलाइट का इंफ़्रारेड सेंसर सही काम नहीं कर पाता है। इस कारण यहां पर हो रही गतिविधियों का पता नहीं लग पाता है।

ऐसे में किसी भी प्रकार के परीक्षण और युद्ध अभ्यास के लिए देशभर में यही सबसे सुरक्षित जगह मानी जाती है। रेगिस्तानी क्षेत्र होने के कारण यहां वर्ष भर मौसम में उष्णता व आंधियों का दौर चलता रहता है। मई-जून में तापमान 50 डिग्री तो आम दिनों में भी पारा 30 डिग्री के आसपास रहता है। मगर सर्दियों में पोकरण से सटे चांधन में पारा शून्य डिग्री से भी नीचे चला जाता है।

मौसम की यह विविधता यहां परीक्षणों के लिए सहायक साबित होती है। यह फील्ड फायरिंग रेंज भारत के बड़े रेंज क्षेत्रों में से एक है। इसको चार भागों ए, बी, सी व डी में बांटा गया है। खेतोलाई, धोलिया व लाठी के पास स्थित रेंज क्षेत्र में थल सेना तथा चांधन क्षेत्र के पास स्थित रेंज क्षेत्र में वायुसेना के युद्धाभ्यास होते है। यहां वर्ष भर युद्धाभ्यास चलते रहते हैं। सर्दियों के मौसम में देश के कई हिस्सों से बटालियनें यहां आती है और युद्धाभ्यास करती हैं। नई तोप, बंदूक, गोलों के साथ आधुनिक हथियारों का परीक्षण भी यहीं पर होता है।

दो परमाणु परीक्षण, अनेक युद्धाभ्यासों और मिसाइल परीक्षण का साक्षी है पोकरण

अब तक यहां दर्जनों मिसाइलों व युद्धक अस्त्र-शस्त्र मौसम की अलग-अलग परिस्थितियों में परखे जा चुके हैं। पोकरण में अब तक दो परमाणु परीक्षण और अनेक युद्धाभ्यास हो चुके हैं। 18 मई 1974 में पोकरण में भारत ने पहला परमाणु परीक्षण किया। ऑपरेशन का कोड नाम था 'स्माइलिंग बुद्धा'।

इसके 24 साल बाद 11 मई 1998 को वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने दूसरा परमाणु परीक्षण भी पोकरण में किया। इस परीक्षण को ऑपरेशन शक्ति का नाम दिया गया था। इसके अलावा समय-समय पर यहां भारतीय सेना के तीनों अंग थलसेना, वायुसेना और नौसेना मिलकर एक्सरसाइज करती हैं और ऑपरेशनल कैपेबिलिटी और रेडिनेस का प्रदर्शन कर नए हथियार और तकनीक को परखा जाता है।
रक्षा अनुसंधान विकास संगठन की ओर से एंटी टेंक गाइडेड मिसाइल नाग, ब्रह्मोस मिसाइल-2, एम 777 अल्ट्रा लाइट हॉविट्जर्स तोपों, टी- 90 भीष्म टैंक, पिनाक, स्मर्च व होवित्जर, धनुष, आकाश जैसे युद्धक हथियारों के साथ ही अर्जुन टैंक के अपग्रेड वर्जन का परीक्षण भी पोकरण फायरिंग रेंज में किया जा चुका है।

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