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Kalyan Singh: कल्याण सिंह ने बाबरी विध्वंस की जिम्मेदारी लेकर मुख्यमंत्री पद से दे दिया था इस्तीफा

Kalyan Singh: एक कड़क मुख्यमंत्री के रूप में पहचान बनाने वाले कल्याण सिंह ने अपने राजनीतिक कौशल, प्रशासकीय अनुभव से राष्ट्रीय स्तर पर एक अमिट छाप छोड़ी थी। 10 बार विधायक और 2 बार सांसद रहते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। बाबरी विध्वंस के दौरान कारसेवकों पर गोली न चलाने का निर्णय उन्होंने लिया था। बाद में जब सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी ढांचा गिराए जाने के लिए कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए सजा देने का निर्णय किया तो कल्याण सिंह ने पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेकर मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया और अपने मातहत अफसरों को क्लीन चिट दे दी।

संघ विचारधारा से जुड़े थे कल्याण सिंह

कल्याण सिंह का जन्म 5 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के अतरौली में हुआ था। वह बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर संघ की शाखाओं में जाने लगे थे। कल्याण सिंह ने अपने करियर की शुरुआत एक स्कूल शिक्षक के रूप में की थी। 1967 में पहली बार कल्याण सिंह अतरौली विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। इसके बाद अपनी काबिलियत से वह हर बाधा को पार करते गए और राजनीति में कदम जमाते गए। कल्याण सिंह 1977 में उत्तर प्रदेश में रामनरेश यादव की जनता पार्टी वाली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री भी रहे। इसके बाद 1980 में जब भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ तो पार्टी द्वारा कल्याण सिंह को प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। तब इनके मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का संगठन मजबूत हुआ। 1991 में कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

Kalyan Singh resigned from the cm post taking responsibility for the Babri demolition

बाबरी विध्वंस पर कल्याण सिंह का रुख

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में जब बाबरी विध्वंस हुआ, तब कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उस समय कल्याण सिंह ने पुलिस अधिकारियों को कारसेवकों पर गोली चलाने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद कल्याण सिंह ने एक भाषण में कहा था कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में मैंने पुलिस को 1992 के राम मंदिर आंदोलन को लेकर अयोध्या में जमा हुए राम भक्तों पर गोली नहीं चलाने का आदेश दिया था। इसके चलते ही बाबरी मस्जिद गिराई गई, मैं इसकी पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि बाबरी का विध्वंस भगवान की मर्जी थी। मुझे इसका कोई मलाल नहीं है। ये सरकार राम मंदिर के नाम पर बनी थी और उसका मकसद पूरा हुआ। ऐसे में सरकार राम मंदिर के नाम पर कुर्बान। राम मंदिर के लिए एक क्या, सैकड़ों सत्ता को ठोकर मार सकता हूं। केंद्र कभी भी मुझे गिरफ्तार करवा सकता है, क्योंकि मैं ही हूं, जिसने अपनी पार्टी के बड़े उद्देश्य को पूरा किया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कल्याण सिंह को सांकेतिक तौर पर एक दिन के लिए जेल भेजा था। साथ ही 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

यूपी में लागू किया था नकल अध्यादेश

कल्याण सिंह जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काफी सुधार किए थे। उनकी सरकार में राजनाथ सिंह शिक्षा मंत्री थे। तब उस समय कल्याण सिंह की सरकार में नकल अध्यादेश लागू हुआ था। इस अध्यादेश के बाद हाईस्कूल में 14.70 प्रतिशत तो इंटर में 30.30 प्रतिशत छात्र-छात्राएं ही पास हुए थे। उस समय के लोग आज भी एक-दूसरे से ये पूछते हैं कि कल्याण सिंह की सरकार में पास हुए हो या मुलायम की। क्योंकि कल्याण सिंह के समय पास होना बहुत बड़ी बात होती थी।

राज्यपाल के रूप में सेवाएं और तोड़ा रिकॉर्ड

कल्याण सिंह 4 सितंबर 2014 से 8 सितंबर 2019 तक राजस्थान के राज्यपाल रहे। इसके साथ ही कल्याण सिंह ने 28 जनवरी 2015 से 11 अगस्त 2015 तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार सम्भाला था। वहीं कल्याण सिंह ने राजस्थान में बतौर राज्यपाल रहते हुए 52 साल का रिकॉर्ड तोड़ा था। और अपना कार्यकाल पूरा किया था। 21 अगस्त 2021 को लखनऊ के एसजीपीजीआई में सेप्सिस और मल्टी ऑर्गन फेल्योर के कारण कल्याण सिंह का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

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