Monkeypox: क्या भारत में भी मंकीपॉक्स से महामारी का खतरा है?
28 जुलाई 2023 को स्वास्थ्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने लोकसभा में बताया कि भारत में 24 जुलाई 2023 तक मंकीपॉक्स के 27 मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें से 15 मामले दिल्ली से तथा 12 मामले केरल से आये थे।
मंकीपॉक्स सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक मानी जाती है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक महामारी घोषित किया हुआ है तथा इसका नाम भी परिवर्तित कर एमपॉक्स कर दिया है।

क्या होता है मंकीपॉक्स अर्थात एमपॉक्स
एमपॉक्स, एक संक्रामक वायरल बीमारी है अर्थात ऑर्थोपॉक्स वायरल संक्रमण रोग है, जो जानवरों से इंसानों में फैला है। यह बीमारी संक्रमित जानवरों अथवा इंसानों से दूसरे इंसानों अथवा जानवरों में फैलती है यानि यह एक संक्रमण रोग है। यह इंसानों में चेचक/चिकनपॉक्स के सामान ही दिखाई देता है। वैरियोला वायरस के कारण यह छोटी चेचक की तरह लगता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आपातकालीन विभाग के पूर्व प्रमुख डेविड हेमान के अनुसार एक से ज्यादा के साथ यौन संबंधों तथा समलैंगिक यौन संबंधों से मंकीपॉक्स के संक्रमण होने की आशंका सबसे ज्यादा है।
1958 में पहली बार यह बंदरों के अंदर देखा गया था, जिसके चलते इसे मंकीपॉक्स नाम दिया गया। इसके उपरांत 1970 में कांगो देश के अंदर पहली बार एक बच्चे में इसके लक्षण दिखाई दिये। अब इसने एक महामारी का रूप ले लिया है, जो 113 से ज्यादा देशों में फैल चुकी है। वहीं एब्ल्यूएचओ के अनुसार दुनिया भर में इसके 88 हजार से भी ज्यादा मामले सामने आये हैं, जिसमें से 152 लोगों की मौतें भी हो चुकी हैं। मंकीपॉक्स के अधिकतर मामले यूरोप व अमरीका से दर्ज हुए हैं।
मंकीपॉक्स के लक्षण
मंकीपॉक्स के लक्षणों में सबसे पहले हल्का बुखार व बाद में मांसपेशियों में दर्द, जकड़न और कमजोरी महसूस हो सकती है। जैसे-जैसे मंकीपॉक्स बीमारी का समय बढ़ता है, इसके लक्षणों में भी बढ़ोत्तर होती रहती है। इसके अहम लक्षणों में लसिका ग्रंथियों में सूजन आना है। वहीं रोगी के शरीर में चेचक/माता जैसे निशान बन जाते हैं, जो चेहरे से शुरू होकर शरीर के अन्य भागों में फैल जाते हैं। यह दाने, जो फफोले या घाव की तरह दिखाई देते हैं, रोगी में 2-4 सप्ताह तक रह सकते हैं।
इसके अलावा रोगी को बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, पीठ दर्द, ठंड लगना व थकावट आदि परेशानियां उत्पन्न हो जाती है। वहीं गंभीर मामलों में गर्भवती महिला, बच्चे, एचआईवी रोगी तथा कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग भी प्रभावित हो जाते हैं।
मंकीपॉक्स से बचाव व उपचार
मंकीपॉक्स का वर्तमान में कोई इलाज नहीं है। फिर भी एमपॉक्स से बचाव में सबसे अहम है कि आप संक्रमित रोगी (इंसान/जानवर) के निकट संपर्क से बचें, अपने हाथों को साबुन से बार-बार साफ करें और सावधानियां बरतें। एमपॉक्स में सावधानी ही सुरक्षा है। अगर आपको लगता है कि आपको एमपॉक्स हो सकता है तो तुरंत चिकित्सक की सलाह लें और दूसरों से दूरी बनाकर रहें। यह दूरियां तब तक बनाएं रखें, जब तक आपके घाव/फफोले ठीक न हो जाए।
मंकीपॉक्स के अधिकतर मामलों में रोगी दर्द, बुखार या अन्य दवा से ही कुछ हफ्तों के बाद अपने आप ठीक हो जाते हैं। इसके साथ-साथ रोगी को चेचक का टीका यानि वैक्सीन भी लगवा लेनी चाहिए। कुछ गंभीर मामलों में जैसे नवजात शिशु, बच्चें, गर्भवती महिला व कमजोर प्रतिरक्षा वाले रोगियों में कुछ जटिलताएं उत्पन्न हो सकती है, यहां तक कि मृत्यु का भी खतरा हो सकता है। उपलब्ध आंकडों के अनुसार एमपॉक्स रोगियों में मृत्यु दर 0.1 प्रतिशत से 10 प्रतिशत ही है।
कितना घातक है मंकीपॉक्स
मंकीपॉक्स बहुत कम समय में लगभग 113 देशों में फैल चुका है, जिसके मद्देनजर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे एक महामारी का दर्जा दिया है। इस गंभीर बीमारी से संक्रमित रोगी को अनेकों समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसमें त्वचा संबंधित समस्याएँ उम्र भर तक साथ रह सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मंकीपॉक्स के हर 10 रोगियों में से एक की जान जाने का खतरा रहता है यानि मृत्यु दर 10 प्रतिशत तक हो सकती है।
भारत में मंकीपॉक्स
भारत में एमपॉक्स की दस्तक 14 जुलाई 2022 को केरल प्रांत के कोल्लम जिले से हुई। जिसमें 35 वर्षीय व्यक्ति 12 जुलाई को संयुक्त अरब अमीरात से केरल आया था और वह एमपॉक्स संक्रमित पाया गया। हालांकि वह कुछ दिनों के उपरांत ठीक हो गया। 24 जुलाई 2023 तक भारत में एमपॉक्स के 27 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 12 मामले केरल प्रांत से तथा 15 मामले राजधानी दिल्ली से दर्ज हुए हैं। भारत में अभी मंकीपॉक्स से मरने का कोई भी मामला दर्ज नहीं हुआ है।
मंकीपॉक्स के विश्वस्तरीय आंकड़े
डब्ल्यूएचओ की अधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 24 जुलाई 2023 तक दुनिया भर के 113 देशों में मंकीपॉक्स के 88,600 मामले सामने आये हैं, जिनमें 152 लोगों की मृत्यु हुई है। वहीं दुनिया भर में मंकीपॉक्स के साप्ताहिक आंकड़ों का अध्ययन करें तो 10 जुलाई 2023 से 16 जुलाई 2023 तक मंकीपॉक्स के 81 मामले दर्ज हुए, जबकि 17 जुलाई 2023 से 23 जुलाई 2023 तक के सप्ताह में करीब 105 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मंकीपॉक्स के मामलों की संख्या 166 पहुंच गई।
एमपॉक्स के सर्वाधिक मामले 30,404 अमरीका से दर्ज किये गये हैं। वहीं उसके बाद ब्राजील (10,967), स्पेन (7559), फ्रांस (4147), कोलंबिया (4090) आदि देशों से एमपॉक्स के मामलें दर्ज हुए हैं।
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