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आर्थिक रूप से जर्जर ईरान को भारी पड़ सकता है इजरायल से युद्ध

Iran Israel War: ईरान और इजरायल के बीच युद्ध की संभावना बढ़ रही है। तेहरान के हमले के जवाब में इजरायल ने जवाबी हमला कर के जता दिया है कि वह ईरान में कहीं भी अपनी मिसाइल गिरा सकता है। आशंका यह व्यक्त की जा रही है कि घरेलू दवाब में ईरान के राष्ट्रपति भी फिर से इजरायल की ओर अपनी सेना का रुख कर सकते हैं।

इस बीच यह चर्चा भी हो रही है कि युद्ध का आर्थिक बोझ ईरान आखिर कितने दिनों तक उठा सकता है। साथ ही अमेरिका और इजरायल के सामने ईरान की फौज कितना टिक सकती है? इसमें कोई दो राय नहीं है कि ईरान बैलिस्टिक मिसाइलों और यूएवी के मामले में बेहद मजबूत है, लेकिन उसका डिफेंस सिस्टम भी ऐसा है क्या, जो इजरायल के आधुनिकतम एयरफोर्स से अपना बचाव कर सके।

Iran Israel War

ईरान का डिफेंस सिस्टम कमजोर

समाचार एजेंसी रायटर के अनुसार ईरान की हवाई सुरक्षा जर्जर और पुरानी हो चुकी है। तेहरान मुख्य रूप से रूसी एस-200 और एस-300 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम पर आश्रित है। हालांकि बावर-373, खोरदाद, राड, सैय्यद जैसे कुछ नए हथियार भी ईरान के पास हैं, लेकिन पुराने अमेरिकी और रूसी युद्धक विमानों के सहारे ईरान कितना लड़ सकेगा, यह ईरानी भी नहीं जानते।

दूसरी तरफ अमेरिका ने हाल ही में इजरायल के लिए एक सहायता पैकेज जारी करने की घोषणा कर दी है, जिससे उसकी हवाई सुरक्षा और मजबूत हो जाएगी। ईरान के संभावित हमले की तैयारी के लिए इजरायल अपने आयुध भंडार को भरने में लग गया है। उसके पास पहले से ही आयरन डोम और डेविड स्लिंग सिस्टम हैं जो आने वाली मिसाइल को रास्ते में ही निपटा सकते हैं।

हालांकि अमेरिका पहले ही यह कह चुका है कि वह ईरान पर आक्रमण करने के पक्ष में नहीं है, लेकिन यह बात किसी से छुपी नहीं है कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध बहुत फासले पर नहीं है। यदि किसी कारण से अमरीका इजरायल के साथ युद्ध में शामिल होता है तो यह घातक स्तर तक बढ़ सकता है। फिर रूस और चीन के हस्तक्षेप से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

1980 से ही ईरान युद्ध मोड में

ईरान 1980 के दशक से ही युद्ध की स्थिति में है। तब उसने इराक के साथ लंबा युद्ध लड़ा था। ईरान का घरेलू सैन्य उद्योग भी मजबूत है और वे अरब पड़ोसियों की तुलना में रक्षा पर ज्यादा सतर्क रहते हैं। युद्धक रणनीति, आधुनिक हथियार और केंद्रीकृत कमान के कारण ईरान मध्य पूर्व की एक बड़ी सेना वाला देश है।

ईरान की भौगोलिक स्थिति भी युद्ध में उसकी बढ़त के अनुकूल है। इसके दक्षिण और पश्चिम में ज़ाग्रोस पर्वत और महरान रेंज हैं। इसकी उत्तरी सीमाएँ अल्बोर्ज़ पर्वत से सुरक्षित हैं और इसका पूर्वी भाग एक पूरी तरह रेगिस्तान है। ईरान की कुछ पर्वत श्रृंखलाएं 5,000 मीटर से अधिक ऊँची हैं। इसलिए ईरानी सुरक्षा में बड़ी सेंध लगाने के लिए किसी भी देश के लिए अधिक सैनिकों और प्रभावी रणनीति की आवश्यकता होगी।

आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हो चुका है ईरान

बड़ी सैन्य ताकत होने के बावजूद ईरान ज्यादा समय तक युद्ध लड़ने की स्थिति में नहीं है। कारण यहाँ की अर्थव्यवस्था पिछले दशकों से कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। ईरानी नागरिक लगातार बढ़ रही मुद्रास्फीति और कम आय वृद्धि से बहुत परेशान हैं। पश्चिम के देशों के साथ संबंधों में बिगाड़ होने के कारण ईरान कई तरह के प्रतिबंधों को झेल रहा है।

ईरान का बजट घाटा लगातार बढ़ रहा है और इस कारण रणनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप संसाधनों का आवंटन नहीं हो पा रहा है। 2022 में ईरान आंतरिक विद्रोह को बड़ी मुश्किल से संभाल सका था। ईरानी राष्ट्रपति रायसी की सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष (मार्च 2023-मार्च 2024) में 40 प्रतिशत बजट का विस्तार किया है और साथ ही करों में 50 प्रतिशत की वृद्धि भी कर दी है।

ईरान की मुद्रा का लगातार अवमूल्यन हो रहा है। इस समय इसकी विनिमय दर लगभग 420,00 रियाल प्रति डॉलर है। घाटे को पूरा करने के लिए ईरान अपने पेट्रोलियम उत्पाद चीन को रियायती मूल्य पर बेच रहा है। ईरान खुद को डिफॉल्ट होने से बचाने के लिए यह सब कर रहा है।

दूसरे के युद्ध को भी फंड देता है ईरान

ईरान अपने क्षेत्रीय सहयोगियों पर भी प्रति वर्ष लगभग $700 मिलियन खर्च करता है। ईरानी संसद के एक पूर्व सदस्य, हशमतुल्ला फलाहतपिशेह के अनुसार तेहरान ने केवल सीरिया में युद्ध पर 20 से 30 बिलियन डॉलर खर्च कर दिए थे। ईरान वैश्विक स्तर पर अमेरिकी विरोधी नेटवर्क पर भी भारी रकम खर्च कर रहा है।

विश्व बैंक के ईरान इकोनॉमिक मॉनिटर (आईईएम) ने अपनी रिपोर्ट में कहा भी है कि ईरान की अर्थव्यवस्था को आंतरिक और बाहरी दोनों तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। ईरान में सामाजिक तनाव अब तेजी से बढ़ रहा है। एक बात और कि ईरान से संबंधित अधिकांश डेटा सरकारी स्रोतों से प्राप्त होता है, जो बाकी दुनिया के लिए विरोधाभासी और कम विश्वसनीय होते हैं। इसलिए ईरान की आंतरिक स्थिति पर सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। बैंकिंग प्रणाली भी ज्यादातर सरकार द्वारा ही नियंत्रित है। इसलिए सरकार अपने बिलों का भुगतान करने के लिए अक्सर पैसे की अतिरिक्त छपाई पर निर्भर है।

चीन को अतितिक्त सुविधा दे रहा है ईरान

ईरान में भी चीन ने अपना दबदबा कायम कर रखा है। हाल के वर्षों में तेहरान और बीजिंग के बीच राजनयिक संबंध इस स्तर तक मजबूत हुए हैं कि चीनी नागरिकों के लिए ईरान की यात्रा वीज़ा-मुक्त कर दिया गया है। चीन की 20 प्रभावशाली सोशल मीडिया हस्तियों को ईरान ने अपने खर्च पर आमंत्रित किया था ताकि उनकी अनुशंसा पर लाखों चीनी छुट्टियों के लिए ईरान आ सकें।

ईरान अपने प्राचीन इतिहास, बेजोड़ वास्तुकला और गर्मजोशी भरे आतिथ्य सत्कार के लिए भी जाना जाता है। चीन के सहयोग से ही ब्रिक्स में ईरान को सदस्यता मिली है। यह उम्मीद की जा रही थी कि ईरान ब्रिक्स के जरिए अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों को खत्म कराने की कोशिश करेगा, लेकिन एक नए युद्ध में शामिल होकर ईरान ने अपनी प्राथमिकता बदल दी है।

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