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Indian Submarines: दुश्मन के हर पैंतरे के लिए तैयार भारतीय पनडुब्बियां

Indian Submarines: हाल ही में इजरायल से जुड़े रासायनिक टैंकर, एमवी केम प्लूटो पर ड्रोन से हमले के बाद भारतीय नौसेना ने अरब सागर में पनडुब्बियों सहित कई युद्धपोत तैनात कर दिए हैं।

नौसेना ने "डोमेन जागरूकता" के लिए लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमान भी भेजे हैं। पाकिस्तान के किसी भी संभावित दुस्साहस को रोकने और उसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए उत्तरी भारत ने अरब सागर में अपनी तैयारी चाकचौबंद कर ली है। इन दिनों हूती विद्रोहियों ने हमास के पक्ष में इजरायल और अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

Indian Submarines Indian Navy deployed several warships including submarines in the Arabian Sea

इससे समुद्री सीमा की सुरक्षा महत्त्वपूर्ण हो गई है। इस संदर्भ में एक नजर डालते हैं समुद्र में तैनात भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों की ताकत एवं संख्या पर।

भारत के पास कितनी पनडुब्बियां हैं?

किसी भी नौसेना के लिए पनडुब्बियां सबसे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि युद्ध के समय समुद्री सतह और उसके भीतर दुश्मन से निबटने का यह सबसे प्रभावी संसाधन है। दिसंबर 2023 तक, भारतीय नौसेना के बेड़े में 18 पनडुब्बियां हैं, जिनमें दो परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां और 16 डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियाँ शामिल हैं। भारतीय नौसेना के पास पनडुब्बियों का यह बेड़ा 50 वर्षों से अधिक समय से मौजूद है। पहली भारतीय पनडुब्बी आईएनएस कलवरी थी, जिसे कमांडर केएस सुब्रमण्यम के नेतृत्व में 8 दिसंबर, 1967 को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया था।

भारत की पनडुब्बियों की सूची

भारत के पास परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (एसएसबीएन) में 1 क्लास और पारंपरिक रूप से संचालित पनडुब्बियां (एसएसके) में 3 क्लास मौजूद है। एसएसबीएन में भारत के पास अरिहंत क्लास मौजूद है और अरिहंत क्लास में भारत के पास आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघाट मौजूद है। अरिहंत क्लास का कुल विस्थापन वजन 6,000 टन है और यह प्रथम भारतीय मूल की परमाणु पनडुब्बी श्रेणी है।

एसएसके क्लास में कलवरी क्लास, सिंधुघोष क्लास और शिशुमार क्लास मौजूद हैं। कलवरी क्लास में 5 पनडुब्बियां है और इनका कुल विस्थापन वजन 2,000 टन है और इसे भारत और फ्रांस में बनाया गया था। सिंधुघोष क्लास में कुल 7 पनडुब्बियां है। सिंधुघोष क्लास को पहले सोवियत संघ और फिर बाद में रूस द्वारा बनाया गया था और इनका कुल विस्थापन वजन 3,076 टन है। शिशुमार क्लास में कुल 4 पनडुब्बियां मौजूद है। शिशुमार क्लास को जर्मनी और भारत द्वारा संयुक्त रूप से बनाया गया था और इनका कुल विस्थापन वजन 1,850 टन है।

पनडुब्बियों के लिए भारत की भविष्य की योजनाएँ

चीन की बढ़ती नौसैनिक ताकत का मुकाबला करने के लिए भारत के पास अपने पनडुब्बी बेड़े को आधुनिक बनाने और विस्तारित करने की महत्वाकांक्षी योजना है। भारत का लक्ष्य 2030 तक 24 पनडुब्बियों का अधिग्रहण करना है, जिसमें 18 पारंपरिक और 6 परमाणु-संचालित पनडुब्बियां शामिल होंगी। सितंबर 2023 की इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग (आईडीआरडबल्यू) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने स्थानीय स्तर पर तीन एसएसएन विकसित करने की भी योजना बनाई है। बाद के चरणों में तीन और पनडुब्बियों के लिए ऑर्डर दिए जाएंगे। भारतीय नौसेना फ्रांस में सहयोग और सुपर कलवरी क्लास के लिए फ्रांसीसी शिपयार्ड नेवल ग्रुप और राज्य के स्वामित्व वाली मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के साथ भी पनडुब्बियां बनाने के लिए सहयोग कर रही है। भारत प्रोजेक्ट 75 अल्फा पर भी काम कर रहा है।

क्या है प्रोजेक्ट 75?

प्रोजेक्ट 75 (भारत), जिसे पी-75(आई) के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा एक सैन्य अधिग्रहण पहल है जिसका उद्देश्य भारतीय नौसेना के लिए डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की खरीद करना है। इस परियोजना में उन्नत हथियारों और सेंसरों के साथ छह आधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण की योजना है, जिसमें ईंधन-सेल-आधारित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी), उन्नत टॉरपीडो, आधुनिक मिसाइलें और अत्याधुनिक काउंटरमेजर सिस्टम शामिल हैं। इस परियोजना की लागत लगभग ₹43,000 करोड़ है। मूल रूप से 1997 में शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य भारतीय नौसेना की पनडुब्बी शाखा के लिए छह पारंपरिक रूप से संचालित हमलावर पनडुब्बियों की एक श्रेणी की खरीद करना है, जो सिंधुघोष-श्रेणी की पनडुब्बियों के प्रतिस्थापन के रूप में शामिल की जाएंगी।

भारतीय पनडुब्बियों के कुछ प्रमुख ऑपरेशन

● भारत-पाक युद्ध (1971): 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय पनडुब्बियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पाकिस्तानी नौसेना ने भारतीय नौसैनिक के ऑपरेशन पर खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए पनडुब्बियों को तैनात किया। पीएनएस गाजी, एक टेंच श्रेणी की लंबी दूरी की पाकिस्तानी पनडुब्बी थी, जिसे भारतीय आईएनएस विक्रांत का पता लगाने और डुबाने के लिए बंगाल की खाड़ी में भेजा गया था। हालाँकि, पीएनएस गाजी रहस्यमय तरीके से बंगाल की खाड़ी में खो गया। 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच एक बड़ा सैन्य टकराव था।

● 2001-2002 भारत-पाकिस्तान गतिरोध (ऑपरेशन पराक्रम): ऑपरेशन पराक्रम में भारतीय पनडुब्बियों की भूमिका अहम थी। 2001-2002 के भारत-पाकिस्तान गतिरोध के दौरान, भारतीय नौसेना की पनडुब्बियों, जिनमें पारंपरिक और परमाणु-संचालित दोनों शामिल थीं, ने नौसैनिक जुटाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पनडुब्बियों को अन्य अग्रिम पंक्ति की संपत्तियों के साथ, संचालन के लिए उत्तरी अरब सागर में चुपचाप और प्रभावी ढंग से तैनात किया गया था, जिसने पाकिस्तानी नौसेना को बैकफुट पर डाल दिया था। इस बड़े पैमाने पर जुटाव में पनडुब्बियों की भागीदारी ने संकट के दौरान भारतीय नौसेना की नौसैनिक क्षमताओं और रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने में उनके महत्व को प्रदर्शित किया।

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