87 साल की हुई IMA, पाक के जिस आर्मी चीफ को दी ट्रेनिंग, वही लड़ा भारत के खिलाफ
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी (आईएमए) ने आज 87 वर्ष पूरे कर लिए। साल 1931 में को इंडियन मिलिट्री कॉलेज कमेटी जिसके चेयरमैन फील्ड मार्शल फिलिप चेटवुड थे, उसकी तरफ से इस एकेडमी के लिए प्रस्ताव दिया गया था। इसके बाद एक अक्टूबर 1932 को आईएमए अस्तित्व में आया। आईएमए से तीन ऐसे आर्मी ऑफिसर्स निकले जिन्होंने अपने देश की सेनाओं का नेतृत्व किया।

पाकिस्तान आर्मी के जनरल मुहम्मद मूसा
इंडियन आर्मी चीफ फील्ड मार्शल सैम मॉनेकशॉ, पाकिस्तान आर्मी के चीफ जनरल मुहम्मद मूसा और म्यांमार आर्मी के चीफ जनरल स्मिथ दुन, आईएमए से पासआउट थे। जनरल मुहम्मद मूसा आईएमए से पासआउट वह ऑफिसर साबित हुए जिन्होंने सन 1947 और फिर 1965 में कश्मीर में आतंकवाद के नाम पर जंग को आगे बढ़ाया। आईएमए ने भारतीय सेना को बहादुर और सर्वश्रेष्ठ ऑफिसर्स से नवाजा है। मेजर सोमनाथ शर्मा, कैप्टन गुरबचन सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल होशियार सिंह, सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल, कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज पांडे और न जाने ऐसे कितने ही जांबांजों के नाम हैं जो आईएमए से पासआउट थे।

बंटवारे के बाद गए पाकिस्तान
मुहम्मद मूसा खान का जन्म 1908 को क्वेटा, बलूचिस्तान में हुआ था। वह हजारा समुदाय से थे। सन् 1926 में मूसा को ब्रिटिश इंडियन आर्मी में एक जवान के तौर पर शामिल किया गया था। अक्टूबर1932 में उनका सेलेक्शन आईएमए के लिए हो गया। 1947 में बंटवारा हुआ और वह पाकिस्तान चले गए। द्वितीय विश्व युद्ध के समय में मूसा ने यूनाइटेड किंगडम की तरफ से हिस्सा लिया था। 1947 में बंटवारे के बाद कश्मीर को लेकर संघर्ष शुरू हुआ तो उस समय मूसा कॉम्बेट ब्रिगेड को कमांड कर रहे थे।

65 की जंग के बाद बने आर्मी चीफ
साल 1958 में पाकिस्तान में मिलिट्री शासन लगा दिया गया और तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने मूसा को कमांडर-इन-चीफ बना दिया साल 1965 में भारत-पाक युद्ध के बाद मूसा को काफी ख्याति मिली और उन्हें पाकिस्तान आर्मी का चीफ बना दिया गया। हालांकि इसके कुछ समय बाद ही वह रिटायर भी हो गए। सन् 1991 में उनकी मौत हो गई।












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