सैकड़ों प्राचीन मूर्तियां लाई गईं विदेशों से भारत वापस, जानिये किन देशों में थीं चोरी की गई भारतीय कलाकृतियां

भारतीय संस्कृति और कला का दुनियाभर में शुरुआत से ही आकर्षण रहा हैं। बीती शताब्दियों में अनगिनत मूर्तियां अथवा कलाकृतियां भारत से चोरी कर विदेशों में बेच दी गयी। इनमें से अधिकतर छठी से 11 शताब्दी के कालखंड की थी, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों डॉलर की कीमत है लेकिन भारत के लिए कीमत से ज्यादा महत्त्वपूर्ण इनकी सकुशल वापसी है। पिछले कुछ सालों में सैकड़ों की संख्या में ऐसी मूर्तियों और कलाकृतियों को वापस भारत लाया गया हैं। आइये जानते हैं भारत से चोरी करके विदेश भेजी गईं मूर्तियों और कलाकृतियों की वापसी के बारे में।
स्कॉटलैंड
स्कॉटलैंड द्वारा 7 कलाकृतियां भारत को सौंपी गईं, जिनमें एक तलवार भी थी जिसे 1905 में हैदराबाद के नबाब के यहाँ से चुराया गया था और बची हुई 6 कलाकृतियों को 19वीं शताब्दी में उत्तर भारत के किसी मंदिर से चुराया गया था। कुछ कलाकृतियों की आयु तो 1,000 वर्ष से भी ज्यादा थी।
ऑस्ट्रेलिया
साल 2014 में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने अपने भारतीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान नटराज की कांस्य मूर्ति लौटाई। यह मूर्ति तमिलनाडु के किसी मंदिर से चुराई गयी थी। इसी साल, ऑस्ट्रेलिया ने 11-12वीं शताब्दी के चोल साम्राज्य के समय की एक कांस्य मूर्ति भारत को वापस लौटाई जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में ₹41 करोड़ के आसपास है। जनवरी 2020 में ऑस्ट्रेलिया ने 3 कलाकृतियों को वापस किया था। कलाकृतियों में 15वीं शताब्दी के तमिलनाडु के द्वारपालों (द्वारपाल) की जोड़ी सहित 8वीं शताब्दी में उत्तर-पश्चिमी भारत के सम्राट नागभट्ट की मूर्तियां थी।
29 जुलाई 2021 को ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी ने भारत सरकार को सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण 14 कलाकृतियों को लौटाया था। गौरतलब है कि अधिकतर कलाकृतियाँ 12वीं शताब्दी के आसपास की थीं और इनकी कीमत लगभग ₹16.34 करोड़ है। लौटाई गई 14 कलाकृतियों में 6 कांस्य और पत्थर की मूर्तियां, एक पीतल का मानक, एक चित्रित स्क्रॉल और छह चित्र शामिल थे।
ऑस्ट्रेलिया सरकार ने 21 मार्च 2022 को भी 29 कलाकृतियों को लौटाया था। यह अधिकतर 9वीं और 10वीं शताब्दी के आसपास की थीं। जिनमें जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां, भगवान लक्ष्मी नारायण, चंडीकेश्वर की कांस्य मूर्तियां, शिव एवं पार्वती और भगवान विष्णु की एक पेंटिंग शामिल थी।
कुछ महीनों पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में तमिलनाडु के वेल्लोर से चोरी हुई भगवान हनुमान की मूर्ति का भी जिक्र किया था, जिसकी आयु लगभग 600 से 700 वर्ष थी। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि उस मूर्ति को भी ऑस्ट्रेलिया से भारत लाया गया था।
इटली
इटली ने 10वीं सदी के अवलोकितेश्वर पद्मपाणि की मूर्ति भारतीय उच्चायोग को वापस की थी। इसे साल 2000 में बिहार के कुंडलपुर से चुराकर विदेशों में बेच दिया गया था। अवलोकितेश्वर पद्मपाणि की मूर्ति लौटाने का जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में भी किया था।
अमेरिका
प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान, अमेरिका ने 157 कलाकृतियों और पुरावशेषों को भारत को लौटाया था। इस दौरान राष्ट्रपति बिडेन और प्रधानमंत्री मोदी ने सांस्कृतिक कलाकृतियों की चोरी, अवैध व्यापार और तस्करी को रोकने के प्रयासों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया था। इस सूची में 2000 ईसा पूर्व की तांबे की मानवरूपी मूर्ति सहित 11वीं-12वीं सदी की कलाकृतियाँ शामिल हैं।
कनाडा
साल 2015 में प्रधानमंत्री मोदी के कनाडा के दौरे के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने प्रधानमंत्री मोदी को लगभग 900 साल पुरानी 'पैरट लेडी' मूर्ति लौटाई थी। यह सेंडस्टोन की मूर्ति मध्यप्रदेश के खजुराहो से चुराई गई थी।
नवंबर 2022 में कनाडा की एक यूनिवर्सिटी ने बताया कि वह भारत को उसकी कलाकृतियों को लौटाएंगे जो लगभग 100 साल पहले बनारस से चुराई गई थी। यह हिंदू देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति थी जोकि रेजिना विश्वविद्यालय के संग्रह में मैकेंज़ी आर्ट गैलरी में रखी गई थी। मूर्ति को कनाडा से प्राप्त करते समय भारतीय उच्चायुक्त ने कहा कि "हमें खुशी है कि अन्नपूर्णा की यह अनूठी प्रतिमा अपने घर जा रही है। मैं भारत में इस सांस्कृतिक आइकन की वापसी के लिए सक्रिय सहयोग के लिए रेजिना विश्वविद्यालय का आभारी हूं।"
यूनाइटेड किंगडम
भारतीय उच्चायोग को तमिलनाडु के एक मंदिर से चोरी की गई 4 मूर्तियां यूनाइटेड किंगडम द्वारा लौटाई गई हैं। यह चार मूर्तियाँ भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की थीं और इन्हें वर्ष 1978 में चुराया था।
सिंगापुर
सिंगापुर ने साल 2015 में हिंदू देवी उमा परमेश्वरी की मूर्ति भारत को वापस सौंपी थी। यह मूर्ति 11वीं शताब्दी के चोल साम्राज्य से संबंध रखती थी। इस मूर्ति को कुछ वर्ष पहले तमिलनाडु के अरियालुर जिले के एक शिव मंदिर से चुराया गया था।
जर्मनी
देवी महिषमर्दिनी की मूर्ति जर्मनी ने भारत को साल 2015 में लौटाई थी। यह मूर्ति जम्मू और कश्मीर के एक मंदिर से चुराई गई थी।
अब तक भारत की कितनी कलाकृतियां हुई चोरी?
2020 की यूनेस्को (UNESCO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1977 और 1979 के बीच 3,000 से अधिक पुरावशेषों की चोरी दर्ज की गई थी। वहीं यूनेस्को का अनुमान है कि 1989 तक भारत से 50,000 से अधिक कलाकृतियों को चोरी किया गया था, जिनमें कोहिनूर हीरा, महाराजा रणजीत सिंह की गद्दी, टीपू सुल्तान की तलवार-अंगूठी, सुल्तानगंज बुद्ध की मूर्ति, भगवान हरिहर मूर्ति आदि कई कलाकृतियां शामिल हैं।












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