Airbus: जानें हवाईजहाज बनाने वाली एयरबस के बारे में, भारत की एयरलाइंस क्यों दे रही इसे बड़े ऑर्डर?
Airbus: भारतीय एयरलाइन इंडिगो ने एयरबस से 500 विमान खरीदने का करार किया है। पेरिस में चल रहे एयरशो के दौरान इस रिकॉर्ड डील की घोषणा की गयी। इंडिगो इस बड़े सौदे के लिए 55 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च करेगी। इससे पहले टाटा के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने 470 यात्री विमान खरीदने के लिए विमान बनाने वाली कंपनियों बोइंग और एयरबस के साथ करार किया था। इंडिगो को इन सभी जहाजों की डिलिवरी 2030 से वर्ष 2035 के बीच किए जाने की संभावना है।
आपको बता दें कि यह एविएशन के इतिहास का सबसे बड़ा ऑर्डर है। ऑर्डर किए गये विमानो में A320NEO, A321NEO A320XLR जैसे विमान शामिल हैं। इंडिगो के सीईओ पीटर एलबर्स ने एक बयान में कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है। अभी आगे बहुत कुछ बाकी है। भारत के विकास और भारतीय एविएशन मार्केट की प्रगति के साथ ऑर्डर देने का यह सही समय था।

एयरबस का इतिहास
जुलाई 1967 में एक बैठक में फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के मंत्रियों ने विमानन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में यूरोपीय सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से एकजुट होकर सहमति व्यक्त की। इसके बाद एयरबस की 29 मई 1969 को स्थापना की गयी। फिर 1969 के पेरिस एयर शो में फ्रांसीसी परिवहन मंत्री जीन चामंत और जर्मन मंत्री कार्ल शिलर द्वारा A300 कार्यक्रम शुरू किया गया। फ्रांसीसी इंजीनियर रोजर बेतेल को इस कार्यक्रम का तकनीकी निदेशक नियुक्त किया गया। सुड एविएशन के अध्यक्ष हेनरी जिगलर को एयरबस इंडस्ट्री का महाप्रबंधक नामित किया गया। इन सभी लोगों को फादर ऑफ एयरबस कहा जाता है।
यह कंपनी मुख्य रूप से वाणिज्यिक तथा सैन्य विमानों सहित हेलीकाप्टरों का निर्माण और बिक्री करती है। फिलहाल यूरोपीय संघ के चार देशों जर्मनी, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम और स्पेन के सोलह स्थानों पर एयरबस के लगभग 1,34,000 कर्मचारी कार्य करते हैं। एयरबस का यूरोपीय एयरोनॉटिक डिफेंस एंड स्पेस कंपनी (EADS) का 80 प्रतिशत और ब्रिटेन के बीएई सिस्टम्स का 20 प्रतिशत शेयर के साथ सह-स्वामित्व है। एयरबस अपने लगभग 50 साल के ट्रैक रिकॉर्ड के साथ वाणिज्यिक विमान, हेलीकाप्टर, अंतरिक्ष रक्षा और सुरक्षा के संचालन के साथ - साथ दुनिया भर के ग्राहकों के लिए एयरोस्पेस जैसे उत्पादों व सेवाओं और समाधानों को डिजाइन करने और वितरित करने में अग्रणी है।
भारत में आसान नहीं थी एयरबस की शुरुआत
दुनिया के सबसे बड़े यात्री जहाज A-380 के साइज और इससे भारतीय विमान कंपनियों को होने वाले नुकसान को देखते हुए इसे भारत में ऑपरेशन की इजाजत नहीं दी गई थी। लेकिन 2014 में केंद्र सरकार ने देश के 4 बड़े एयरपोर्ट पर A-380 को उतरने और उड़ान भरने की इजाजत दी। भारत की बात करें तो पहली बार 30 मई 2014 को दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर A-380 की लैंडिंग हुई थी। वैसे 2007 में बेंगलुरु में एयरबस इंडिया इंजीनियरिंग सेंटर स्थापित किया गया था। इस समय यह 700 से अधिक इंजीनियरों की ताकत के साथ तेजी से बढ़ा है।
वर्तमान में, देश में लगभग 700 वाणिज्यिक विमान हैं। जिनमें एयरबस के लगभग 470 विमान और लगभग 159 बोइंग विमान भारत में वाणिज्यिक सेवा में हैं। इंडिगो पहली एयरलाइन थी जिसने 2005 में सबसे बड़ा विमान ऑर्डर दिया था। जिसमें 100 एयरबस नैरो-बॉडी एयरक्राफ्ट शामिल थे। इसके बाद 2011 में 180 एयरबस विमानों का ऑर्डर दिया गया। 2015 में 250 एयरबस विमानों का ऑर्डर दिया गया। स्पाइसजेट ने भी 2017 में 205 विमान खरीदने की घोषणा की थी। वहीं गो फर्स्ट ने 2011 में 72 और 2016 में भी 72 यानी कुल 144 'एयरबस 320' के लिए ऑर्डर दिया था।
एयरबस का टर्नओवर
2022 के लिए एयरबस समूह का वार्षिक राजस्व $61.913 बिलियन था। जो 2021 से 0.35% अधिक है। 2021 के लिए एयरबस समूह का वार्षिक राजस्व $61.697 बिलियन था, जो 2020 से 8.21 प्रतिशत ज्यादा था। यह जर्मन-फ्रांसीसी-स्पेनिश यूरोपीय एयरोनॉटिक डिफेंस एंड स्पेस कंपनी (EDS) के सह-स्वामित्व में है। एयरबस साल 2022 में 1,078 जेट ऑर्डर के बाद नये विमान ऑर्डर और डिलीवरी के मामले में टॉप पर रही है। एयरबस ने पिछले साल 661 विमान सौंपे, जो 2021 की तुलना में 8 प्रतिशत अधिक है। जबकि बोइंग ने 480 विमान वितरित डिलीवर किये हैं।
दुनिया से एयरबस को मिले ऑर्डर
एयरबस A380-800 के यात्री विमानों के लिए 14 एयरलाइंसों ने 251 ऑर्डर दिये थे। जिनमें से सभी को दिसंबर 2021 तक डिलीवरी कर दी गयी। वहीं इसके मालवाहक संस्करण की बात करें तो A380F के लिए मूल रूप से 27 ऑर्डर भी थे। उत्पादन में देरी के बाद फिलहाल इसे बंद कर दिया गया है। वहीं 20 ऑर्डर A380F विमानों के थे, उन्हें रद्द कर दिया गया और शेष सात को A380-800 में बदल गया है। अब तक सबसे अधिक ऑर्डर अमीरात एयरलाइंस ने दिये हैं। जिसमें उसने 2008 में 123 विमानों का ऑर्डर दिया था। तो वहीं ऑल निप्पॉन एयरवेज ने 2019 में सबसे कम 3 एयरबसों का ऑर्डर दिया था।
एयरबस और बोइंग में अंतर
एयरबस और बोइंग दोनों ही जेट एयरलाइनर बनाने वाली दुनिया की बड़ी कंपनियां हैं। बोइंग अमेरिकन कंपनी है और एयरबस मूलतः यूरोपीय। बोइंग के ज्यादातर जहाज हाई लग्जीरियस और महंगे होते हैं। जिसकी वजह से इनके मुख्य ग्राहक इलीट क्लास की एयरलाइन्स हैं। जबकि एयरबस के जहाज अपेक्षाकृत सस्ते और इकॉनमी क्लास के हैं। इनके प्रमुख उपयोगकर्ता इकोनॉमी क्लास की एयरलाइन्स हैं। एयरबस का मुख्य फोकस इकोनॉमी क्लास के पैसेंजर्स हैं। इसीलिए यह साउथ ईस्ट एशिया, अफ्रीका, साउथ अमेरिका के मार्केट पर ज्यादा फोकस करती है।
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