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15 August 2024 Hindi desh bhakti Song: ये हैं देश भक्ति से भरे गानेंं, जो स्‍वतंतत्रा दिसव पर जमा देंगे रंग

Independence Day 2024 Hindi desh bhakti Song: स्‍वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर कोई देश भ‍क्ति के रंग में डूबा हुआ है। 15 अगस्‍त 2004 को पूरा देश आजादी की 78वीं वर्षगांठ का जश्‍न मना रहा है। स्‍कूल, कॉलेज ऑफिस समेत अन्‍य जगहों पर स्‍वंतत्रता दिवस पर कार्यक्रम आयो‍जित किए जा रहे हैं। अगर आप ऐसे कार्यक्रम में शिरकत करने जा रहे हैं तो देश भक्ति से भरे सदाबहार गीतों को गाकर आप कार्यक्रम में और रंग भर सकते हैं। ये ऐसे गीत हैं जिससे देशभक्ति और देशप्रेम की भावना और जाग उठेगी।

Independence Day 2024

छोड़ो कल की बातें...

छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी
नए दौर में लिखेंगे मिलकर नई कहानी
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी
आज पुरानी ज़ंजीरों को तोड़ चुके हैं
क्या देखें उस मंज़िल को जो छोड़ चुके हैं
चाँद के दर पे जा पहुँचा है आज ज़माना
नए जगत से हम भी नाता जोड़ चुके हैं
नया खून है, नई उमंगें
अब है नई जवानी, हम हिंदुस्तानी
छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी
नए दौर में लिखेंगे मिलकर नई कहानी
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी
आओ मेहनत को अपना ईमान बनाएँ
अपने हाथों को अपना भगवान बनाएँ
राम की इस धरती को, गौतम की भूमि को
सपनों से भी प्यारा हिंदुस्तान बनाएँ
नया खून है, नई उमंगें
अब है नई जवानी, हम हिंदुस्तानी
छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी
नए दौर में लिखेंगे मिलकर नई कहानी
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी
हर ज़र्रा है मोती, आँख उठाकर देखो
माटी में सोना है, हाथ बढ़ाकर देखो
सोने की ये गंगा है, चाँदी की यमुना
चाहो तो पत्थर से धान उगाकर देखो
नया खून है, नई उमंगें
अब है नई जवानी
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी
छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी
नए दौर में लिखेंगे मिलकर नई कहानी
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी
हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी

2

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं...

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम, वंदे मातरम
उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है
दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है
जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है
बाट-बाट में हाट-हाट में यहाँ निराला ठाठ है
देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती हैं बलिदान की
वंदे मातरम, वंदे मातरम
ये है अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे
इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे
ये प्रताप का वतन पला हैं आज़ादी के नारों पे
कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्मिनियाँ अंगारों पे
बोल रही है कण कण से कुरबानी राजस्थान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की वंदे मातरम
वंदे मातरम देखो मुल्क मराठों का यह
यहाँ शिवाजी डोला था मुग़लों की ताकत को
जिसने तलवारों पे तोला था हर पर्वत पे आग जली थी
हर पत्थर एक शोला था बोली हर-हर महादेव की
बच्चा-बच्चा बोला था शेर शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम, वंदे मातरम
जलियाँवाला बाग ये देखो यही चली थी गोलियाँ
ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियाँ
एक तरफ़ बंदूकें दन दन एक तरफ़ थी टोलियाँ
मरनेवाले बोल रहे थे इन्कलाब की बोलियाँ
यहाँ लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है
बलिदान की वंदे मातरम, वंदे मातरम
ये देखो बंगाल यहाँ का हर चप्पा हरियाला है
यहाँ का बच्चा-बच्चा अपने देश पे मरनेवाला है
ढाला है इसको बिजली ने भूचालों ने पाला है
मुट्ठी में तूफ़ान बंधा है और प्राण में ज्वाला है
जन्मभूमि है यही हमारे वीर सुभाष महान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम, वंदे मातरम

3

तेरी गलियों में चलाकर...

नफ़रतों की गोलियां
लूटते हैं कुछ लुटेरे दुल्हनों की डोलियां
लुट रहे हैं आप वो अपने घरों को लूट कर
खेलते हैं बेख़बर अपने लहू से होलियां
हम जिएंगे और मरेंगे ऐ वतन तेरे लिए
दिल दिया है
जां भी देंगे ऐ वतन तेरे

4 ऐ मेरे वतन के लोगों
तुम ख़ूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का
लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर
वीरों ने है प्राण गंवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो
जो लौट के घर न आये

4

ऐ मेरे वतन के लोगों...

ऐ मेरे वतन के लोगों
ज़रा आंख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो क़ुर्बानी

जब घायल हुआ हिमालय
ख़तरे में पड़ी आज़ादी
जब तक थी सांस लड़े वो
फिर अपनी लाश बिछा दी
संगीन पे धर कर माथा
सो गये अमर बलिदानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो क़ुर्बानी

जब देश में थी दीवाली
वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में
वो झेल रहे थे गोली
थे धन्य जवान वो आपने
थी धन्य वो उनकी जवानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो क़ुर्बानी

कोई सिख कोई जाट मराठा
कोई गुरखा कोई मदरासी
सरहद पर मरनेवाला
हर वीर था भारतवासी
जो खून गिरा पवर्अत पर
वो खून था हिंदुस्तानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो क़ुर्बानी

थी खून से लथ पथ काया
फिर बंदूक उठाके
दस दस को एक ने मारा
फिर गिर गये होश गंवा के
जब अन्त -समय आया तो
कह गये के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों
अब हम तो सफ़र करते हैं
क्या लोग थे वो दीवाने
क्या लोग थे वो अभिमानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो क़ुर्बानी

तुम भूल न जाओ उनको
इस लिये कही ये कहानी
जो शहीद हुए हैं उनकी
ज़रा याद करो क़ुर्बानी

जय हिंद...

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