Ishtiyak Khan: "मैं डरता था कि कहीं लोग मुझे राजपाल यादव का डुप्लीकेट ना समझ लें": एक्टर इश्तियाक खान
अक्सर देखा गया है कि लोगों में अपने छोटे कद काठी को लेकर बहुत हीन भावना भर जाती है। लेकिन यह सही नहीं है। छोटे कद वाले इंसान भी ऊंचा मुकाम हासिल कर सकते हैं। फिल्मी दुनिया में कई ऐसे हास्य कलाकार हैं। मुकरी से लेकर राजपाल यादव की कड़ी में एक और नाम है इश्तियाक खान। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले से आए इश्तियाक ने 15 साल के फिल्मी कैरियर में कई नामी कलाकारों के साथ काम किया है। अजय देवगन, शाहरूख खान, सलमान खान, रणबीर कपूर, अक्षय कुमार और शाहिद कपूर के साथ जो भी काम का अवसर मिला इश्तियाक ने उसमें अपनी छाप छोड़ने की कोशिश की।

वह खुद कहते हैं, "एक सहायक कलाकार के रूप में जो भी भूमिका मिली, उसमें मैंने अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है। मैं चाहता हूं कि मैं इश्तियाक खान के रूप में ही फिर से जन्म लूं।" अब वह एक्टर के साथ साथ डायरेक्टर भी बन गए हैं। उन्होंने शेक्सपीयर के नाटक ओथेलो पर आधारित एक फिल्म द्वंद्व में एक्टिंग के साथ साथ निर्देशन का भी काम किया है। पिछले दिनों वह इसी फिल्म के प्रीमियर पर नोएडा आए तो वनइंडिया ने उनसे बात की।
यह पूछे जाने पर कि कम हाइट के फिल्मी कलाकारों के लिए कितना स्कोप है और उनकी प्रतिद्वंद्विता क्या राजपाल यादव से है, तो इश्तियाक खान ने थोड़ा ठहर कर जवाब दिया - "सच कहूं तो मै राजपाल यादव का बड़ा सम्मान करता हूं। वह एक मंजे हुए कलाकार हैं। 2006 में जब मैं फिल्म इंडस्ट्री में आया तो मुझे वही काम मिलता था जो राजपाल यादव जी डेट नहीं होने के कारण कर नहीं पाते थे। मैं डर गया था कि कहीं लोग मुझे राजपाल का डुप्लीकेट ना बना दें। लेकिन खुदा का शुक्र है कि मैं अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहा। वरना मैं बहुत निराश होता। अब मुझे मेरे काम से जाना जाता है।"
- तो क्या आप फिल्म इंडस्ट्री में अपने अब तक के सफर से खुश हैं?
इस प्रश्न पर थोड़ा सकुचाते हुए वह कहते हैं, "कह सकते हैं कि मैं मुंबई में जम गया हूं। घर आदि भी ले लिया है। हाथ में काम भी है। अभी अजय देवगन के साथ मैदान फिल्म कर रहा हूं। मिशन रानीगंज भी आने वाली है। कई वेब सीरिज भी कर रहा हूं। इसके पहले सलमान खान के साथ भारत कर चुका हूं। अक्षय कुमार के साथ तीसमारखां भी की थी।"
- जब फिल्में मिल रहीं हैं तो नाटक और फिल्मों का निर्देशन क्यों?
"स्वांतः सुखाय। मैं कहानियां लिखता हूं, नाटक लिखता हूं। ओथेलो नाटक का कम से कम 20 बार मंचन कर चुका हूं। पंकज त्रिपाठी भी इस नाटक में हैं। जब विकास वशिष्ठ ने इस नाटक को देखा और फिल्म के फाइनेंस के लिए तैयार हो गए तो हमने फिल्म का निर्माण कर डाला। चूंकि पंकज त्रिपाठी के पास समय नहीं था तो संजय मिश्र जी से अनुरोध किया और वे इसके लिए तैयार हो गए।"
- तो क्या कभी डायरेक्शन का काम पहले किया?
"नहीं। लेकिन जब आप लगातार फिल्में कर रहे होते हैं और अलग अलग डायरेक्टर के साथ काम करते हैं तो आप को अंदाज हो जाता है कि डायरेक्टर क्या चाहता है। एक्टिंग के दौरान ही मैंने कई बार फिल्म डायरेक्टर के प्वायंट ऑफ व्यू को समझने की कोशिश की और अपना इनपुट भी दिया। हां जब आप केवल एक्टिंग कर रहे होते हैं तो नाव में बैठी कई सवारियों में से एक होते हैं परंतु जब आप डायरेक्टर होते हैं तो फिर नाव चला रहे होते हैं। उस नाव को किनारे पहुंचाने की जिम्मेदारी आपकी ही होती है।"
- द्वंद्व फिल्म में आप क्या दिखाना चाहते हैं?
"यह फिल्म दरअसल शेक्सपीयर के नाटक पर आधारित है। इसी नाटक ओथेलो को आधार बनाकर विशाल भारद्वाज ने ओंकारा बनाई थी। हमारी फिल्म के पात्र ओंकारा फिल्म से बहुत प्रभावित हैं। वे भी ऐसी ही एक फिल्म बनाना चाहते हैं, लेकिन चूंकि फिल्म बनाने में बहुत पैसा लगता है इसलिए गांव वालों ने मिलकर नाटक करने का मन बनाया। नाटक के निर्देशन के लिए दूर से गुरूजी (संजय मिश्रा) को बुलाया जाता है, लेकिन नाटक में मुख्यपात्र का किरदार नहीं मिलने के कारण भोला (इश्तियाक खान) प्रतिशोध से भर जाता है और वह गुरूजी पर लांछन लगा कर उन्हें भगा देता है। लेकिन गांव वाले फिर भी नाटक का मंचन करते हैं और अंत में गुरूजी भी सामने आ जाते हैं और सच्चाई भी सामने आने के बाद सब मिलकर भोला को माफ़ कर देते हैं। फिल्म का उद्देश्य ही यही बताना है कि कई बार आदमी अपने आप को ज्यादा आंक कर गलत हरकत कर बैठता है लेकिन अच्छे लोग माफ कर देते हैं।"
द्वंद फिल्म में इश्तियाक खान और संजय मिश्र के अलावा इप्सिता मुखर्जी भी हैं। यह फिल्म 30 दिन की शूटिंग में तैयार हो गई और इसे झारखंड में फिल्माया गया।












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