Birthday Special: अन्ना के 'अर्जुन' केजरीवाल कैसे बने दिल्ली के सरताज
बैंगलुरू। आज दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का 47वां जन्मदिन है। आम आदमी की आवाज बनकर दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने वाले अरविंद केजरीवाल की लाइफ किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
सही में बहुत सवाल करती है लालू-केजरीवाल की यह तस्वीर..
आईये उनके जन्मदिन पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातों पर एक नजर डालते हैं..
लोकपाल बिल की मांग को लेकर अहिंसावादी अन्ना हजारे के आंदोलन के जरिये लोगों के दिलों में जगह बनाने वाले अरविंद केजरीवाल को कभी अन्ना का 'अर्जुन' कहा जाता था। आईआईटी खडगपुर से बीटेक की पढ़ाई करने वाले अरविंद केजरीवाल का जन्म 16 अगस्त 1968 में हरियाणा के हिसार शहर में हुआ था।
जीत गया अन्ना का अर्जुन..दिया गुरू ने आशीष
तर्क शक्ति में अव्वल और भ्रष्टाचार को देश से दूर भगाने की कसम खाने वाले अरविंद केजरीवाल के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे की स्लाइडों पर क्लिक कीजिये..

सोनीपत और मथुरा
केजरीवाल की प्राथिमक पढ़ाई सोनीपत और यूपी के मथुरा शहर में हुई है।

प्रेम-विवाह
केजरीवाल ने अपनी सहपाठिनी सुनीता से प्रेम विवाह किया है और उन्हें शादी से दो बच्चे हैं।

IIT खडगपुर से पढ़ाई
1985 में अपनी 12वीं पढ़ाई पूरी करने के बाद केजरीवाल ने पहले अटेंप्ट में आईआईटी का एग्जाम पास किया था और आईआईटी खडगपुर में मैकनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए प्रवेश पाया था।

टाटा स्टील में काम किया
आईआईटी से बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद केजरीवाल ने अपना प्रोफेशनल करियर टाटा स्टील से शुरू किया था जहां इन्होंने चार साल ( 1989-1992) तक काम किया।

मदर टरेसा, रामकृष्ण मिशन और नेहरू युवा केंद्र
लेकिन नौकरी रास नहीं आने के कारण इन्होंने नौकरी छोड़ दी और इसी दौरान सिविल सर्विस का एग्जाम दिया लेकिन जब तक इनका रिजल्ट नहीं आया इन्होंने मदर टरेसा, रामकृष्ण मिशन और नेहरू युवा केंद्र के लिए काम किया और यहीं से इनकी सोच में बड़ा परिवर्तन हुआ।

'परिवर्तन'
केजरीवाल इसके बाद आईआरएस के लिए सेल्क्ट हुए लेकिन इसी दौरान इन्हें पता चला कि देश में भ्रष्टाचार अपने पूरे शबाब पर है इसलिए इन्होंने 'परिवर्तन' नाम के एनजीओ की स्थापना की जिसमें 18 महीने में 800 मुकदमे का निपटारा किया गया जो कि अपने आप में ही एक रिकार्ड है।

सूचना अधिकार अधिनियम
फरवरी 2006 में केजरीवाल ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और पूरे समय के लिए सिर्फ 'परिवर्तन' में ही काम करने लगे। अरुणा रॉय, गोरे लाल मनीषी और कई अन्य लोगों के साथ मिलकर, उन्होंने सूचना अधिकार अधिनियम के लिए अभियान शुरू किया।

आरटीआई पुरस्कार (आरटीआई)
दिल्ली में सूचना अधिकार अधिनियम को 2001 में पारित किया गयाऔर अंत में राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संसद ने 2005 में सूचना अधिकार अधिनियम (आरटीआई) को पारित कर दिया। जो कि केजरीवाल के करियर का अहम कड़ी है।

आरटीआई पुरस्कार
जुलाई 2006 में केजरीवाल ने पूरे भारत में आरटीआई के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक अभियान चलाया जिसमें अरविन्द ने अब अपने संस्थान के माध्यम से एक आरटीआई पुरस्कार की शुरुआत की।

अरविंद केजरीवाल
6 फरवरी 2007 को, अरविंद केजरीवाल को 2006 के लिए लोक सेवा में सीएनएन आईबीएन 'इस वर्ष का भारतीय' के लिए नामित किया गया। अरविंद ने सूचना अधिकार अधिनियम को स्पष्ट करते हुए गूगल पर भाषण दिया। इन्हें उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए रमन मेगसेसे अवार्ड से भी नवाजा गया।

अन्ना के अर्जुन केजरीवाल
लेकिन केजरीवाल पूरे देश में तब लोकप्रिय हुए जब इन्होंने अन्ना हजारे के साथ जनलोकपाल बिल आंदोलन में भाग लिया। लेकिन इन्हें जल्द ही समझ आ गया कि एक आंदोलन कारी देश को नहीं बदल सकता जिसके कारण इन्होंने राजनीति में उतरने का मन बना लिया और यहां से इनका और अन्ना का साथ छूट गया।

कांग्रेस के तिलिस्म को तोड़ा
26 नवम्बर 2012 को केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी का गठन किया और साल 2013 में केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ा और 28 सीट जीतकर 15 साल से चली आ रही दिल्ली में कांग्रेस की सत्ता और तीन बार की सीएम शीला दीक्षित के सिंहासन को हिलाकर रख दिया। उन्होंने नई दिल्ली विधानसभा सीट से तीन बार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को 25864 मतों से हराया।

और मात्र 49 दिनों बाद ही इस्तीफा
लेकिन अल्पमत में होने के कारण आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की सरकार दिल्ली में बनी और केजरीवाल सीएम लेकिन ये सरकार चल नहीं पायी और मात्र 49 दिनों बाद ही केजरीवाल ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया।

14 फरवरी 2015 को दोबारा सीएम बने
साल भर के राष्ट्रपति शासन के बाद फरवरी 2015 के चुनावों में उनकी पार्टी ने भारी बहुमत हासिल किया तथा 14 फरवरी 2015 को वे दोबारा दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए।












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