Happy Birthday Amitabh Bachchan: हरिवंश राय ने बेटे का नाम रखा था इंकलाब, फिर कैसे पड़ा अमिताभ नाम?
Amitabh Bachchan: आज सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने जीवन के अस्सी बरस पूरे कर लिए हैं। अमिताभ बच्चन केवल फिल्मी दुनिया के बड़े सितारे नहीं हैं बल्कि अमिताभ का व्यक्तित्व बहुत सारे रूपों से मिलकर बना है। वो बेहतरहीन एक्टर, बेस्ट होस्ट, मधुर गायक और विलक्षण प्रतिभा के धनी इंसान हैं, जो निजी लाइफ में एक शालीन व्यक्ति और समर्पित पति और पिता हैं और शायद यही वजह उन्हें और फिल्मी सितारों से अलग करती है। बच्चन फैमिली केवल बॉलीवुड की ही नहीं बल्कि पूरे भारत में एक आदर्श फैमिली के रूप में जानी जाती है।

आदर्श और संस्कार
लेकिन ये केवल आज से नहीं हुआ है बल्कि जो आदर्श और संस्कार का निर्वहन आज बच्चन परिवार कर रहा है उसके बीज तो अमिताभ बच्चन के बाबूजी यानी कि हरिवंश राय बच्चन ने बोए थे। जिन्होंने अपने काव्य विचारों से अमिताभ को सींचा था।

हरिवंश राय ने अपने बेटे का नाम रखा था 'इंकलाब'
क्या आप जानते हैं कि अमिताभ बच्चन का जन्म से नाम अमिताभ नहीं था। जब उन्होंने जन्म लिया था तो उनके पिता हरिवंश राय बच्चन ने अपने बेटे का नाम 'इंकलाब' रखा था। जिसका अर्थ होता है 'क्रांति', उन्हें शायद लगता हो कि इस बेटे के बाद उनके घर में नई क्रांति का प्रवेश होगा।

सुमित्रानंदन पंत
हरिवंश राय देश के प्रख्यात कवियों में से एक थे इसलिए उनके घर में कवियों की बैठकी हुआ करती थी। नामचीन कवियों का उनके घर आना-जाना लगा रहता था और इसी दौरान हरिवशं राय बच्चन से मिलने एक बार हिंदी भाषा के लोकप्रिय कवियों में से एक सुमित्रानंदन पंत पधारे। अमिताभ उस वक्त काफी छोटे थे। उनके नन्हें कदमों और दुलार भरी हरकतों ने पंत का मन मोह लिया, उन्होंने अमिताभ को गोद में बिठाया और बड़े ही प्यार से पूछा- बेटा आपका नाम क्या है?

'ये इंकलाब नहीं अमिताभ है'
नन्हे अमिताभ ने जवाब दिया-'इंकलाब'। पंत ने तुरंत हरिवंश राय की ओर देखा और बोला कि 'ये बच्चा बहुत अलग है, इसकी आभा अद्भुत है ये इंकलाब नहीं अमिताभ है।' जिसे सुनने के बाद हरिवंश राय और उनकी पत्नी तेजी बच्चन एकदम से हैरान रह गए और उन्होंने अपने मित्र की बात मानकर अपने बड़े बेटे का नाम अमिताभ रख दिया।
असीम आनंद वाला ,आभाशाली और तेजस्वी
उस वक्त कोई नहीं जानता था कि ये बेटा अपने नाम के अनुरूप ही असीम आनंद वाला ,आभाशाली और तेजस्वी बनेगा और दौलत-शौहरत की उस बुलंदी पर पहुंचेगा, जहां तक पहुंचना हर किसी को नसीब नहीं होता।

'तखल्लुस' बच्चन को अपना सरनेम रख लिया
आपको बता दें कि हरिवंश राय बच्चन जाति से कायस्थ थे लेकिन उन्हें ये जाति वगैरह पसंद नहीं थी इसलिए अन्य कवियों की तरह उन्होंने अपने 'तखल्लुस' बच्चन को अपना सरनेम रख लिया इसलिए अमिताभ भी बच्चन सरनेम लगाते हैं, जो कि उनकी जाति नहीं बल्कि उनके पिता के तप, कष्ट और संघर्ष की कहानी बयां करता है।

'इंसान वो ही सही जो जाति से नहीं बल्कि काम से पहचाना जाए'
उन्होंने अपने उपनाम को सरनेम बना लिया था और अमिताभ ने उसे अपने साथ आगे कैरी किया। एक बार अपने ब्लॉग में खुद अमिताभ ने इस बात का जिक्र किया था कि 'बाबूजी अक्सर कहते थे इंसान वो ही सही जो जाति से नहीं बल्कि काम से पहचाना जाए' और इसलिए उन्होंने ' बच्चन' सरनेम लगाया था। ताकि दुनिया उन्हें उनके काम से पहचाने और इस बात के लिए मुझे उन पर गर्व है।












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