Flex Fuel Car: किन देशों में चलती हैं इथेनॉल से गाड़ियां? इसे क्यों माना जाता है पेट्रोल-डीजल का विकल्प?
केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने दुनिया की पहली इलेक्ट्रिक फ्लेक्स टेक्नोलॉजी वाली हाइब्रिड कार टोयोटा इनोवा का प्रोटोटाइप पेश किया है। यह कार फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी वाले इंजन पर काम करती है, जिसमें 40 प्रतिशत पावर इथेनॉल के जरिए, जबकि 60 प्रतिशत पावर इलेक्ट्रिक के जरिए जनरेट होती है।
इस कार के इंजन को जापान की कंपनी टोयोटा मोटर्स और भारत की क्रिलोस्कर ने मिलकर डिजाइन किया है। इसमें 2.0 लीटर का फ्लेक्स-फ्यूल हाइब्रिड इंजन लगा है, जो ईंधन में 100 प्रतिशत (93 प्रतिशत) तक इथेनॉल की मात्रा को सपोर्ट कर सकता है।

इनोवा की यह प्रोटोटाइप कार पूरी तरह से स्वच्छ इंजन से चलेगी। हालांकि, फ्लेक्स फ्यूल की वजह से कार के माइलेज में कमी आएगी, जिसकी भरपाई करने के लिए इसमें हाइब्रिड इलेक्ट्रिक का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रोटोटाइप कार होने की वजह से इसके बारे में ज्यादा जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट्स की मानें तो यह दुनिया की पहली कार है, जिसमें ओल्ड स्टार्ट सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। इसकी वजह से यह कार माइनस 15 डिग्री सेंटिग्रेट तापमान में भी स्टार्ट हो जाएगी। इथेनॉल ईंधन की एक खामी है कि यह ज्यादा मात्रा में पानी एब्जॉर्व करता है, जिसकी वजह से गाड़ियों के इंजन में मौजूद कंपोनेंट में जंग लगने का खतरा रहता है, जिसकी वजह से इनोवा की इस कार मे इस्तेमाल किए गए पुर्जे जंग रोधक हैं यानी इनमें जंग नहीं लगेगा।
क्या है फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी?
फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी वाले इंजन में पेट्रोल एवं अन्य पेट्रोलियम वाले ईंधन या गेसोलीन के साथ इथेनॉल मिलाया जाता है। भारत में बनने वाली गाड़ियों के इंजन में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जा सकता है। जिसे E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग भी कहा जाता है। फिलहाल ब्राजील में इथेनॉल ब्लेंडिंग का एवरेज 48 प्रतिशत तक है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। भारत में कार बनाने वाली कई कंपनियां E20 फ्यूल ब्लेंडिंग कम्पैटिबिलिटी यानी फ्लेक्स फ्यूल कम्पैटिबलिटी ऑफर कर रही है। देश के 3,300 पेट्रोल पंप पर E20 फ्यूल उपलब्ध है। पिछले 9 साल में भारत में इथेनॉल मिक्स (पेट्रोल) की खपत 1.53 प्रतिशत से बढ़कर 11.5 प्रतिशत तक हो गई है।
क्या है इथेनॉल?
इथेनॉल पर्यावरण के लिए एक तरह का स्वच्छ ईंधन है, जिसे एग्रीकल्चरल वेस्ट यानी मक्के, गन्ने, जौ आदि के छिलकों से बनाया जा सकता है। इस ईंधन को तैयार करने में पेट्रोल-डीजल के मुकाबले कम लागत लगती है। सरकार ज्यादा मात्रा में इथेनॉल से बने ईंधन का इस्तेमाल पेट्रोल और डीजल के विकल्प के तौर पर करना चाहती है। इसकी वजह से वातावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है और प्रदूषण को कम किया जा सकता है। यही नहीं, इसकी वजह से लोगों की निर्भरता पेट्रोल-डीजल पर कम होगी और आयात पर खर्च कम किया जा सकेगा।
नितिन गडकरी ने टोयोटा क्रिलोस्कर की इस कार के प्रोटोटाइप को पेश करते हुए कहा कि भारत में इथेनॉल के प्रोडक्शन की बड़ी संभावनाएं हैं। पेड़-पौधों से निकलने वाले वेस्ट यानी पराली को इथेनॉल में बदला जा सकता है। उत्तर भारत में इन्हें जलाने से भारी मात्रा में प्रदूषण फैलता है। इथेनॉल की खास बात यह है कि इसमें पेट्रोल-डीजल के मुकाबले ज्यादा ऑक्टेन होता है, जो कार की इंजन को ज्यादा पावर प्रदान करता है। साथ ही इसकी परफॉर्मेंस को बेहतर बनाता है। हालांकि, फ्लेक्स फ्यूल यानी इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों की फ्यूल इफिशिएंसी पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियों से कम होती है।
ब्राजील में सबसे ज्यादा इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां
दुनिया के कई देशों में पेट्रोलियम की निर्भरता को खत्म करने के लिए इथेनॉल को वैकल्पिक ईंधन के तौर पर देखा जाता है। फिलहाल दुनिया के कई देशों में 2G यानी सेकेंड जेनरेशन की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इथेनॉल बनाया जाता है। यह टेक्नोलॉजी सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक मटीरियल जैसे कि चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, भुट्टे, बांस और बायोमास को इथेनॉल में बदल सकती है। इस बायोफ्यूल को तैयार करके सरकार किसानों की आय को दोगुनी कर सकती है। बायोफ्यूल की मांग बढ़ने से एग्रीकल्चरल वेस्ट को बायोफ्यूल में बदला जा सकेगा।
ब्राजील दुनिया का इकलौता देश है, जहां बड़ी मात्रा में बायोफ्यूल (इथेनॉल) का इस्तेमाल होता है। ब्राजील की 93 प्रतिशत गाड़ियां फ्लेक्स फ्यूल टेक्नोलॉजी पर चलती हैं। ब्राजील को तेल के लिए अरब देशों, रूस या अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है। यहां 100 में से 75 गाड़ियां ऐसी बनाई जाती हैं, जिनमें फ्लेक्स फ्यूल ईंधन का इस्तेमाल किया जा सकता है। 2030 तक ब्राजील के कुल तेल की डिमांड की 72 प्रतिशत भरपाई बायोफ्यूल से पूरी होगी।
बायोफ्यूल इस्तेमाल करने वाले देशों में ब्राजील के अलावा अमेरिका, कनाडा, इंडोनेशिया और भारत का नाम शामिल हैं। ये देश दुनिया के 80 प्रतिशत बायोफ्यूल की खपत करते हैं। आने वाले दिनों में भारत में भी बायोफ्यूल के प्रोडक्शन पर जोर दिया जाएगा। फिलहाल इथेनॉल के प्रोडक्शन में अमेरिका नंबर वन बना हुआ है।
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