China Border Dispute: चीन का भारत सहित इन 19 देशों से हैं जमीनी और समुद्री सीमा विवाद
चीन की विस्तारवादी नीति के कारण उसका अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ कोई न कोई सीमा विवाद पैदा हो गया है।

दुनिया के नक्शे पर चीन एक ऐसा देश है, जो हमेशा अपने पड़ोसी मुल्कों की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर सबसे ज्यादा विवादों में रहता है। अभी हाल ही में चीन ने 2 अप्रैल 2023 को अरुणाचल प्रदेश के 11 स्थानों के नाम बदलकर नये नामों की घोषणा कर दी। इसमें दो भूमि क्षेत्र, दो रिहायशी इलाके, दो नदियों और पांच पर्वतीय चोटियां शामिल हैं। चीन ने तिब्बती और पिनयिन समेत तीन भाषाओं में अरुणाचल प्रदेश के नये नामों की लिस्ट जारी की है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन की इस लिस्ट को खारिज कर दिया है। वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है कि हम इन नामों को सिरे से खारिज करते हैं। अरुणाचल प्रदेश भारत का आतंरिक हिस्सा था, हिस्सा है और रहेगा। इस तरह से नाम बदलने से हकीकत नहीं बदलेगी। बता दें कि चीन ने पिछले 5 साल में तीसरी बार ऐसा किया है। इसके पहले 2021 में चीन ने 15 जगहों और 2017 में 6 जगहों के नाम बदले थे।
वैसे भारत दुनिया में इकलौता देश नहीं है, जिसके साथ चीन का सीमा या क्षेत्र विवाद है। चीन का उसके लगभग सभी पड़ोसी देशों के साथ सीमा या क्षेत्र विवाद है। चाहे वो जमीन हो या पानी सभी जगह चीन का कुछ न कुछ विवाद है ही। आईये, जानते हैं कौन-कौन से हैं वे देश।
भारत के साथ जमीनी विवाद
चीन के साथ भारत की 3,488 किमी लंबी सीमा लगती है। चीन अरुणाचल प्रदेश के 90 हजार वर्ग किमी पर अपना दावा करता है। जबकि लद्दाख में 38 हजार वर्ग किमी की जमीन पर चीन ने 1962 से कब्जा कर रखा है। वहीं 2 मार्च 1963 को पाकिस्तान ने कब्जा किये हुए कश्मीर की 5,180 वर्ग किमी जमीन चीन को दे दी थी। इस लिहाज से चीन ने भारत की कुल 43 हजार 180 वर्ग किमी जमीन पर कब्जा कर रखा है। अरुणाचल प्रदेश को वह दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा मानते हुए बार-बार विवाद बढ़ाता रहता है।
पूर्वी तुर्किस्तान पर कब्जा
चीन ने 1949 में पूर्वी तुर्किस्तान पर कब्जा किया था। तकरीबन 16 लाख वर्ग किमी में फैले इस क्षेत्र को चीन शिनजियांग प्रांत बताता है। इसी इलाके में उइगर मुस्लिमों की आबादी निवास करती है।
तिब्बत का पतन
चीन ने 23 मई 1950 को तिब्बत पर हमला कर, उस पर कब्जा कर लिया। तकरीबन 12 लाख वर्ग किमी में फैले इस देश में बौद्ध धर्म के मानने वाले बहुलता में हैं। चीनी हमलों से बचकर बौद्ध धर्मगुरू दलाई लामा ने तिब्बत की राजधानी ल्हासा से भागकर 1959 में भारत में शरण ली थी।
दक्षिणी मंगोलिया या इनर मंगोलिया भी कब्जे में
तकरीबन 12 लाख वर्ग किमी में फैले इस क्षेत्र पर चीन ने साल 1945 में हमला कर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 1947 में चीन ने इसे स्वायत्त घोषित कर चीन में मिला लिया।
हांगकांग भी बना शिकार
हांगकांग पर 1997 तक अंग्रेजों (ब्रिटेन) का शासन था। ब्रिटेन के जाने के बाद चीन ने जबरन 'वन कंट्री, टू सिस्टम' समझौते के तहत इस पर कब्जा कर लिया। जिसके तहत चीन ने हॉगकॉग को 50 सालों तक राजनैतिक आजादी दी, जो सिर्फ कागजों तक ही सीमित है।
मकाऊ भी झटक लिया
लगभग 115 वर्ग किमी फैले इस क्षेत्र पर सैंकड़ों सालों से पुर्तगाल का कब्जा था। दिसंबर 1999 में पुर्तगाली यहां से चले गये और चीन ने इस पर भी हांगकांग की तरह 50 साल तक राजनैतिक आजादी का लॉलीपॉप देकर कब्जा कर लिया।
ताइवान को लेकर टकरार
लगभग 36 हजार वर्ग किमी में फैले इस देश को चीन 'वन चाइना पॉलिसी' के तहत अलग राष्ट्र नहीं अपना क्षेत्र बताता है लेकिन ताइवान ने कभी भी चीन को मान्यता नहीं दी।
फिलिपींस से द्वीपों को लेकर विवाद
दक्षिणी चीन सागर में स्थित स्कारबोरो और स्प्रेटली द्वीप को लेकर चीन और फिलिपींस में विवाद है। 'द गार्जियन' की रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2021 में चीन के जहाजों ने फिलिपींस के दो जहाजों पर वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया था।
वियतनाम भी निशाने पर
चीन का वियतनाम से विवाद यह है कि वह वियतनाम के कुछ इलाके पैरासल द्वीप, स्प्रैटली द्वीप और दक्षिणी चीन सागर के कुछ हिस्से पर दावा ठोकता है। इसी क्रम में अप्रैल 2020 में चीनी सेना ने वियतनाम के मछली पकड़ने वाले एक जहाज को भी डूबा दिया था।
मलेशिया से समुद्री सीमा विवाद
चीन का मलेशिया के साथ दक्षिणी चीन सागर के हिस्से को लेकर विवाद है। 2020 में ही स्प्रेटली द्वीप (विवादित) के पास चीन की नौसेना ने एक मलेशियाई जहाज को घेर लिया था। तब अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के जंगी जहाज को बीच में आना पड़ा था।
इंडोनेशिया से भी पंगा
चीन का इंडोनेशिया से दक्षिणी चीन सागर के कुछ हिस्सों और नातुना द्वीप को लेकर विवाद है। चीन का कहना है कि यह क्षेत्र उसका है जबकि वहां इंडोनेशिया का अधिकार है।
सिंगापुर भी परेशान
चीन और सिंगापुर के बीच भी दक्षिणी चीन सागर के कुछ हिस्से को लेकर विवाद है।
ब्रूनेई का भी वही हाल
ब्रूनेई जैसे छोटे देश से भी चीन का विवाद है। ब्रूनेई से दक्षिणी चीन सागर के कुछ हिस्सों और स्प्रेटली द्वीप को लेकर विवाद है। यहां आपको बता दें कि स्प्रेटली द्वीप को लेकर चीन का लगभग सभी देशों से विवाद है क्योंकि इसके 19 टापू हैं। जो ब्रूनेई, मलेशिया, फिलिपींस, ताइवान और वियतनाम के कब्जे में है। वहीं चीन पूरे द्वीप पर दावा ठोकता है।
जापान की जमीनों पर भी दावा
जापान के साथ भी चीन का विवाद है। चीन, जापान के सेनकाकू द्वीप के आसपास के द्वीपों पर अपना हिस्सा बताता है। दरअसल 1970 के दशक में जब इन द्वीपों में तेल होने की बात सामने आई तब से चीन इस पर अपना दावा ठोकता है।
दक्षिण कोरिया से झगड़ा
सोकोट्रा रॉक द्वीप को लेकर चीन और दक्षिण कोरिया के बीच समंदर में विवाद है। दक्षिण कोरिया का यह इकोनॉमिक जोन है। जबकि चीन जब तब इस इलाके में मौजूदगी दर्ज कर तनाव बढ़ा देता है।
नॉर्थ कोरिया से भी टकराव
यालू नदी पर बने 205 आइलैंड को लेकर चीन का उत्तर कोरिया से भी विवाद है। वैसे 1962 में दोनों देशों ने समझौता किया था। उसके अनुसार 127 द्वीप नॉर्थ कोरिया के हैं, जबकि 78 चीन के हैं। जबकि नॉर्थ कोरिया कहता है कि चीन ने अब भी उसके कुछ द्वीपों पर कब्जा कर रखा है।
नेपाल की भी चिंता बढ़ी
चीन द्वारा कब्जाये हुए तिब्बत से नेपाल 1,439 किलोमीटर लंबी सीमा को साझा करता है। लेकिन, चीन का यहां दावा है कि नेपाल के कई इलाके तिब्बत का हिस्सा हैं। बीते साल ही एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चीन, नेपाल के इलाकों पर अतिक्रमण कर रहा है।
भूटान की शांति में भी खलल
भूटान 477 किलोमीटर लंबी सीमा चीन के साथ साझा करता है। वहीं चीन भूटान के चेरकिप गोम्पा, धो, डुंगमार और गेसुर जैसे इलाकों पर अपना दावा करता है।
लाओस की मुसीबत बना चीन
चीन के साथ लाओस 500 किमी लंबी सीमा साझा करता है। ताइवान की तरह चीन इस छोटे से देश पर भी अपना हक जताता है और लाओस को अपना हिस्सा बताता है।












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