iPhone: "मेड इन इंडिया" आईफोन पर बौखलाया चीन, कर दी 'गंदी बात'
चीन कभी भी भारत की सफलता से खुश नहीं होता। जब 'मेड इन इंडिया' आईफोन को लोकप्रियता मिलने लगी तो बीजिंग को ईर्ष्या होने लगी। चीनी सोशल मीडिया भारतीय आईफ़ोन पर कटाक्ष से भर गया। कारण चौंकाने वाला नहीं है, क्योंकि एप्पल चीन से अपनी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी उठा कर भारत लाया है। चीनी लोग इसे व्यापारिक प्रतिस्पर्धा बनाने के बजाय ईष्या और नफरत का रंग दे रहे हैं।

आईफ़ोन 15 की श्रृंखला चीन के लिए भारत के खिलाफ नस्लवाद का कारण बन गई है। चीन यह अफवाह फ़ैलाने में लगा है कि "मेड इन चाइना" आईफोन अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में बेचे जाएंगे, जबकि भारतीय आईफोन चीनी बाजारों के लिए रखे गए हैं। इस अफवाह के साथ चीन के सोशल मीडिया पर यह अभियान चलाया जा रहा है कि भारत में बनने वाले आई फ़ोन से ग्राहक सावधान रहें। इसके साथ ही भारत के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी भी की जा रही है।
चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर किसी ने लिखा है, ''शुरुआती रिलीज काफी अजीब लगती है। सबसे पहले, आइए पैकेजिंग को फाड़ें और करी की सुगंध का स्वाद लें, भारत में यह ठीक है, यह साफ़ और स्वच्छ है, दोस्तों।" खुद एक चीनी पत्रकार वेन्हाओ ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा है - 'चीनी प्लेटफॉर्म मेड-इन-इंडिया आई फोन 15 के बारे में गलत सूचना, अवमानना और नस्लवादी चुटकुलों से भारत को निशाना बना रहे हैं।
खुद एप्पल ने इन दावों का खंडन किया है कि "मेड इन इंडिया" आईफोन चीनी बाजारों के लिए आरक्षित हैं और "मेड इन चाइना" आईफोन अमेरिका और यूरोप के लिए। माइक्रोब्लॉगिंग साइट वीबो, जिस पर लाखों चीनी फ़ॉलोअर्स हैं, पर भारत के खिलाफ इस तरह की नस्लीय टिप्पणी के स्क्रीनशॉट को साझा करते हुए एप्पल ने लिखा कि यह अनुचित है।
चीन के लोग पहले भी भारत के खिलाफ इस तरह की अनैतिक बातें सोशल मीडिया पर लिख चुके हैं। कोरोना वायरस के समय भी भारत द्वारा विनाशकारी दूसरी लहर से निपटने के लिए संघर्ष का मजाक चीन ने उड़ाया था। बाद में खुद चीन दुनिया के लिए हंसी का पात्र बन गया।
उल्लेखनीय है कि 2 सितंबर को, आई फोन 15, आई फोन 15 प्लस, और आई फोन 15 प्रो के साथ 15 प्रो मैक्स सहित आई फोन 15 की श्रृंखला भारत और अन्य देशों में जारी की गई थी। पहली बार, क्यूपर्टिनो-आधारित कंपनी एप्पल ने भारत में निर्मित आई फोन 15 मॉडल की वैश्विक बिक्री शुरू की थी और पहले दिन भारत समेत दुनिया भर में अपने ग्राहकों के लिए इन्हें एक साथ उपलब्ध कराया था।
चीन नहीं चाहता था कि एप्पल अपनी कोई निर्माण इकाई भारत में लगाए। एप्पल को भी झटका देने के लिए यह खबर प्रकशित करवाई गई कि चीन का कोई भी अधिकारी अब एप्पल फ़ोन का इस्तेमाल नहीं करेगा। 7-8 सितंबर को एपीएल इंक के शेयर केवल दो दिनों में 200 अरब डॉलर के नीचे आ गए जब यह खबर आई कि चीन ने अपने सभी अधिकारियों पर आईफ़ोन के उपयोग पर पाबंदी लगा दी है।
पिछले कई वर्षों से एप्पल चीन में आईफ़ोन और आईपैड का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहा है। इसके लिए चीन में एक विशाल विनिर्माण नेटवर्क स्थापित किया गया। लेकिन कोविड के दौरान बीजिंग की सख्त जीरो टोलेरेंस की रणनीति के बाद एप्पल ने वहां से कहीं और भी यूनिट लगाने का निर्णय कर लिया था और उसी निर्णय के तहत भारत में उसका निवेश बहुत बढ़ गया है।
बहरहाल एप्पल इंक भारत में कारोबार करने की प्रति आश्वस्त है। कंपनी अगले 4 से 5 वर्षों में भारत में अपनी उत्पादन क्षमता को पांच गुना से अधिक बढ़ाकर लगभग 40 अरब डॉलर (लगभग 3.32 लाख करोड़) करने की योजना पर काम कर रही है। कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में 7 अरब डॉलर के उत्पादन का आंकड़ा पार कर लिया है। एप्पल पहले से ही भारत में आईफोन का निर्माण कर रही है और अगले साल से एयर पॉड्स का भी निर्माण शुरू करने की योजना है।












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