375 साल का हुआ चेन्नई, यहां कि इन बातों से है हमें प्यार
बेंगलौर। आज चेन्नई 375 वर्ष का हो गया है। आज 'डेट्रॉयट ऑफ इंडिया' माने जाना वाला यह शहर भारत के सबसे प्राचीन शहरों में से एक है। चेन्नई की प्राचीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मॉडर्न होते हुए भी यह कोलकाता से 50 साल, जबकि मुंबई से 35 वर्ष पुराना है।
फिल्मों में चेन्नई की झलक तो हम सबने देख ही ली लेकिन चेन्नई की विविधता का अंदाजा वहां जाकर ही लगाया जा सकता है। चेन्नई सभ्यता और संस्कृति के मामले में बहुत समृद्ध माना जाता है। वहीं, यहां कि कई बातें पर्यटकों को खासा आकर्षित करती है। मरीना बीच की ढ़लती शाम हो या भरतनाट्यम, यहां का सबकुछ मनमोहक है।
लिहाजा, चेन्नई की 375वें बर्थडे पर देखते हैं कि यहां कि किन बातों से हमें प्यार।

खूबसूरत समुद्री किनारा
चेन्नई की मरीना बीच पर्यटकों की पसंदीदा जगह है। साथ ही यह भारत का सबसे लंबा समुद्री किनारों में से एक है। यहां की चमकीली रेत और साफ वातावरण इसे पर्यटकों की पहली पसंद बनाती है। बड़ी संख्या में लोग यहां मॉर्निंग और इवनिंग वॉक करने आते हैं।

रजनीकांत का नशा
रजनीकांत का नशा यहां देखते ही बनता है। यहां के लोग उनकी स्टाइल, डॉयलोग, स्टंट के दिवाने है। लिहाजा, यहां के थियेटर में आपको रजनीकांत की फिल्म के पोस्टर जरूर दिख जाएगी।

14वीं शदाब्दी में बनाया गया था
चेन्नई में कई पुराने और पॉपुलर चर्च हैं। सेंट थॉमस के सम्मान में बनाई गई सैन थॉम बड़ा गिरीजाघर चौदहवीं शदाब्दी में यहां बनाया गया था। यह काफी प्रसिद्ध है। सेंट थॉमस को ईसा मसीह के दूतों में से एक माना जाता है।

समृद्ध है यहां का कैंपस
आईआईटी मद्रास 1959 में शुरु किया गया था। यहां का कैंपस काफी बड़ा एवं समृद्ध है। यहां आना इजीनीयरिंग के छात्रों का सपना होता है।

मंदिरों का शहर
चेन्नई मंदिरों के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां की कपालीश्वर मंदिर तीर्थयात्रियों के लिए बहुत मायने रखता है। यहां देवी पार्वती को पूजा जाता है।यह मंदिर द्रविड़ शिल्पकला का एक बेहतरीन उदाहरण है।

चेन्नई की शिल्क साड़ियां
चेन्नई की शिल्क साड़ियां एवं अन्य कई वस्तुएं यहां के पर्यटकों को काफी पसंद आती है। यहां शाम होते ही बाजारों का नजारा देखते ही बनता है।

कला को काफी बढ़ावा मिलता है
चेन्नई सभ्यता और संस्कृति के मामले में काफी समृद्ध मानी जाती है। यहां शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं अन्य कलाओं को काफी बढ़ावा दिया जाता है। 1930 में मद्रास विश्वविद्यालय ने देश में पहली बार संगीत को अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया।

प्राचीन नृत्य कलाओं में से एक
भरतनाट्यन की शुरुआत तमिलनाडु से ही हुई है। वहीं, यह भारत के सबसे प्राचीन नृत्य कलाओं में से एक है। यह काफी आकर्षक होता है।

आकर्षण का केन्द्र
मद्रास लाइट हाउस काफी पॉपुलर है। बंगाल की खाड़ी की ओर मुख किया यह लाइट हाउस पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। यह दुनिया के कुछ खास लाइटहाउसों में से एक है जहां इलिवेटर का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रकार का यह भारत में पहला है।

आकर्षक और परंपरागत
मंदिर के प्रवेश द्वार को गोपुरम् कहते हैं, जिसके लिए चेन्नई बहुत प्रचलित है। यहां यह काफी आकर्षक और परंपरागत तरीके से बनाया जाता है।












Click it and Unblock the Notifications