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Haldiram's: हल्दीराम में हिस्सेदारी के लिए लगी बड़ी कंपनियां लाइन में

Haldiram's: हल्दीराम का एक स्लोगन है - फाइट ओवर द लास्ट पीस - आल ओवर अगेन। इस स्लोगन को कई देसी विदेशी कंपनियां हल्दीराम पर ही आजमा रही हैं। हल्दीराम में हिस्सेदारी खरीदने के लिए कई बिज़नेस हाउस जोर मार रहे हैं। इसमें टाटा समूह सबसे आगे है। कहा तो ये भी जा रहा है कि टाटा समूह से 51 फीसद हिस्सेदारी के लिए हल्दीराम ने 10 बिलियन डॉलर यानी करीब 83 हजार करोड़ के बाजार मूल्य अनुसार कीमत की मांग की है। अमेरिकी कंपनी बैन कैपिटल भी इसका 10 फीसदी हिस्सा खरीदना चाहती है। इतना ही नहीं दुनिया में स्नैक्स बाजार की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी केलॉग ने भी हल्दीराम की हिस्सेदारी खरीदने में रुचि दिखाई है।

हल्दीराम ब्रांड यानि का गुणवत्ता प्रतीक

हल्दीराम ब्रांड गुणवत्ता के प्रति समर्पण और समय की मांग के अनुसार अपने उत्पाद को ढाल पाने में समर्थ बनाते हुए खुद को विकसित करने की क्षमता की कहानी है। 85 वर्ष से भी पुराने इस ब्रांड की सफलता बताती है कि कैसे कोई व्यवसाय परिश्रम और ईमानदारी से ब्रांड के रूप में स्थापित हो कर एक इंटरनेशनल पहचान बना लेता है।

Big companies include tata in line for stake in Haldiram history

हल्दीराम का इतिहास और विस्तार

हल्दीराम की शुरुआत राजस्थान के बीकानेर के गंगाबिशन अग्रवाल ने वर्ष 1937 में मिठाई और नमकीन की एक छोटी सी दुकान से की थी। इस दुकान का नाम "हल्दीराम भुजियावाला" रखा गया। इसकी वजह ये थी कि गंगाबिशन अग्रवाल को उनकी मां हल्दीराम कहकर बुलाती थीं। श्री गंगाबिशन अग्रवाल के बेटे रामेश्वर अग्रवाल और सत्यनारायण अग्रवाल ने इस व्यवसाय को वर्ष 1941 में संभाला। उनके नेतृत्व में हल्दीराम का धंधा चल निकला और दुकान को बीकानेर में एक बड़े स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। उन्हीं दिनों से इस नाम को अपनी गुणवत्ता वाले स्नैक्स और मिठाइयों के लिए पहचान मिलनी शुरू हुई।

दिल्ली आने पर चमका व्यवसाय

देश की आजादी के काफी बाद वर्ष 1968 में रामेश्वर अग्रवाल के परिवार ने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए इसे दिल्ली में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। ये एक बड़े बाजार में प्रवेश करने और विस्तार करने के लिए एक रणनीतिक कदम था। दिल्ली का स्टोर हल्दीराम का प्रमुख केंद्र बन गया।

बदलते जमाने के साथ जोड़े नए-नए स्वाद

हल्दीराम ने 1970-80 के बीच अपनी उत्पादों की कड़ी में नए-नए स्वाद वाले स्नैक्स और मिठाइयों को जोड़ना जारी रखा। बदलते उपभोक्ता स्वाद को ध्यान में रखा। गुणवत्ता और स्वच्छता पर सर्वाधिक ध्यान दिया जो बाजार के अन्य ब्रांडों से प्रतिस्पर्धा में अलग करता गया। हल्दीराम की उल्लेखनीय वृद्धि 1990 के दशक में दिखी। इसी अवधि में पूरे भारत में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया और देश के विभिन्न शहरों में कई आउटलेट खोले। इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी कदम रखा और अपने उत्पादों को उन्होंने उन देशों में निर्यात करना शुरू किया जहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी हैं।

इन देशों में फैला है कारोबार

बाज़ार में प्रासंगिक बने रहने के लिए उन्होंने नई पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की नई रणनीतियों पर अमल शुरू किया। संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, सिंगापुर, मलेशिया और अन्य सहित दुनिया भर के कई देशों में इसकी उपस्थिति है।

उत्पादों की विस्तृत रेंज

हल्दीराम अपने खाद्य उत्पादों की विस्तृत रेंज के लिए जाना जाता है। इनमें रसगुल्ला और गुलाब जामुन जैसी पारंपरिक भारतीय मिठाइयों के साथ भुजिया, समोसा और विभिन्न प्रकार के नमकीन व स्नैक्स शामिल हैं। समय के साथ ये ब्रांड तैयार भोजन और पेय पदार्थ भी पेश करने लगा।

पारिवारिक व्यवसाय का बंटवारा

हल्दीराम पारिवारिक मालिकाना हक वाला और उसी से संचालित होने वाला व्यवसाय है। व्यवसाय के साथ परिवार भी बढ़ता गया। पारिवारिक मतभेद पैदा हुए और परिवार में विभाजन हो गया। इस वजह से दो अलग-अलग इकाइयाँ बनीं। हल्दीराम (नागपुर) और हल्दीराम (दिल्ली)। दोनों स्वतंत्र रूप से स्वामित्व में है और दोनों अपने-अपने ढंग से संचालित होती हैं।

हल्दीराम (नागपुर)

हल्दीराम (नागपुर) का मुख्यालय महाराष्ट्र स्थित नागपुर में है। हल्दीराम फूड्स इंटरनेशनल नाम की इस कंपनी को पैकेज्ड स्नैक्स, मिठाइयों और खाने के लिए तैयार खाद्य पदार्थों की विस्तृत चेन के लिए जाना जाता है। इसके कुछ लोकप्रिय उत्पादों में भुजिया, मूंग दाल, सोन पापड़ी और बहुत कुछ शामिल हैं। अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों में इसकी मजबूत उपस्थिति है। इसका संचालन बड़े बेटे शिवकिशन अग्रवाल करते हैं।

हल्दीराम (दिल्ली)

हल्दीराम (दिल्ली) का मुख्यालय देश की राजधानी दिल्ली में है। हल्दीराम स्नैक्स एंड एथनिक फूड्स नाम की इस कंपनी के पास स्नैक्स और मिठाइयों की एक अलग रेंज है। इसके राज कचौरी, पापरी चाट और गुलाब जामुन शामिल हैं। अपने नागपुर वाले ब्रांड की तरह हल्दीराम (दिल्ली) की भी विभिन्न देशों में महत्वपूर्ण उपस्थिति है। इसका संचालन मनोहर और मधुसूदन अग्रवाल के जिम्मे है।

हल्दीराम के दिल्ली में पहले से ही 100 से अधिक रेस्तरां हैं। नागपुर में भी 30-40 के करीब हैं। पूर्वी भारत में हल्दीराम के व्यवसाय का नियंत्रण कोलकाता स्थित हल्दीराम भुजियावाला से होता है। वहां भी कई रेस्तरां हैं। इसके अलावा कई फ्रेंजाइजी भी दे रखे हैं। यही कारण है कि कमाई के मामले में भारत में हल्दीराम का मुकाबला मैकडॉनल्ड्स और डोमिनोज़ दोनों मिलकर भी नहीं कर पाते। हल्दीराम समूह की देश में कई पंजीकृत कंपनियाँ हैं।

मार्च 2022 को समाप्त वित्तीय वर्ष में इसका राजस्व कम से कम 981 मिलियन डॉलर था । जबकि रॉयटर्स के अनुसार इसका राजस्व अब 1.5 बिलियन डॉलर के करीब है और वार्षिक लाभ लगभग 200 मिलियन डॉलर है। सौदे के लिए हल्दीराम द्वारा मांगी गई 10 बिलियन डॉलर की वैल्यूएशन उसके 1.5 बिलियन डॉलर के वार्षिक राजस्व का 6.6 गुना है।

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