कटते पेड़ों की वजह से कर्नाटक में विलुप्त हो रही है यह प्रजाति

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बेंगलोर। दिन प्रतिदिन कटते पेड़ों का असर सिर्फ हम इंसानों पर ही नहीं पड़ रहा, बल्कि बाकि जीव जंतुओं को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

विकास के नाम पर पेड़ों को काटने की वजह से जंगल में रहने वाले प्राणियों के अस्तित्व पर भी आफत बन आई है। इनमें से एक है, चमगादड़।

ऐसा लगता है चमगादड़ की बातें अब हम सिर्फ बैटमैन फिल्मों और कॉमिक्स में ही देख-सुन पाएंगें।

विश्व में चमगादड़ों की 39 प्रजातियां हैं। जिनमें से लगभग एक- तिहाई भारत में पाई जाती है। दूसरे जगहों से हटकर, अगर बात करें कर्नाटक की तो कभी यह राज्य चमगादड़ों का गढ़ हुआ करता था। लेकिन आज यहां पाई जाने वाली चमगादड़ की प्रजाती विलुप्त होने की कगार पर है।

यहां बड़े पैमाने पर इन जीवों के प्राकृतिक निवास के विनाश की वजह से यह जंतु अब विलुप्त होता जा रहा है। 'कौलर लीफ बैट' चमगादड़ों की एक दुर्लभ और क्षेत्र विशेष प्रजाती है। जो दशकों से नहीं दिखी है। और अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह लुप्त हो चुकी है।

चमगादड़ मुख्य रूप से पेड़ों, दरारों, पुरानी इमारतों या पेडो़ं के खोखले जगहों पर रहते हैं। लेकिन कंक्रीट के जंगलों को बनाने हेतु दिन-ब-दिन पेड़ों के कटने की संख्या में वृद्धि होने से इन जीवों के प्राकृतिक निवास पर हमला हो रहा है। ग्रेनाइट खदानों का खनन भी गुफा में रहने वाले चमगादड़ों के लिए खतरा है।

गौरतलब है कि चमगादड़ों से संबंधित कई ऐसी जानकारियां हम नहीं जानते जो महत्वपूर्ण है। बल्कि कई तथ्यहीन बातों पर जरूर जोर दिया जाता है। आपको बता दें, चमगादड़ कभी इंसानों पर हमला नहीं करते। बल्कि वे खुद इंसानों से डरते हैं। वहीं, ये फूलों के पॉलीनेशन प्रक्रिया में भी मदद करते हैं और पौधों से कीट को नष्ट करते हैं। जिस वजह से कीटनाशकों की जरूरत नहीं पड़ती है।

भारत के चमगादड़ संरक्षण ट्रस्ट ने कर्नाटक में इन संकेतों को देखते हुए आगाह किया है कि यदि इनके प्राकृतिक निवास को संरक्षित नहीं किया गया तो इस राज्य से यह जल्द ही विलुप्त हो जाएंगे।

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