भूल जाइये 1992 के दंगे, क्योंकि अयोध्या अब युवाओं के हाथों में है
[अजय मोहन] बाबरी मस्जिद विध्वंस की 21वीं बरसी पर लेख लिखना था। मैंने फोन उठाया और अयोध्या में अपने मित्र सरफरोज रहमान के चचेरे भाई व अयोध्या के निवासी हफीज उल रहमान को फोन लगाया। अपना परिचय देने के बाद जब मैंने वहां के माहौल के बारे में पूछा, तो जवाब मिला, "आप मीडिया वालों और नेताओं को और कुछ नहीं मिलता, बिला-वजह हमारी शांति में खलल डालने का काम करते हैं आप लोग। हमारा शहर शांत है, सब चैन से रह रहे हैं, सब ठीक है खुदा हाफिज़।"
23 वर्षीय हफीज के फोन से दो बातें साफ जाहिर होती हैं- पहली कि आज के युवा दंगे फसाद के इतिहास को पलट कर देखना नहीं चाहते और दूसरी बाबरी मस्जिद मुद्दे पर अब तक हुई राजनीति के कारण देश के युवा नेताओं से घृणा करने लगे हैं। मुझसे रहा नहीं गया, मैंने अपने उस मित्र को फोन लगाया, जिसके साथ बचपन के कुछ साल मैंने गुजारे थे। आमिर सिद्दीकी, जिसका अयोध्या में प्लास्टिक उत्पादों का होल-सेल का बिजनेस है।
आमिर ने भी सीधे यही कहा, "अयोध्या नहीं, राजनीति के शिकार तो हम व्यापारी हो रहे हैं। सरकारी फरमान आते ही अयोध्या छावनी में तब्दील हो जाती है और मेरे जैसे सैंकड़ों व्यापारियों का धंधा चौपट हो जाता है। जरा सोचिये अगर एक महीने तक पुलिस गश्त करती रहे, इलाके में तनाव जारी रहे, तो बिजनेस पूरे एक महीने के लिये बंद। तब हमारा हाल उस व्यक्ति की तरह हो जाता है, जिसकी सैलरी रुक जाती है। तब या तो बिजली का बिल नहीं जमा हो पाता है, या फोन कट जाता है या फिर मोबाइल में बैलेंस नहीं डलवा पाते, क्योंकि परिवार को दो वक्त की रोटी तो देनी ही होती है।"

हफीज और आमिर दोनों की बात से साफ है कि अयोध्यावासी खुद नहीं चाहते हैं कि अब उनके शहर में किसी भी प्रकार का बवाल हो। तो फिर क्यों न हम 1992 के दंगों को भूल जायें। क्यों न भारतीय जनता पार्टी, आरएसएस या बजरंग दल जैसी पार्टियां उस मुद्दे को दफ्न कर विकास की राजनीति करें। खैर नेता भूलें या न भूलें, आप जरूर भूल जाइये, क्योंकि आपका अयोध्या अब युवाओं के हाथ में है।
जो युवा वर्ग आज अयोध्या की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहा है, उससे मंदिर-मस्जिद से कोई मतलब नहीं। क्योंकि युवाओं में जो 21 वर्ष से नीचे हैं, उन्होंने तो दंगे देखे ही नहीं। जो युवा 22 से 30 वर्ष के हैं, उन्हें बचपन की वो घटना याद भी नहीं है और 31 से 35 के युवा वर्ग को मंदिर-मस्जिद की नहीं, बल्कि अपनी नौकरी, परिवार और भविष्य की चिंता होती है। अयोध्या के लोग ज्यादा पढ़े लिखे हैं। देश की साक्षरता दर 59.5 प्रतिशत है, जबकि अयोध्या की 65 प्रतिशत। 63 फीसदी जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है।
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अयोध्या के विधायक तेज नारायण पांडे ऊर्फ 'पवन' की आयु भी मात्र 31 वर्ष है। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार आने के बाद यहां की हवा ने अलग ही रुख कर लिया है। विधायक पवन पांडे जो बचपन में अक्सर मुलायम सिंह यादव की गोद में खेला करते थे, आज अपनी अयोध्या को लेकर बहुत ही सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। उत्तर प्रदेश में मनोरंजन कर मंत्री पवन पांडे से जब हमने मंदिर-मस्जिद पर बात की, तो उन्होंने कहा, "मैं अब इस मुद्दे पर बात नहीं करना चाहता हूं, क्योंकि अब मैं अयोध्या की अर्थव्यवस्था को पीछे नहीं जाने देना चाहता हूं। हाल ही में 84 कोसी यात्रा के पहले अयोध्या के व्यापारी खुद मुझसे मिलने आये और कहा इस यात्रा को रोक दीजिये, नहीं तो महीने भर तक हमारे घर के राशन-पानी की व्यवस्था कर दीजिये।"

अयोध्या को सशक्त पर्यटन नगरी बनाने के लिये कदम बढ़ा चुके विधायक पवन पांडेय ने कहा, "हम अयोध्या को पर्यटन नगरी के रूप में विकसित कर रहे हैं, ताकि कश्मीर से लेकर कन्या-कुमारी तक के लोग भगवान राम की जन्मभूमि के दर्शन करने आ सकें। इसके लिये विशेष रूप से सरर्यू नदी के तटों का सौंदर्यीकरण किया गया है। तट पर स्नान करने वाली महिलाओं को खुले में कपड़े बदलने पड़ते थे। 65 सालों में किसी भी सरकार ने इस संबंध में नहीं सोचा। हमने तट पर महिलाओं के लिये चेंजिंग रूम की व्यवस्था की है।
पर्यटन विभाग की ओर से विशेष काउंटर बनवाये गये हैं, ताकि दूर-दराज से आने वाले लोग आस-पास की यात्रा कर सकें। पार्कों के अलावा राम की पौड़ी को हम अलग रूप देने जा रहे हैं। प्रोजेक्ट पास हो गया है और काम भी शुरू हो चुका है। फैजाबाद में 65 वर्षों से जो सड़कें टूटी-फूटी पड़ी थीं, उनके लिये 30 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट हम लेकर आये, ताकि पर्यटकों अपनी यात्रा का आनंद अच्छी तरह उठा सकें। यहां पर डिग्री कॉलेज खोले जाने की योजना पर कार्य प्रगति पर है। कुल मिलाकर मेरा मकसद अयोध्या के लिये पर्यटन के जरिये रेवेन्यू जैनरेट करना मुख्य मकसद है। बारिश के वक्त आने वाले पर्यटकों को जलभराव से नहीं जूझना पड़े इसलिये अयोध्या समेत पूरे फैजाबाद में 181 करोड़ रुपए के खर्च पर सीवर लाइन दुरुस्त करने का काम शुरू हो चुका है।
पवन ने आगे कहा, "अयोध्या की आम जनता से अगर आप 1992 की चर्चा करते हैं तो व्यापारी कहते हैं- धंधा चौपट होता है, बच्चे कहते हैं पढ़ाई डिस्टर्ब होती है, महिलाएं कहती हैं- अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है, बुजुर्ग कहते हैं अगर नेता ईमानदार होते तो अयोध्या की यह दुर्गति नहीं होती। लिहाजा मैंने सोच लिया है कि अब अयोध्या को दुर्गति से बाहर निकालना है, उसके लिये चाहे कुछ भी करना पड़े।"













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