Amethi Seat: अमेठी सीट रही है हॉट सीट, राजीव और मेनका गांधी की हुई थी यहां टक्कर
Amethi Seat: दिल्ली से करीब 685 किमी दूर बसा उत्तर प्रदेश का एक शहर अमेठी किसी पहचान की मोहताज नहीं है। क्योंकि, अमेठी सीट के 57 सालों के इतिहास में यहां ज्यादातर कांग्रेस का ही दबदबा रहा है। उसमें भी गांधी परिवार के लिए यह संसदीय सीट राजनीतिक कर्मस्थली रही है।
यहां से संजय गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी एक से ज्यादा बार चुनकर संसद जा चुके हैं। लेकिन, अब यहां की फिजा बदली हुई है। वर्तमान में यहां की सांसद बीजेपी की महिला नेता व केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी हैं।

2024 लोकसभा चुनाव के लिए अमेठी से बीजेपी ने एक बार फिर स्मृति ईरानी पर दांव खेला है। जबकि अमेठी लोकसभा सीट के लिए कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है। दरअसल इंडिया गठबंधन में ये सीट कांग्रेस के खाते में गई है। साथ ही बसपा ने भी अभी तक उम्मीदवार नहीं उतारा है।
अमेठी लोकसभा का सियासी इतिहास
उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से अमेठी सीट को नेहरू-गांधी परिवार का गढ़ माना जाता रहा है। इस लोकसभा सीट का सियासी इतिहास भी बेहद दिलचस्प रहा है। साल 1967 में अमेठी लोकसभा सीट अस्तित्व में आई। तब से लेकर अब तक 16 लोकसभा चुनाव (2 उपचुनाव समेत) हो चुके हैं। जिसमें 13 बार कांग्रेस ने परचम लहराया है, जबकि एक बार जनता पार्टी और दो बार बीजेपी ने इस सीट पर जीत हासिल की है।
अमेठी लोकसभा सीट के तहत कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं। इन विधानसभा सीटों के नाम हैं तिलोई, जगदीशपुर, गौरीगंज, सालौन और अमेठी। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 3 और समाजवादी पार्टी को 2 सीटों पर जीत मिली थी। लेकिन, बाद में गौरीगंज से सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह बीजेपी में शामिल हो गए। बाकी की चार सीटों में तिलोई से बीजेपी के मयंकेश्वर शरण सिंह, सालौन से बीजेपी के अशोक कुमार, जगदीशपुर से बीजेपी के सुरेश कुमार, अमेठी से समाजवादी पार्टी के महाराज प्रजापति विधायक हैं।
साल 1967 में बनी अमेठी लोकसभा सीट पर पहली बार कांग्रेस के विद्याधर वाजपेयी सांसद बने। तब उन्होंने भारतीय जनसंघ के गोकुल प्रसाद पाठक को 3,665 वोटों के अंतर से हराया था। इसके बाद 1971 के चुनाव में विद्याधर वाजपेयी ने गोकुल प्रसाद 74,977 वोटों के अंतर से दोबारा हराया।
1977 में होती है 'गांधी परिवार' की एंट्री
आपातकाल के बाद 1977 में हुए लोकसभा चुनाव के लिए अमेठी से पहली बार गांधी परिवार से किसी सदस्य ने इस सीट से अपनी दावेदारी पेश की। कांग्रेस पार्टी ने संजय गांधी को मैदान में उतारा लेकिन आपातकाल से निराश जनता ने संजय गांधी पर अपना विश्वास नहीं जताया। नतीजा यह रहा कि इस चुनाव में संजय गांधी की हार हुई और जनता पार्टी के उम्मीदवार रविंद्र प्रताप सिंह सांसद बनें। ये पहली बार था जब कांग्रेस को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद 1980 में मध्यावधि चुनाव हुए और संजय गांधी दूसरी बार मैदान में उतरे। इस बार संजय गांधी अमेठी लोकसभा सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंदी जनता पार्टी के रविंद्र प्रताप सिंह को 1,28,545 वोटों से हराकर संसद पहुंचे। लेकिन, कुछ समय बाद एक विमान दुर्घटना में संजय गांधी की मौत हो गई।
जब सत्ता के लिए अमेठी में भिड़े राजीव और मेनका गांधी?
संजय गांधी की मृत्यु के बाद 1981 में अमेठी सीट पर उपचुनाव हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस ने इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी को राजनीति में उतारा और वह 1981 में अमेठी से पहली बार सांसद बने। लेकिन, गांधी परिवार के बीच असली राजनीति का खेल तो 1984 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से देखने को मिला।
संजय गांधी के निधन के बाद मेनका गांधी अपने पति की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहती थीं। लेकिन, इंदिरा गांधी की हत्या के कारण देश में उठी राजनीतिक परिस्थिति और मेनका के गांधी परिवार से चल रहे मनमुटाव के कारण पार्टी ने उन्हें दरकिनार कर दिया। राजीव गांधी दोबारा कांग्रेस की तरफ से मैदान में उतरे।
दूसरी तरफ मेनका गांधी (संजय गांधी की पत्नी) एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अमेठी लोकसभा सीट से उतरीं। हालांकि, इस चुनाव में इंदिरा गांधी की हत्या से मिली सहानुभूति के कारण राजीव गांधी अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी मेनका गांधी को 3,14,878 वोटों से हराकर संसद पहुंचे।
इसके बाद 1989 और 1991 के आम चुनाव में भी राजीव गांधी ने अमेठी सीट से जीत हासिल की। दरअसल 1991 के लोकसभा चुनावों के दौरान 20 मई को पहले चरण की वोटिंग हुई और 21 मई 1991 को राजीव गांधी की तमिलनाडु में हत्या कर दी गई। जिसकी वजह से अमेठी में उपचुनाव हुए और कांग्रेस ने गांधी परिवार के करीबी कैप्टन सतीश शर्मा को उतारा। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार एमएम सिंह को हराया। इसके बाद साल 1996 लोकसभा चुनाव में भी सतीश शर्मा की जीत हुई।
पहली बार 1998 में बीजेपी ने मारी बाजी
साल 1998 के लोकसभा चुनाव में दौरान अमेठी की तस्वीर बदल गई। कांग्रेस से अमेठी की जनता का मोहभंग हो गया और इस चुनाव में बीजेपी के संजय सिंह ने कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाई। उन्होंने अमेठी से दो बार के सांसद रहे सतीश शर्मा को 23, 270 वोटों के अंतर से हराकर चुनाव में जीत दर्ज की। यह दूसरी बार थी जब किसी पार्टी ने कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाई थी। लेकिन, राजनीतिक कारणों से अगले साल फिर देश में लोकसभा चुनाव हुए।
कांग्रेस ने अब सोनिया को मैदान में उतारा
साल 1999 में कांग्रेस ने अमेठी लोकसभा सीट से बड़ा दांव खेलते हुए गांधी परिवार की बहू सोनिया गांधी (राजीव गांधी की पत्नी) को मैदान में उतारा। सोनिया गांधी तब कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष भी थीं। 1999 में सोनिया गांधी ने अमेठी लोकसभा से ही राजनीति में अपना पर्दापण किया था। उनके सामने भाजपा के प्रत्याशी संजय सिंह मैदान में थे। इस चुनाव में सोनिया गांधी तकरीबन 45 प्रतिशत वोट पाकर संजय सिंह को 3,00,012 वोटों से हराकर सांसद बनीं।
इसके बाद सोनिया गांधी ने अपने बेटे राहुल की खातिर यह लोकसभा सीट छोड़ दी और साल 2004 के 14वें लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को कांग्रेस ने पहली बार इस सीट से मैदान में उतारा। तब राहुल गांधी ने बसपा प्रत्याशी चंद्र प्रकाश मिश्रा मटियारी को 2,90,853 वोटों के अंतर से हराया। इसके बाद 2009 में भी राहुल ने अमेठी सीट से जीत दर्ज की। इस बार जीत का अंतर साढ़े तीन लाख से भी ज्यादा था।
जब राहुल गांधी को मिली कड़ी टक्कर
साल 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने तीसरी बार राहुल गांधी को अमेठी से मैदान में उतारा। जबकि बीजेपी ने स्मृति ईरानी पर दांव खेला। अमेठी लोकसभा का यह चुनाव काफी ज्यादा चर्चाओं में रहा था क्योंकि इस चुनाव के दौरान पूरे देश में मोदी लहर देखी गई थी। इसका असर अमेठी लोकसभा में दिखा। जहां साढ़े तीन लाख से ज्यादा मार्जिन से जीतने वाले राहुल गांधी को अमेठी में स्मृति ईरानी ने कड़ी टक्कर दी। इस चुनाव में राहुल गांधी को 4,08,651 वोट (43.36% वोट) मिले, जबकि स्मृति ईरानी को 3,00,748 वोट (31.91% वोट) मिले। यानी जीत का अंतर 1,07,903 वोट रहा।
इसके बाद साल 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पूरा खेल ही पलट दिया और तीसरी बार इस सीट से कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी। बीजेपी ने दोबारा स्मृति ईरानी को राहुल गांधी के खिलाफ मैदान में उतारा। इस चुनाव में स्मृति ईरानी 'गांधी परिवार' के गढ़ में राहुल गांधी को 55,120 वोटों से हराकर संसद पहुंचीं। स्मृति ईरानी को 4,68,514 वोट (49.71% वोट) मिले थे, जबकि राहुल गांधी को 4,13,394 वोट (43.86% वोट) मिले थे।
अमेठी का जातिगत समीकरण
अमेठी लोकसभा सीट पर मतदाताओं के हिसाब से जातीय समीकरण देखें तो यहां दलित, मुस्लिम, ब्राह्मण और राजपूत मतदाताओं का बोलबाला है। 2019 के चुनाव के मुताबिक यहां कुल वोटरों की संख्या 17 लाख के करीब है। इस संसदीय सीट पर दलित वोटर 26 प्रतिशत हैं, जबकि 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं। वहीं 18 प्रतिशत ब्राह्मण, 11 प्रतिशत क्षत्रिय, यादव और मौर्य मिलाकर 16 प्रतिशत वोटर हैं। जबकि 10 प्रतिशत लगभग कुर्मी और लोध हैं।
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