Age of Consent: सहमति से यौन संबंध बनाने की न्यूनतम आयु पर चल रही है बहस, जानें क्या हैं सुझाव ?
Age of Consent: भारत में 18 साल से कम उम्र के युवाओं द्वारा सहमति से यौन संबंध बनाने पर चर्चा जोर पकड़ने लगी है। इसके पक्ष में कई तरह के तर्क दिये जा रहे हैं, जैसे 18 साल पूरा होने पर युवाओं को संवैधानिक अधिकार मिल जाते हैं। संविधान के 61वें संशोधन में इन युवाओं को मताधिकार सहित ड्राइविंग लाइसेंस रखने का अधिकार दिया गया है। ऐसे में कहा जा रहा है कि इस उम्र के युवाओं को सहमति से यौन संबंध बनाने पर कोई ऐतराज नहीं होना चाहिये।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल भारत में 18 साल से कम उम्र वाले युवाओं को नाबालिग माना जाता है। भारत में इंडियन मेजोरिटी एक्ट, 1875 के अनुसार 18 साल पूरा होने के बाद ही युवाओं को कानूनन बालिग माना गया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट की सलाह
बीते दिनों बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि कई देशों ने किशोरों द्वारा सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र कम कर दी है। अब समय आ गया है कि हमारा देश और संसद भी दुनियाभर में हो रही घटनाओं से अवगत हो। यह मामला 10 जुलाई 2023 का है और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की एकल पीठ ने 25 वर्षीय युवक की याचिका पर सुनवाई के दौरान ये बातें कही थी। दरअसल, याचिकाकर्ता को 17 वर्षीय एक लड़की से बलात्कार के लिये दोषी माना गया था। जबकि याचिकाकर्ता का दावा है कि वे सहमति से रिश्ते में थे।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की टिप्पणी
जून 2023 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने केंद्र सरकार से सहमति से संबंध बनाने की उम्र 18 साल से घटाकर 16 करने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने यह अनुरोध भी एक बलात्कार के मामले में दिया था। न्यायमूर्ति दीपक अग्रवाल ने कहा कि भारतीय दंड संहिता में 2013 में संशोधन हुआ था। इसमें सहमति से संबंध बनाने की उम्र 16 से बढ़ाकर 18 साल कर दी गयी थी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के कारण आज के युवक-युवती जल्दी युवावस्था में पहुंच रहे है। एक-दूसरे के प्रति आकर्षित होकर सहमति से संबंध भी बना लेते हैं। इस मामले में न्यायमूर्ति ने कहा कि मैं भारत सरकार से अनुरोध करता हूं कि सहमति से संबंध बनाने की उम्र 18 से घटाकर 16 कर दी जाये ताकि किसी के साथ अन्याय न हो।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी किया समर्थन
5 नवंबर 2022 को कर्नाटक हाईकोर्ट ने सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र के मानदंडों पर दोबारा विचार करने को कहा था। दो जजों की पीठ ने यह सुझाव विधि आयोग को दिया था। उन्होंने कहा कि हमारे पास 16 साल में यौन संबंध बनाने से जुड़े कई मामले सामने आये हैं। ऐसे में हमारा मानना है कि विधि आयोग इस उम्र की सीमा पर फिर से विचार करे।
केंद्र सरकार की राय
यह मुद्दा संसद में भी उठाया जा चुका है। दिसंबर 2022 में सहमति से बने रिश्तों की उम्र घटाकर 16 करने पर केंद्र सरकार से सवाल किया गया था। इसके जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि यह सवाल ही नहीं उठता और सरकार ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पॉक्सो एक्ट, 2012 का हवाला देते हुए कहा था कि 18 साल से कम उम्र के युवा 'नाबालिग' परिभाषित किये गये हैं। यह कानून बच्चों को यौन शोषण और यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया था।
देश के मुख्य न्यायाधीश का तर्क
भारत के मुख्य न्यायाधीश धनंजय वाई. चंद्रचूड़ 18 साल से कम उम्र के युवाओं द्वारा सहमति से बने यौन संबंधों पर सकारात्मक रुख जता चुके है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को पॉक्सो एक्ट में शामिल नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र में यौन संबंध बनाना अपराधिक श्रेणी में आता है। भले ही किशोरों के बीच सहमति से संबंध बने हो। ऐसे कई मामलों में जजों के सामने कठिन प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
पॉक्सो एक्ट में क्या नियम है?
पॉक्सो एक्ट में 18 साल से कम उम्र के किशोरों को नाबालिग कहा गया है। इस कानून को 2012 में केंद्र सरकार ने लागू किया था। फिर साल 2019 में इसके प्रावधानों में संशोधन किये गये थे। फिलहाल इसके अनुसार नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध अथवा छेड़छाड़ के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाती है। यह एक्ट नाबालिगों को यौन उत्पीड़न, असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। पोक्सो एक्ट में मामला दर्ज होने पर तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान है और जमानत भी नहीं मिलती।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक पोक्सो एक्ट में साल 2017 में 53,874 मामले, 2018 में 47,221 मामले, 2019 में 47,335 मामले, 2020 में 39,827 मामले और 2021 में 32,608 मामले दर्ज किये गये थे।
दुनिया में क्या चल रहा है?
दुनियाभर के कई देशों में सहमति से संबंध बनाने की उम्र 14 से 16 वर्ष के बीच है। हालांकि नाइजीरिया में सबसे कम 11 वर्ष और नेपाल में सबसे ज्यादा 20 वर्ष है। जबकि सऊदी अरब, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, यमन, ईरान और लीबिया जैसे मुस्लिम बहुल देशों में उम्र को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। वैसे इन देशों में निकाह से अलग यौन संबंधों को अवैध करार दिया गया है। चाहे वे सहमति से ही क्यों न बने हो।
अन्य देशों की बात करें तो अंगोला और फिलीपींस में यह 12 वर्ष है जबकि नाइजर में 13 वर्ष। हाल ही में जापान ने इस उम्र को 13 साल से बढ़ाकर 16 साल कर दिया था। जर्मनी, चीन, ऑस्ट्रिया, इटली, सर्बिया, जर्मनी, पुर्तगाल, पैराग्वे, पेरू, ब्राजील, बोलीविया और इक्वाडोर में सहमति से यौन संबंधों की कानूनी उम्र 14 साल है। वहीं अमेरिका में यौन संबंधों की उम्र प्रत्येक राज्य में अलग-अलग है। यह वहां 16 से 18 साल के बीच है। साइप्रस और आयरलैंड में इसे 17 साल रखा गया है। 18 साल या अधिक उम्र में सहमति से बने यौन संबंधों को भारत के अलावा चिली, अर्जेंटीना, तुर्किये और वियतनाम में कानूनी अपराध से बाहर रखा गया है।












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