#AtalBihariVajpayee: अपने पिता संग एक ही क्लास में पढ़ते थे अटल बिहारी वाजपेयी, जानिए रोचक किस्सा
नई दिल्ली। आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि है, पिछले साल 16 अगस्त की शाम 5:05 बजे अटल बिहारी वाजपेयी ने हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह दिया था, अटल बिहारी ने सियासी पटल पर वो पद, गौरव और सम्मान हासिल किया, जिसे पाना हर किसी की किस्मत में नहीं होता है, उनके व्यवहार के तो विरोधी भी मुरीद थे। उनसे जुड़े बहुत सारे ऐसे किस्से हैं, जो लोगों के लिए प्रेरणाश्रोत हैं, उनकी जिंदगी के बहुत सारे पन्ने काफी रोचक भी हैं, जिन्हें हर किसी को जानना बहुत जरूरी है।

कानपुर के डीएवी कॉलेज से अटल बिहारी ने किया था एमए
आप में से बहुत कम लोग जानते होंगे कि वो और उनके पिता ने एक साथ एक ही कॉलेज में पढ़ाई की थी, जी हां, अटल बिहारी और उनके पिता दोनों ने कानपुर के डीएवी कॉलेज से एक साथ एमए की पढ़ाई की थी।

पिता-पुत्र दोनों ने एक ही क्लास में की थी पढ़ाई
अटल बिहारी ने कानपुर से एमए की पढ़ाई की थी, उन्होंने डीएवी कॉलेज से 1945-47 बैच में एमए किया था, उसी दौरान उनके पिता भी उसी कॉलेज में उसी विषय से और उसी बैच में एमए कर रहे थे। जैसे-जैसे उनके साथ पढ़ने वाले छात्रों को जब यह बात पता लगी तो वो सभी अटल बिहारी का मजाक उड़ाने लगे, कई बार प्रोफेसर भी इस बारे में हंसी मजाक कर लेते। लेकिन जब ये बातें ज्यादा होने लगीं तो दोनों ने अपने सेक्शन बदल लिए।

अधूरी रह गई थी लॉ की पढ़ाई
मालूम हो कि साल 1945-47 बैच में अटल जी ने डीएवी कॉलेज से एमए किया, इसके बाद 1948 में उन्होंने एलएलबी में प्रवेश लिया। लेकिन एक साल की पढ़ाई के बाद ही 1949 में वे संघ का काम करने के लिए पढ़ाई छोड़कर लखनऊ चले गए और उनकी यह पढ़ाई वहीं पर छूट गई। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी पूरी तरह से राजनीति को समर्पित हो गए।
अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्र कर रहा है याद
गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत तमाम दिग्गज नेता उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए सदैव अटल मेमोरियल पहुंचे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी अटल जी के मेमोरियल पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया
अटल बिहारी वाजपेयी पहले गैर-कांग्रेसी नेता थे जिन्होंने बतौर प्रधानमंत्री अपने पांच साल के कार्यकाल को सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्हें साल 2015 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था।












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