सबसे ज्यादा तप रहा है यूरोप
विश्व मौसम विज्ञान संस्थान (डब्ल्यूएमओ) की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरे 30 साल में धरती पर सबसे ज्यादा गर्म होने वाला महाद्वीप यूरोप है. पृथ्वी के दूसरे भूभागों की तुलना में यूरोप करीब दोगुनी तेजी से गर्म हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक इस गर्मी की वजह से यूरोप भीषण सूख भी झेल रहा है और तेजी से आल्प्स के ग्लेशियर भी खो रहा है. यह गर्मी भूमध्यसागर को भी तपा रही है.
ब्रिटेन में पहली बार जारी की गई रेड वॉर्निंग
यूरोप के अमीर देश भी सुरक्षित नहीं
एक बयान में डब्ल्यूएमओ के महासचिव पेटरी टालस ने कहा, "यूरोप गर्म होती दुनिया की लाइव तस्वीर पेश कर रहा है और बता रहा है कि अच्छी तरह तैयार समाज भी मौसमी अति की घटनाओं से सुरक्षित नहीं हैं."
रिकॉर्ड तोड़ प्रचंड गर्मी और जलवायु संकट में घिरी दुनिया
1991 से 2021 के बीच यूरोप का औसत तापमान हर दशक में 0.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ा. इसी समयावधि में बाकी दुनिया का तापमान हर दसवें साल में 0.2 डिग्री सेल्सियस के औसत से बढ़ा. 2021 में जलवायु परिवर्तन की वजह से यूरोप में इतनी मौसमी आपदाएं आईं कि 50 अरब डॉलर का नुकसान हुआ.

यूरोप ही सबसे ज्यादा तेजी से क्यों गर्म हो रहा है?
इसके जवाब में रिपोर्ट कहती है कि यूरोप का ज्यादातर इलाका उप-आर्कटिक और आर्कटिक क्षेत्रों से मिलकर बना है. कॉपरनिकस क्लाइमेंट चेंज सर्विस के वरिष्ठ वैज्ञानिक फ्रेया वोम्बॉर्ग के मुताबिक इस वजह से गर्मियों में यूरोप के ऊपर कम बादल मंडरा रहे हैं, जिससे सूरज की सीधी किरणें सतह पर पहुंचकर तपिश पैदा कर रही हैं. कुछ वैज्ञानिक यूरोप को "हीटवेब का हॉटस्पॉट" कह रहे हैं.
तापमान बढ़ने के बावजूद यूरोपीय संघ के देशों में 1990 से 2020 के बीच ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 31 फीसदी की कमी की है. यूरोप 2030 तक इस उत्सर्जन में 55 फीसदी की कटौती करने की तैयारी में है.

छह नवंबर 2022 से मिस्र एक शर्म अल शेख में विश्व जलवायु सम्मेलन CO27 शुरू हो रहा है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों और यूरोपीय आयोग की प्रेसीडेंट उर्सुला फॉन डेय लायन भी इसमें शिरकत करने जा रहे हैं. ब्रिटेन के नये प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी अब COP27 में शामिल होने वाले हैं.
ओएसजे/एनआर (रॉयटर्स)
Source: DW












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