Pulwama attack: 'मैं लौटकर आऊंगा, अपना मकान बनवाऊंगा', 4 दिन पहले पत्नी से वादा कर गया था जवान

Etawah news, इटावा। ​जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए फिदायीन हमले (pulwama attack) में 44 भारतीय जवान शहीद हो गए। शहीदों में यूपी के मैनपुरी के रहने वाले हेड कॉन्स्टेबल रामवकील माथुर भी शामिल हैं। शहादत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। अपने मायके इटावा में रह रहीं पत्नी और तीन बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। शहीद की पत्नी ने बताया कि पिछले रविवार को ही तो उनके पति यह कहकर घर से गए थे कि अगले महीने घर वापस आकर खुद का मकान बनवाएंगे।

2001 में हुई थी CRPF में भर्ती

2001 में हुई थी CRPF में भर्ती

मैनपुरी जिले के दन्नाहार थाने के विनायपुरा गांव के रहने वाले रामवकील 2001 में सिपाही के पद पर सीआरपीएफ (CRPF) में भर्ती हुए थे। 2003 में उनकी शादी इटावा के अशोक नगर निवासी गीता के साथ हुई थी। जम्मू में तैनाती से पहले रामवकील अलीगढ़ में तैनात थे। दो साल पहले बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए उन्होंने अपने दोनों बड़े बेटे राहुल और साहुल का ए​डमिशन केंद्रीय विद्यालय इटावा में करवा दिया था, जिस कारण गीता अपने तीनों बच्चों को लेकर सास के साथ मायके में रह रही थीं। गीता के ससुर यानि शहीद के पिता का पहले ही निधन हो चुका है।

पत्नी से किया था खुद का मकान बनवाने का वादा

पत्नी से किया था खुद का मकान बनवाने का वादा

शहीद की पत्नी गीता बताती हैं कि छुट्टी से वापस जाते समय उनके पति कहकर गए थे कि अगले महीने मार्च में आकर वह अपना खुद का मकान बनवाएंगे। गीता कहती हैं कि अब उन्हें मायके में रहते हुए अच्छा नहीं लगता, इसलिए उनके पति इटावा में ही वह अपने प्लॉट पर लोन लेकर घर बनवाने वाले थे।

परिवार में कोहराम, पत्नी-बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल

परिवार में कोहराम, पत्नी-बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल

शहादत की खबर मिलते ही परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। खासतौर पर बड़े बेटे राहुल जिसकी उम्र अभी 12 वर्ष है, वह जो केंद्रीय विद्यालय में कक्षा 8 का छात्र है और उससे 2 साल छोटा साहुल जो कक्षा 7 में पड़ता है, दोनों अपने पापा को याद करते हुए अपने नाना ओर नानी की गोद से हटने का नाम नहीं ले रहे है।

सरकार से नाराजगी

सरकार से नाराजगी

शहीद का सबसे छोटा बेटा अंश भी अपनी मां की गोद मे रोते हुए जानने की कोशिश कर रहा है कि आखिर हुआ क्या घर में चीख पुकार क्यों मची है। 4 साल का अंश नहीं जानता कि उसके पापा अब कभी घर वापस नहीं आएंगे। इस दौरान शहीद की पत्नी की सरकार से नाराजगी भी दिखी। उन्होंने कहा कि सरकार कुछ करना नहीं चाहती है, तभी ये सब हो रहा है।

यूपी के 12 जवान शहीद

यूपी के 12 जवान शहीद

पुलवामा आतंकी हमले में उत्तर प्रदेश के 12 जवान शहीद हुए हैं। योगी सरकार ने शहीद हुए जवानों के प्रत्येक परिजनों को 25 लाख रुपए मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। हालांकि, इस मुआवजे के एलान के बाद वाराणसी के रहने वाले शहीद रमेश यादव के परिजनों में रोष व्याप्त है।

1.5 करोड़ मुआवजे की मांग

1.5 करोड़ मुआवजे की मांग

शहीद के पिता श्याम नारायण यादव और उनके बड़े भाई सभाजीत यादव ने मुआवजे पर असहमति जताते हुए कहा है कि यूपी सरकार ने जो मुआवजे का एलान किया है, हम उससे संतुष्ट नहीं हैं। पिता और भाई ने कहा है कि हमे मुआवजे में 1.5 करोड़ रुपए मिलना चाहिए और साथ ही बड़े भाई सभाजीत ने कहा है कि जब तक यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नहीं आएंगे तब तक शहीद रमेश यादव का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

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