यूक्रेन से लौटी छात्रा तेजस्विता ने सुनाया दहशत का मंजर, बोलीं- हर तरफ मौत का तांडव..बंकरों में छिपकर बचाई जान

यूक्रेन से लौटी छात्रा तेजस्विता ने सुनाया दहशत का मंजर, बोलीं- हर तरफ मौत का तांडव..बंकरों में छिपकर बचाई जान

इटावा, 26 फरवरी: यूक्रेन में रूस के हमले के बाद वहां पढ़ाई कर रहे हजारों भारतीय छात्र फंस गए हैं। यूक्रेन में छात्रों के फंस जाने की वजह से भारत में उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है। इस बीच इटावा जिले की रहने वाली एमबीबीएस की छात्रा तेजस्विता यादव युद्धग्रस्त यूक्रेन से निकल शुक्रवार 25 फरवरी को वापस भारत लौट आईं है। यूक्रेन से अपने घर आई छात्रा ने वहां के खौफनाक मंजर का आंखों देखा हाल बया किया।

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    यूक्रेन से लौटी छात्रा तेजस्विता ने सुनाया दहशत का मंजर
    उज्बेकिस्तान के रास्त वापस लौटी तेजस्विता

    उज्बेकिस्तान के रास्त वापस लौटी तेजस्विता

    युद्ध के बीच फ्लाइट के जरिये उज्बेकिस्तान के रास्ते तेजस्विता यादव शुक्रवार की देर शाम भारत लौटी और शताब्दी एक्सप्रेस से गृहजनपद इटावा पहुंच गईं। रेलवे स्टेशन पर मां-पापा को देखते ही तेजस्विता भावुक हो गई और मां को गले लगाकर रोने लगी। युद्धग्रस्त देश युक्रेन से सुरक्षित वापस लौटी अपनी बेटी को गले लगाकर मां ने भी दुलार किया। इस दौरान छात्रा ने कहा कि मैं बहुत लकी हूं जो आज अपने घर वापस आ गई। दूतावास के जरिए सही जानकारी न दिए जाने के कारण वहां सैकड़ों छात्र फंसे हैं।

    तेजस्विता ने आंखों देखा हाल किया बया

    तेजस्विता ने आंखों देखा हाल किया बया

    युद्ध ग्रस्त यूक्रेन से क्षेत्र से वापस भारत लौटी इटावा जिले की रहने वाली तेजस्विता यादव ने दहशत का आंखों देखा मंजर बया किया। मीडिया से बात करते हुए तेजस्विता ने बताया कि उनके आने के बाद सारी फ्लाइटें बंद कर दी गईं। कीव शहर में सेना लगा दी गई है और वहां ब्लास्ट हो रहे थे। लोग इधर-उधर अपनी जान बचाकर भाग रहे थे और अफरा-तफरी का माहौल था। हर ओर मौत का ही तांडव दिखाई दे रहा था। तेजस्विता बताया कि कुछ भी समझ मे नहीं आ रहा है कि जो साथी यूक्रेन मे फंसे हुए हैं, वो कैसे वापस आएंगे। यही चिंता बार-बार सता रही है।

    भारतीय दूतावास के जरिये नहीं मिल पर रही सही जानकारी

    भारतीय दूतावास के जरिये नहीं मिल पर रही सही जानकारी

    तेजस्विता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारतीय दूतावास के जरिये कोई सही और सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है और न ही हकीकत बताई जा रही है। अभी भी 15,000 के आसपास मेडिकल छात्र फंसे हुए हैं। हमेशा सभी को जूते पहन कर रहना पड रहा है। जैसे ही साइरन बजता था वैसे ही डरकर सभी बंकर में जाकर छिप जाते थे। खाने पीने का कोई इंतजाम नहीं है। लोन के जरिये पढने वाले छात्रों की जान मुश्किल में फंसी हुई है। किसी भी छात्र के परिजन 80 हजार तक हवाई किराया खर्च करके बुलाने की स्थिति में नहीं है। जंग के मौहाल में वापस आने पर वो अपने आप को लकी और सेफ मानती हैं।

    तेजस्विता ने बताया कैसे लौट पाईं वापस

    तेजस्विता ने बताया कैसे लौट पाईं वापस

    तेजस्विता यूक्रेन के विनिस्तिया में एमबीबीएस थर्ड ईयर की छात्रा है। उनके पिता सत्येंद्र पाल इटावा जिले के कृषि इंजीनियरिंग कालेज में डायरेक्टर के पद पर तैनात हैं। मां अनीता यादव माध्यमिक शिक्षा चयन आयोग की पूर्व अध्यक्ष और सपा की महिला विंग की प्रांतीय महासचिव हैं। तेजस्विता ने बताया कि वो 23 फरवरी की शाम को वेलेंटसिया से कीव हवाई अड्डे पर पहुंच गई थीं। उसके बाद ही यूक्रेन सरकार ने कर्फ्यू का ऐलान कर दिया था। तेजस्विता यादव यूक्रेन में युद्ध शुरू होने से चंद घंटे पहले ही फ्लाइट से उज्बेकिस्तान पहुंच गईं थी और उज्बेकिस्तान से भारत।

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