इटावा से मृदुला कठेरिया ने किया नामांकन, भाजपा प्रत्याशी पति रामशंकर कठेरिया के खिलाफ मैदान में उतरी
इटावा। भाजपा प्रत्याशी रामशंकर कठेरिया की पत्नी मृदुला कठेरिया ने मंगलवार को इटावा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रुप में नामांकन दाखिल कर दिया है। मृदुला कठेरिया अपने पति को बीजेपी से टिकट मिलने से खासी नाराज दिखाई पड़ी। आपको बता दें कि इटावा सुरक्षित लोकसभा सीट से भाजपा ने रामशंकर कठेरिया का उम्मीदवार बनाया है। मृदुला कठेरिया के नामांकन करने के बाद सत्ता के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

रामशंकर कठेरिया के सामन सीट बचना बड़ी चुनौती
इटवा सीट पर वर्तमान में भाजपा का कब्जा है। इसे बचाने की चुनौती पार्टी प्रत्याशी रामशंकर कठेरिया पर होगी। जानकारों की मानें तो 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में भाजपा प्रत्याशी अशोक दोहरे ने अच्छे मार्जिन के साथ जीत हासिल की थी। तब से अब चुनावी समीकरण बदले हैं। ऐसे में इस सीट से रामशंकर कठेरिया की पत्नी मृदुला कठेरिया ने भी इटावा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन कर भाजपा को झटका दिया है।

पिछले काफी समय कर रही थी तैयारी
आपको बता दें कि मृदुला कठेरिया इटावा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए पिछले काफी समय से तैयारी कर रही थी। मंगलवार को उनके निर्दलीय नामांकन के बाद से बीजेपी में चर्चों का बाजार गर्म हो गया। इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए मृदुला कठेरिया पिछले काफी समय से तैयारी कर रही थी, लेकिन बीजेपी ने उनके पति रामशंकर कठेरिया का आगरा से टिकट काटकर इटावा से प्रत्याशी घोषित कर दिया। जिसके बाद से इनके चेहरे पर उदासी दिखाई दे रही थी और आज उसी नाराजगी के चलते मृदुला कठेरिया ने अपने पति रामशंकर कठेरिया के बिना सहमति के निर्दलीय प्रत्याशी के तौर नामांकर कर दिया।
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पर्चा भरा है तो जीत भी मेरी होगी: मृदुला कठेरिया
मृदुला कठेरिया ने नामांकन के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, 'उनके पति से उनकी कोई नारजगी नहीं है, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।' उन्होंने कहा कि वह पिछले काफी दिनों से भाजपा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही थी लेकिन पार्टी ने उनके पति रामशंकर को प्रत्याशी घोषित कर दिया। इटावा की जनता उन्हें प्रत्याशी के तौर पर देखना चाहती थी इसलिए जनता का मन रखने के लिए उन्होंने नामांकन दाखिल किया है। यह लोकतन्त्र है कोई भी चुनाव लड़ सकता है। मैने पर्चा भरा है तो जीत भी मेरी ही होगी।














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