सिर्फ एक बात पर टिकी है सलमान-लॉरेंस की दुश्मनी! क्या अब ठंडी पड़ सकती है बदले की आग?
Salman-Lawrence Fight: मुंबई में बाबा सिद्दीकी की हत्या ने हर किसी को हिलाकर रख दिया है। इस घटना के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में अगर कोई स्टार है तो वो हैं सलमान खान। सलमान खान की सुरक्षा में इजाफा हुआ है, मगर इस इजाफे के बीच एक्टर को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है। एक्टर के कई फैंस इस बात पर जोर दे रहे हैं कि आखिर जब बात माफी का ही है, तो सलमान खान माफी क्यों नहीं मांग लेते? हो सकता है कि माफी मांगने पर ये मसला ही खत्म हो जाए। मगर क्या ये इतना आसान है जितना लगता है।
कैसे शुरू हुआ ये मामला?
मामला 1998 का है, जब हम साथ-साथ हैं फिल्म की शूटिंग के दौरान काला हिरण मामले में सलमान खान का नाम जुड़ गया। बिश्नोई समाज ने सलमान खान पर तब एफआईआर दर्ज करवाई थी और इसके बाद से ही शिकायतों का सिलसिला शुरू हो गया। इस मसले में सलमान खान को जेल तक जाना पड़ गया था। मगर बिश्नोई समाज ने सलमान खान को कभी माफ नहीं किया। सलमान के सामने माफी मांगने की शर्त रखी गई।

क्या चाहता है लॉरेंस बिश्नोई?
लॉरेंस बिश्नोई ने पुराने इंटरव्यू में कहा था कि सलमान खान अगर अपने गुनाह की माफी मांग लेंगे तो वो उन्हें माफ कर देंगे। ऐसे में क्या अगर वाकई सलमान खान माफी मांग लेगें तो ये मामला सुलट जाएगा? क्या वाकई इतना बड़ा मुद्दा सिर्फ माफी पर ही टिका हुआ है? अगर ऐसा ही है, तो सलमान बिश्नोई समाज के पवित्र स्थल मुक्तिधाम मुकाम में जाकर माफी क्यों नहीं मांग लेते?
बिश्नोई समाज के 29 नियम
इस मसले पर अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र बिश्नोई का कहना है कि अगर सलमान खान काफी मांग लेते हैं तो समाज उनके माफ कर सकता है। बिश्नोई समाज के 29 नियम हैं, जिसमें एक नियम में क्षमा करने का भी प्रावधान है। नियम कहता है कि अगर कोई अपराध करता है तो उसपर दया करते हुए उसे माफ किया जा सकता है। ऐसे में सलमान खान के मन में अगर माफी मांगने का भाव हो तो उसे बिश्नोई समाज की तरफ से माफ किया जा सकता है।
क्या कहता है कानून?
बीकानेर में भी जो बिश्नोई समाज के लोग हैं, वो कहते हैं कि अगर सलमान खान बीकानेर के मंदिर में गुरु जम्भेश्वर की समाधि स्थल पर पहुंचकर माफी मांग लें तो लॉरेंस बिश्नोई उन्हें माफ कर देगा। मुकाम मुक्ति धाम के लोग भी सलमान खान को अपराधी और लॉरेंस बिश्नोई को धर्म परायण मानते हैं। जबकि कानून की नजरों में दोनों एक ही हैं। किसी का भी अपराध साबित नहीं हुआ है।












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