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कौन हैं सुधा चंद्रन? एयरपोर्ट पर ऐसा क्या हुआ, जिसके लिए CISF को मांगनी पड़ी माफी

सुधा चंद्रन ने शुक्रवार को एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी से एक खास गुजारिश की।

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर: सुधा चंद्रन ने शुक्रवार को अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वो एयरपोर्ट के सुरक्षा अधिकारियों से काफी नाराज नजर आईं। अपने वीडियो में सुधा चंद्रन ने बताया कि वो जब भी एयरपोर्ट जाती हैं, तो सुरक्षा अधिकारी हर बार उनका कृत्रिम पैर हटवाते हैं और इससे उन्हें काफी अपमानित महसूस होता है। सुधा चंद्रन ने अपने वीडियो में पीएम मोदी से गुजारिश करते हुए कहा कि उन्हें दिव्यांग वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक ऐसा विशेष कार्ड जारी करना चाहिए, जिससे वो इस तरह अपमानित होने से बच सकें। आइए जानते हैं कि कौन हैं सुधा चंद्रन और किस हादसे की वजह से गंवाना पड़ा उन्हें अपना पैर?

'रमोला' और 'यामिनी' के किरदार से बटोरीं सुर्खियां

'रमोला' और 'यामिनी' के किरदार से बटोरीं सुर्खियां

सुधा चंद्रन एक जानी-मानी भरतनाट्यम डांसर और एक्ट्रेस हैं, जो टेलीविजन के साथ-साथ हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, तेलुगु और बंगाली फिल्मों में काम कर चुकी हैं। टीवी सीरियल 'कहीं किसी रोज' में रमोला सिंकद और 'नागिन' के तीनों पार्ट में यामिनी के किरदार से सुधा चंद्रन को काफी सुर्खियां मिलीं। इसके अलावा सीरियल 'साथ निभाना साथिया' के तमिल रीमेक 'दीवम थंडा वीडू' में भी चित्रादेवी के उनके रोल को दर्शकों के बीच काफी पंसद किया गया।

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    इन बड़ी फिल्मों में काम कर चुकी हैं सुधा चंद्रन

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    फिल्मों की अगर बात करें तो सुधा चंद्रन ने नाचे मयूरी, थानेदार, पति परमेश्वर, कुर्बान, जान-पहचान, निश्चय, इंतेहां प्यार की, कैद में है बुलबुल, शोला और शबनम, इंसाफ की देवी, फूलन हसीना रामकली, अंजाम, बाली उमर को सलाम, मिलन, रघुवीर, फिर वही आवाज, हम आपके दिल में रहते हैं, शादी करके फंस गया यार, मालामाल वीकली जैसी कई बड़ी फिल्मों में काम किया। भारतीय सिनेमा में सुधा चंद्रन के योगदान के लिए उन्हें 1985 में नेशनल फिल्म अवॉर्ड, स्पेशल जूरी अवार्ड और मयूरी 33वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। इसके अलावा सुधा चंद्रन के जीवन पर आधारित तेलुगु फिल्म मयूरी में उनकी भूमिका के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।

    क्यों गंवाना पड़ा सुधा चंद्रन को अपना पैर

    क्यों गंवाना पड़ा सुधा चंद्रन को अपना पैर

    सुधा चंद्रन के साथ ये भयानक हादसा मई 1981 में उस वक्त हुआ, जब वो मद्रास से अपने माता-पिता के साथ लौट रहीं थी। जिस बस से वो आ रहीं थी, तिरुचिरापल्ली के पास उसका एक्सीडेंट हुआ और उनके पैर बुरी तरह जख्मी हो गए। शुरुआत में स्थानीय हॉस्पिटल में ही उनका इलाज चला, लेकिन बाद में मद्रास के विजया हॉस्पिटल ले जाया गया। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उनके दाहिने पैर में गैंग्रीन बन गया है, जिसकी वजह से उनका पैर काटना पड़ेगा। सुधा चंद्रन के साथ जिस वक्त ये हादसा हुआ, उनकी उम्र महज 16 साल थी।

    कृत्रिम पैर के जरिए बनाया डांसिंग में करियर

    कृत्रिम पैर के जरिए बनाया डांसिंग में करियर

    हादसे में अपना पैर गंवाने के बावजूद सुधा चंद्रन ने हार नहीं मानी और कृत्रिम पैर के जरिए डांसिंग में अपना करियर बनाया। सुधा चंद्रन ने इससे पहले फेसबुक पेज 'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' पर भी अपने संघर्ष की कहानी शेयर की थी। अपनी पोस्ट में सुधा ने लिखा, 'जिस समय मैंने डांस सीखना शुरू किया, मेरी उम्र महज साढ़े तीन साल थी। डांसिंग को लेकर मेरा जुनून ऐसा था कि हाईस्कूल में मैंने साइंस की जगह आर्ट सब्जेक्ट को चुना। मैंने बस यही सोचा कि अगर मैं इस विषय को चुनूंगी तो डांसिंग को समय दे पाऊंगी। हालांकि जीवन में एक ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण मोड़ भी आया, जब एक हादसे में मुझे अपना दाहिना पैर गंवाना पड़ा। एक युवा डांसर के लिए इससे बुरा और क्या हो सकता है।'

    एयरपोर्ट पर आखिर हुआ क्या था?

    एयरपोर्ट पर आखिर हुआ क्या था?

    सुधा चंद्रन ने शुक्रवार को जो वीडियो जारी किया, उसमें उन्होंने एयरपोर्ट पर अपने साथ घटी घटना के बारे में बताया। सुधा चंद्रन ने वीडियो में कहा, 'ये एक बहुत ही निजी बात है, जो मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को बताना चाहती हूं। केंद्र सरकार और राज्य सरकार से ये मेरी एक अपील है। मैं सुधा चंद्रन एक एक्ट्रेस और डांसर हूं, जिसने कृत्रिम पैर के जरिए डांस किया और इतिहास रचकर अपने देश को गौरवान्वित महसूस कराया। लेकिन, जब भी मैं प्रोफेशनल टूर पर कहीं बाहर जाती हूं, तो हर बार मुझे एयरपोर्ट पर रोक दिया जाता है।'

    'वो चाहते हैं कि मैं कृत्रिम पैर निकालकर दिखाऊं'

    'वो चाहते हैं कि मैं कृत्रिम पैर निकालकर दिखाऊं'

    सुधा चंद्रन ने आगे कहा, 'जब मैं वहां सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के अधिकारियों से प्रार्थना करती हूं, कि प्लीज मेरे कृत्रिम पैर को जांचने के लिए ईटीडी (विस्फोटक ट्रेस डिटेक्टर) का इस्तेमाल कीजिए, तो वो नहीं मानते और चाहते हैं कि मैं अपना कृत्रिम पैर निकाल कर उन्हें दिखाऊं। क्या यह मानवीय रूप से ठीक है मोदी जी? मेरी आपसे प्रार्थना है कि आप हमें भी वरिष्ठ नागरिकों की तरह एक विशेष कार्ड जारी करें, ताकि हम इस अपमान को सहने से बच सकें।' सुधा चंद्रन के इस वीडियो के बाद सीआईएसएफ ने एक बयान जारी करते हुए माफी मांगी और कहा कि भविष्य में उन्हें एयरपोर्ट पर किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

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