The Taj Story Review: इतिहास के पन्नों को खंगालती है 'द ताज स्टोरी', परेश रावल की परफॉर्मेंस ने बांधा समां

The Taj Story Movie Review: परेश रावल, जाकिर हुसैन और अमृता खानविलकर के शानदार अभिनय से सजी फिल्म 'द ताज स्टोरी' रिलीज हो गई है। निर्देशक तुषार अमरीश गोयल की फिल्म ताजमहल के इतिहास पर वर्षों से चली आ रही बहस को बड़ी बेबाकी से दर्शाती है। फिल्म सवाल उठाती है कि दुनिया के अजूबे मे शामिल ताजमहल के पीछे क्या सच्चाई कुछ और ही है।

The Taj Story Movie Review

फिल्म की कहानी एक गाइड विष्णु दास ( परेश रावल) से शुरू होती है जिसके पिता ने कई साल पहले ताजमहल विवाद के चलते सुसाइड कर लिया था। परेश रावल का बेटा भी ताजमहल का गाइड है इस बीच कुछ ऐसी घटनाएं होती है। जिससे विष्णु दास ताजमहल के निर्माण पर पी आय एक दाखिल कर देता हैं। एक बढ़िया कोर्ट रूम ड्रामा में यह पीआईएल एक्सेप्ट हो जाती है कोर्ट का फैसला और फिल्म का क्लाइमेक्स अंत तक बांध कर रखता हैं। एक विवादित विषय पर द ताज स्टोरी असरदार सिनेमा बनकर सामने आती है।


फिल्म के सभी कलाकारों की शानदार एक्टिंग रही है। लेकिन परेश रावल की अदाकारी इस पिक्चर की नींव है। उन्होने अपने चरित्र को बड़ी गंभीरता और संजीदगी से निभाया है। इस फिल्म में परेश रावल का अभिनय पटकथा और कहानी को भी मात दे देता है। आपने उन्हें ओह माई गॉड में नानजी भाई, फिर हेरा फेरी में बाबू राव, आक्रोश, संजू में देखा होगा। लेकिन द ताज स्टोरी में वह अपने बेहद परिपक्व और ज़बरदस्त अभिनय से फिल्म पर पूरी तरह से छा गए हैं। जो नेशनल अवॉर्ड के लायक है। फिल्म 'द ताज स्टोरी' में परेश रावल ने एक टूर गाइड 'विष्णुदास' का कैरेक्टर प्ले किया है। वह कोर्ट रूम में ताजमहल के इतिहास पर सवाल उठाते हुए कानूनी जंग लड़ते हैं। उनका जोर ताजमहल के उन 22 रहस्यमयी कमरों पर है, जिनमें ढेरों रहस्य छिपे रहने की संभावना है।

लेखक और निर्देशक तुषार अमरीश गोयल का काम विशेष रूप से सराहनीय है। जिन्होंने किसी भी पहलू पर समझौता नहीं किया और एक ऐसी दमदार पटकथा लिखी है। जो आपको पलक झपकने का भी मौका नहीं देती और आपको फिल्म के ड्रामा में बांधे रखती है। उनका डायरेक्शन बहुत बेबाक, संतुलन भरा और असरदार है। फिल्म में काफी दमदार और जानदार संवाद हैं। इसका स्क्रीनप्ले इतना प्रभावशाली है, जो कोर्ट रूम ड्रामा की संजीदगी और तेजी को बरकरार रखता है।

एडवोकेट अनवर रशीद के रोल मे जाकिर हुसैन ने भी अपने किरदार के साथ न्याय किया है. अमृता खानविलकर, नमित दास, स्नेहा वाघ ने भी अच्छी एक्टिंग की है। फिल्म मे अखिलेंद्र मिश्रा, बिजेंद्र काला, शिशिर शर्मा और अनिल जॉर्ज भी अपनी सीमित भूमिका में अच्छा अभिनय किया हैं। फिल्म 'द ताज स्टोरी' एक जरूरी सिनेमा है और परेश रावल के अभिनय का कमाल और तकनीकी पहलुओं से बेमिसाल ये फिल्म प्रभावित करती है.

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